जाट आइकॉन: सीएम योगी ने लिया था संकल्प, 'इतिहास सुधार कर होगा जाट नरेश के साथ न्याय'

जाट आइकॉन: सीएम योगी ने लिया था संकल्प, 'इतिहास सुधार कर होगा जाट नरेश के साथ न्याय'

लखनऊ, 8 सितंबर: भारतीय इतिहास के पन्नों में भुला दिए गए 'जाट आइकॉन' राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने जिस शैक्षिक-सामाजिक परिवर्तन का सपना देखा था, उसके पूरा होने का समय आ गया है। जिस अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना में उन्होंने भू-दान किया, उसने भले ही उन्हें सम्मान न दिया हो, लेकिन अब उसी अलीगढ़ में 'जाटलैंड के नायक' के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना होने जा रही है। बता दें, 14 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इसकी आधारशिला रखेंगे।

Know who was Jat Raja Mahendra Pratap Singh, in whose name a university is being built in Aligarh

मालूम हो कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने अपनी सम्पत्ति दान कर दी थी। उस अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहास में राजा महेंद्र प्रताप सिंह को कोई स्थान नहीं दिया गया। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर भी जो तथ्य दिए गए हैं, उसमें सिर्फ सैय्यद अहमद खान के योगदान का जिक्र किया गया है। मगर विश्वविद्यालय के लिए जमीन का एक बड़ा हिस्सा दान करने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह का कोई उल्लेख नहीं है।

इतिहास की इस भूल के सुधार की जरूरत बताते हुए सीएम योगी ने राजा महेंद्र प्रताप सिंह को उनका गौरव वापस दिलाने का संकल्प लिया था। योगी ने राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर अलीगढ़ जनपद में राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापना की घोषणा की थी। बकौल योगी आदित्यनाथ ने यह कि 'राजा महेंद्र प्रताप ने अपनी पूरी सम्पत्ति दान कर दी मगर उनके साथ न्याय नहीं हुआ। उन्हें भुला दिया गया।'

अफगानिस्तान में बनाई थी अंतरिम भारत सरकार
प्रसिद्ध इतिहासकार इरफ़ान हबीब ने लिखा है कि "राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने ब्रिटिश सरकार का विरोध किया था। वर्ष 1914 के प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान वह अफगानिस्तान गए थे। 1915 में उन्होंने आज़ाद हिन्दुस्तान की पहली निर्वासित सरकार बनवाई थी।" बाद में सुभाष चंद्र बोस ने 28 साल बाद उन्हीं की तरह आजाद हिंद सरकार का गठन सिंगापुर में किया था। एक समय उन्हें नोबल शांति पुरस्कार के लिए भी नामित किया गया था।

एएमयू ने राजा महेंद्र को भुलाया
देश के दो बड़े विश्वविद्यालयों के "नींव की ईंट" की तुलना करें तो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, दोनों की स्थापना में क्षेत्रीय राजाओं ने भूमि दान की थी। मगर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैय्यद अहमद खान ने भूमि दान देने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह को भुला दिया। जबकि पंडित मदन मोहन मालवीय ने काशी नरेश के योगदान को सदैव सिर-माथे पर रखा।

जाट राजा महेंद्र प्रताप का परिचय: एक नजर
महेन्द्र प्रताप का जन्म 01 दिसंबर 1886 को एक जाट परिवार में हुआ था, जो मुरसान रियासत के शासक थे। यह रियासत वर्तमान उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में थी। वे राजा घनश्याम सिंह के तृतीय पुत्र थे, जब वो तीन साल के थे तब हाथरस के राजा हरनारायण सिंह ने उन्हें पुत्र के रूप में गोद ले लिया। साल 1902 में उनका विवाह बलवीर कौर से हुआ था जो जिन्द रियासत के सिद्धू जाट परिवार की थीं। विवाह के समय वे कॉलेज की शिक्षा ले रहे थे। राजा महेंद्र सिंह के बारे में बताया जाता है कि मैसर्स थॉमस कुक एंड संस के मालिक बिना पासपोर्ट के अपनी कम्पनी के पी एंड ओ स्टीमर द्वारा राजा महेन्द्र प्रताप और स्वामी श्रद्धानंद के ज्येष्ठ पुत्र हरिचंद्र को इंग्लैंड ले गए।

उसके बाद जर्मनी के शसक कैसर से उन्होंने भेंट की। वहां से वो अफगानिस्तान गए और फिर बुडापेस्ट, बुल्गारिया, टर्की होकर हेरात पहुंचे। जहां अफगान के बादशाह से मुलाकात की और वहीं से 01 दिसंबर 1915 में काबुल से भारत के लिए अस्थाई सरकार की घोषणा की, जिसके राष्ट्रपति स्वयं तथा प्रधानमंत्री मौलाना बरकतुल्ला खां बने। यहां स्वर्ण-पट्टी पर लिखा सूचनापत्र रूस भेजा गया। साल 1920 से 1946 विदेशों में भ्रमण करते हुए विश्व मैत्री संघ की स्थापना की, फिर 1946 में भारत लौटे। यहां सरदार पटेल की बेटी मणिबेन उनको लेने कलकत्ता हवाई अड्डे गईं। इसके बाद वो संसद-सदस्य भी रहे। 26 अप्रैल 1979 में उनका देहांत हो गया।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+