डॉ. साई कौस्तुव बने सबल रोल मॉडल 2022, बदल चुके हैं हजारों दिव्यांगों की जिंदगी
नई दिल्ली: टाटा स्टील फाउंडेशन ने जमशेदपुर में 'सबल अवार्ड्स' समारोह के तीसरे एडिशन का आयोजन किया। इस पुरस्कार के लिए 25 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों से 700 से ज्यादा आवेदन मिले थे, जिसमें डॉ. साई कौस्तुव दासगुप्ता को स्पिरिट ऑफ रेजिलिएंस श्रेणी के तहत सबल रोल मॉडल 2022 के लिए चुना गया है। डॉ. साई को व्हीलचेयर योद्धा के नाम से भी जाना जाता है। सबल पुरस्कार विशेष तौर पर उन दिव्यांग लोगों को दिया जाता है, जो समाज के लिए अच्छा काम कर रहे हैं।

डॉ. साई कौस्तुव बेंगलुरु के रहने वाले हैं और वो 90 प्रतिशत दिव्यांग हैं। उन्होंने अपनी प्रेरक गतिविधियों और विश्व स्तर पर हजारों दिव्यांगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए यह राष्ट्रीय स्तर की पहचान हासिल की। उनके दृढ निश्चय और सलाह से हजारों दिव्यांगों की मदद हुई और वो और ज्यादा सामाजिक रूप से जुड़े, ऐसे में डॉ. साई को सबल रोल मॉडल चुना गया। समानता की दिशा में डॉ. साई के योगदान और दिव्यांगों के लिए समान वर्क कल्चर बनाने के लिए उनको नई पहचान मिली है। उन्होंने अपनी विकलांगता से संघर्ष किया और ये पता लगाया कि अपने जुनून को कैसे आगे बढ़ाया जाए। इसी वजह से वो अन्य दिव्यांगों के लिए बेहतरीन उदाहरण हैं।
वहीं टाटा स्टील फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सौरव रॉय ने कहा कि टाटा स्टील फाउंडेशन एक समान समाज में विश्वास करता है और दिव्यागों को प्रेरित करना हमारा काम है। हम पिछले दो वर्षों से सबल के साथ आगे बढ़ रहे हैं। ये पुरस्कार उन कहानियों को पहचानने और आगे बढ़ाने का काम करता है, जिन्होंने हमें सबसे अधिक प्रेरित किया है।
इस साल डॉ. साई के साथ 56 अन्य व्यक्तियों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया, जिनकी अथक संघर्ष और निडर साहस की यात्रा लोगों के लिए प्रेरणादायक है।












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