3 दिवसीय राष्ट्रीय सिम्पोजियम 26 मार्च से दिल्‍ली में, देशभर से जानी-मानी हस्तियां करेंगीं शिरकत

National Symposium 2025: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एईपी)-2020 तथा विकसित भारत में संस्कृत पुस्तकालयों की भूमिका को लेकर केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, शिक्षा मंत्रालय तथा इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, दिल्ली के साथ मिलकर 3 दिवसीय राष्ट्रीय सिम्पोजियम का आयोजन 26-28 मार्च 2024 तक सामवेत प्रेक्षागार, आईजीएनसीएआई, दिल्ली में करेगा।

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी के दौर में संस्कृत की ज्ञान संपदा पाठक तथा शोधकर्ताओं तक इकट्ठे कम लागत पर तथा शीघ्रता से उपलब्ध करवाने में संस्कृत तथा इनसे जुड़ी पुस्तकों का ऑटोमेशन सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाना समय की मांग है, लेकिन इससे जुड़ी अनेक तकनीकी समस्याएं भी हैं।

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इस सिम्पोजियम में इन पुस्तकालयों की संभावनाओं तथा समाधान को लेकर देशभर के आए विद्वान तथा विदुषी अपने विचार रखेंगे। इससे इन सामग्रियों का भारतीय ज्ञान परम्परा (आईकेएस) की दृष्टि से संरक्षण और संवर्धन भी होगा। साथ ही साथ संस्कृत पुस्तकें तथा पुस्तकालय विज्ञान के क्षेत्र में इसे अपने आप में सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा तथा संबर्धन के लिए आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने का एक ऐतिहासिक तथा नवाचार पहल कहा जा सकता है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 में संस्कृत और बहु भाषा विषयक शोध को बढ़ावा देने के लिए जो बल दिया गया है। इससे यह भी संबलित होगा। साथ ही साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल भारत के सपनों को साकार करने की दिशा में भी इसे सार्थक कदम कहा जाना चाहिए। यही कारण है कि संस्कृत के नोडल निकाय के रूप में चर्चित सीएसयू आईजीएनसीए जैसे लब्धप्रतिष्ठ संस्था के साथ मिल कर यह सिम्पोजियम करने जा रहा है।

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सिम्पोजियम के संयोजक तथा सीएसयू के पुस्तकालयाध्यक्ष डा पीएम गुप्ता ने बताया कि देशभर के जाने माने विद्वान इसमें अपने महत्त्वपूर्ण विचार रखेंगे। उन्होंने यह भी सूचित किया है कि उद्घाटन सत्र में डा सुकान्त मजुमदार राज्य शिक्षा मंत्री, भारत सरकार मुख्य अतिथि होंगे। शंकरानन्द बीआर, राष्ट्रीय संगठन सचिव, भारतीय शिक्षा मण्डल तथा प्रो शान्ति धूलीपुडी पण्डित ने सारस्वत अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता डा सच्चिदान्द जोशी, सदस्य सचिव, आईजीएनसीए करेंगे।

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सत्र के पूरे कार्यक्रमों के मुख्य संरक्षक तथा अध्यक्ष क्रमशः केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी जी और प्रो रमेश सी. गौड़, निदेशक तथा प्रमुख कला नीधि और अधिष्ठाता ( प्रशासन), आईजीएनसीए भी उपस्थित रहेंगे। इसी सिम्पोजियम की तैयारी को लेकर पूर्व बैठक में पुस्तकालय विज्ञान के जाने माने विद्वान प्रो गौड़ ने बताया कि इससे संस्कृत की संवृद्धि तथा इस भाषा का प्रचार प्रसार भी होगा।

सिम्पोजियम का उद्देश्य न केवल छात्रों और शोधकर्ताओं को समुचित पाठ्य संसाधनों को प्रदान करना है, बल्कि संस्कृत अध्ययन को वैश्विक मानकों के अनुरूप भी समुन्नत करना है। इसमें संस्कृत और इंडिक पुस्तकालय, संसाधन की खोज में पुस्तकालय ओटोमेशन, संस्कृत तथा इंडिक डिजिटल रीपोजेट्रीज, भारतीय ज्ञान परम्परा और विकसित भारत, आईएनएफएल आईबीएन ईटी पुस्तकालय सूचना तथा सेवा, शोध एवं प्रकाशन के मापदण्ड, लाईब्रेरी कोपरेशन तथा नेट वर्किंग तथा पुस्तकालयों की पुस्तकों का संरक्षण आदि विषयों के साथ साथ कोहा लाईब्रेरी ओटोमन सौफ्टवेयर, ओजेएस डेमोंस्ट्रेशन एंड प्लेटफार्म इंस्टालेशन, ज्ञान भारत मिशन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आलोक में विकसित भारत के निर्माण में संस्कृत पुस्तकालयों की भूमिका आदि विषयों पर चर्चा की जाएगी।

संयोजक मीडिया प्रकोष्ठ, सीएसयू तथा इस तीन दिवसीय सिम्पोजियम आयोजन समिति के सदस्य प्रो अजय कुमार मिश्रा ने बताया कि इससे ज्ञान परम्परा की दृष्टि से वन संस्कृत बुक्स लाईब्रेरी, वन लाईब्रेरी सिस्टम के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में बल मिलेगा तथा इससे आईटी के दौर में ई-लाइब्रेरी का संसाधन भी समृद्ध होगी।

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