गंगा एक्सप्रेस वे से पर्यावरण कितना होगा प्रभावित, योगी सरकार करा रही स्टडी
लखनऊ। प्रदेश सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट गंगा एक्सप्रेस-वे पर्यावरण को कितना प्रभावित करेगा। इसका अध्ययन कराकर प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति मांगी जाएगी। यूपीडा ने इस सर्वे के लिए भुवनेश्वर की कंसल्टेंट एजेंसी को नियुक्त किया है। एजेंसी की टीम जल्द सर्वे शुरू करेगी। यूपीडा के निर्देश पर मेरठ में भी इस सर्वे के लिए अफसरों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट अथारिटी (यूपीडा) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अवनीश कुमार अवस्थी ने इस संबंध में उन सभी 12 जनपदों के जिलाधिकारी को सूचना भेजी है जिन जनपदों से गंगा एक्सप्रेस-वे गुजरना है।

उन्होंने बताया कि गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति ली जानी है। इसके लिए पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन कार्य शुरू कराया जाना है। स्टेट एनवायरनमेंट एप्रेजल कमेटी ने 10 मार्च को बैठक कर इसकी अनुमति प्रदान की है। यूपीडा द्वारा इस अध्ययन के लिए मैसर्स सेंटर फार एन्वोटेक एंड मैनेजमेंट कंसल्टेंसी प्रा. लिमिटेड भुवनेश्वर का चयन किया गया है।
जिला प्रशासन ने इस सर्वे के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। अध्ययन कार्य में मदद करने के लिए क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी व तहसीलदार न्यायिक को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अपर जिलाधिकारी प्रशासन मदन सिंह गब्र्याल ने बताया कि यूपीडा से इस संबंध में जानकारी मिली है। पर्यावरणीय अध्ययन को कम से कम समय में पूरा कराया जाएगा। ताकि प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य समय से शुरू कराया जा सके।
504 किसानों से किए जाएंगे बैनामे : मेरठ में गंगा एक्सप्रेस-वे 9 गांवों से गुजरना है। इसके लिए किसानों से सीधे जमीन की खरीद की जा रही है। 35 हेक्टेयर जमीन खरीदी जा चुकी है। मेरठ जनपद में लगभग 180 हेक्टेयर जमीन की खरीद का कार्य जून तक पूरा होना है। इसके लिए कुल 504 किसानों से बैनामे किए जाएंगे।












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