ग्लोबल पेरेंटिंग डे पर बोले मनीष सिसोदिया- बच्चों की अच्छी परवरिश को अपनाने होंगे नए तरीके

नई दिल्ली, 2 जून: ग्लोबल पेरेंटिंग डे पर दिल्ली सरकार की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि कोरोना काल में बेहतर पेरेंटिंग, अभिभावकों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुकी है। अब पुराने तरीके कारगर नहीं रह गए हैं। आज के दौर में भारत में पेरेंटिंग पर बात करने की जरूरत है और नए तरीके अपनाने की जरूरत है।

Global Parents Day Delhi deputy cm manish sisodia says Old ways of parenting not work need new approach

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों के अभिभावकों को पेरेंटिंग के गुण सिखाने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा मंगलवार को 'ग्लोबल पेरेंटिंग डे' के अवसर पर एक वेबिनार का आयोजन किया। वेबिनार में एक्सपर्ट ने अभिभावकों को बेहतर पेरेंटिंग के गुर सिखाए।

वेबिनार में दिल्ली शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया, बाल मनोविज्ञान विशेषज्ञ डॉ. अमित सेन, डॉ. शैलजा सेन सहित बहुत से अभिभावकों, स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों ने भाग लिया। पेरेंटिंग के महत्व पर बात करते हुए उपमुख्यमंत्री सिसोदिया ने कहा कि आज के दौर में भारत में पेरेंटिंग पर बात करने की बहुत ज़रूरत है।

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में बेहतर पेरेंटिंग, अभिभावकों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुकी है। सिसोदिया ने कहा की बच्चों की दुनिया घर से बाहर निकल अपने सपनों की उड़ान भरने की दुनिया होती है। लेकिन संकट में बच्चों की दुनिया पिछले 1.5 साल से घर में सिमट कर रह गई है।

और इस दौर में अभिभावकों के सामने पेरेंटिंग से संबंधित नई-नई चुनौतियां आ रही है। सिसोदिया ने कहा कि जो देश इस संकट के समय और इसके बाद की पेरेंटिंग कर लेगा वहां का समाज खुशहाल होगा और तरक्की करेगा। उन्होंने कहा कि भारत में पेरेंटिंग आज भी काफी हद तक पुराने ढांचे पर आधारित है जिसे बदलने की ज़रूरत है।

अभिभावकों को दिए मेडिटेशन के मंत्र

बाल मनोविज्ञान एक्सपर्ट शैलजा सेन और अमित सेन ने वेबिनार में अभिभावकों को बेहतर पेरेंटिंग के गुर सिखाए। उन्होंने कहा कि इस महामारी ने हर व्यक्ति को प्रभावित किया है। लेकिन हमारे बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इस दौर में अभिभावकों को अपने दृष्टिकोण के साथ-साथ पेरेंटिंग के अपने तरीकों में भी बदलाव लाने की ज़रूरत है।

एक्सपर्ट ने बताया कि पेरेंट्स को बच्चों के स्तर तक जाकर उनके मनोविज्ञान समझने की ज़रूरत है। उन्होंने अभिभावकों को अपने घरों में माइंडफुलनेस, मेडिटेशन, योग, स्ट्रेस बस्टर जैसे एक्टिविटीज करने की सलाह दी।

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