छत्‍तीसगढ़ में कुछ वर्षों में अंगूठा लगाने वाले लोग हो जाएंगे साक्षर

रायपुर। साक्षरता के महत्व को दर्शाता एक सूत्र वाक्य है- 'साक्षर बनके जिनगी ल गढ़।" इस पंच लाइन का राज्य भर में स्वस्फूर्त पालन हो रहा है। लोग न केवल अक्षर-ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि उत्साह से डिजिटल साक्षरता की ओर भी कदम बढ़ा रहे हैं। हालांकि राज्य के 60 फीसद लोग ही अभी साक्षर हैं। यह आंकड़ा कतई संतोषजनक नहीं कहा जा सकता। लेकिन सरकार जिस तरह से शिक्षा को लोगों की ताकत बनाने का प्रयास कर रही है, उससे ऐसे प्रबल आसार हैं कि आने वाले कुछ वर्षों में अंगूठा लगाने वाले लोग साक्षर हो जाएंगे। निरक्षर बड़े-बुजुर्ग भी गर्व से कह सकेंगे कि वे पढ़े-लिखे हैं। कोई अंगूठाछाप नहीं कह सकेगा। बच्चे और युवा तो पढ़-लिखकर अपना जीवन संवारेंगे ही, महिलाओं के जीवन में भी शिक्षा से बदलाव आएगा। वे अपने जीवन स्तर को सुधार सकेंगी।

Local Edit People who put thumb in Chhattisgarh will become literate in a few years

कोरोना काल में जब लोग घरों में थे, तब भी राज्य में साक्षरता की ज्योति लगातार जल रही थी। उस दौरान आनलाइन और आफलाइन दोनों तरह की कक्षाएं चलती रहीं। इसका लाभ न केवल बच्चों को मिला, बल्कि कई निरक्षर लोगों ने भी इस अवसर का लाभ उठाया। नाती-पोतों से पढ़ना-लिखना सीख लिया। ऐसा करके उन्होंने अंगूठाछाप होने के कलंक को धो डाला।

लोग यह जान गए हैं कि शिक्षा को ताकत बनाकर ही हम घर-परिवार, समाज और देश का बोझ उठा सकते हैं। आंकड़े बताते हैं कि राज्य में हाल ही में हुए सर्वे में ढाई लाख निरक्षर मिले हैं। इनमें पुरुषों की संख्या 62,511 और महिलाओं की 1,87,489 है। स्पष्ट है कि अभी भी महिलाओं को साक्षर करने की जरूरत कहीं अधिक है। साक्षर होने के लिए महिलाएं काफी उत्साहित हैं और घर-गृहस्थी के कामकाज से समय निकालकर वे साक्षर होने के लिए सामने भी आ रही हैं। इस साल राज्य में साक्षरता से नाता जोड़ने वालों को गांव के ही शिक्षित व्यक्ति निश्शुल्क पढ़ा रहे हैं।

दरअसल, साक्षरता को लिखने-पढ़ने की क्षमता से कहीं ऊपर देखे जाने की जरूरत है। साक्षर व्यक्ति के पास निर्णय लेने की क्षमता, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और आजीविका के लिए योग्यता होती है। देश में गरीबी, बेरोजगारी, अपराध, भिक्षावृत्ति, वेश्यावृत्ति समेत अन्य ज्वलंत समस्याओं के समाधान के रूप में साक्षरता का महत्व बढ़ जाता है। कोरोना काल में इस वर्ष साक्षरता दिवस स्कूलों को पूरी तरह खोलकर मनाना चाहिए। साथ ही अक्षर ज्ञान के साथ कौशल को महत्व देने वाली नीति का अनुसरण करना होगा।

नई शिक्षा नीति का उद्देश्य देश में शिक्षा और कौशल के लिए सकारात्मक वातावरण बनाने का है, जिसमें विद्यार्थियों, पालकों, शिक्षकों, सरकार, प्रशासन सभी की भागीदारी होगी। साक्षरता में महिलाओं को बराबरी का अधिकार देना है। आज साक्षरता में किया गया संतुलित निवेश भविष्य में परिपक्व और स्वस्थ पीढ़ी के रूप में प्रतिफल देगा।

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