छत्तीसगढ़ः CM ने लोगों से की अपील, जैसे श्रीराम ने संयम से पूरा किया वनवास वैसे ही हमें कोरोना को हराना है
रायपुर। छत्तीसगढ़ में 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के कोरोना वैक्सीन का भुगतान राज्य सरकार करेगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हम अपने प्रदेश के लोगों की बेहतरी के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। उन्होंने केंद्र सरकार से पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध कराने की भी बात कही। CM ने ये भी जानकारी दी कि रायपुर में ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति के लिए कलेक्टर को एक करोड़ रुपए की राशि की स्वीकृति दी गयी है।

इससे पहले उन्होंने सुबह सोशल मीडिया पर लोगों से इस कोविड काल में भगवान राम से सीख लेकर कोरोना को हराने की अपील की। उन्होंने कहा है कि जिस तरह श्रीराम ने संयम और सहनशीलता से 14 वर्षों का वनवास पूरा किया, साथ ही संसाधनों और सेना के कम होते हुए भी लंका नरेश रावण पर विजय प्राप्त की। विश्वव्यापी कोरोना महामारी के संकट के इस समय में उसी तरह हमें उनके आदर्शों का पालन करते हुए, उतने ही संयम से लॉकडाउन का पालन करते हुए कोरोना को हराना है।
बजट सत्र में बघेल ने फ्री वैक्सीन की घोषणा की थी
विधानसभा के बजट सत्र में 26 फरवरी को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था, कोरोना के टीकाकरण मामले में केवल 3 करोड़ लोग ही केंद्र सरकार की जिम्मेदारी नहीं हैं। देश के पूरे 135 करोड़ लोगों को कोरोना का फ्री टीका लगवाने की व्यवस्था करनी चाहिए। यदि केन्द्र सरकार ऐसा करने से इंकार करती है, तो अपने राज्य में हम अपने खर्च पर टीकाकरण करवाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पैसे की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ के राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉक्टर अमर सिंह ठाकुर का अनुमान है, प्रदेश की 45% आबादी 18 से 45 वर्ष के इस दायरे में आएगी। यानी करीब 1.30 करोड़ लोग। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस आबादी के करीब 70% लोगों के लिये राज्य सरकार को ही टीका खरीदना होगा। यह आबादी 91 लाख के करीब होती है। अनुमान है कि इसका खर्च 350 से 400 करोड़ रुपए हो सकता है।
पिछले 6 दिनों में 8% मौतों का कारण लापरवाही
कोरोना की भयावहता का इसी से पता चलता है कि प्रदेश में पिछले 6 दिनों में 896 मरीजों की मौत हो चुकी है। इसमें 530 यानी 59% लोगों की मौत केवल कोरोना से हुई है, यानी इन मरीजों को कोई दूसरी बीमारी नहीं थी। इससे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि 68 यानी 8% लोगों ने इलाज से पहले ही दम तोड़ दिया। यानी अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि बुखार, सर्दी, खांसी के लक्षण दिखते ही कोरोना जांच कराएं। तत्काल अस्पताल भी जाएं। इससे 90% से ज्यादा मौतें रुक सकती हैं। कोरोना से लगातार हो रही मौत पर भास्कर ने पड़ताल की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि लोग घर में गंभीर हो रहे हैं, इसके बाद अस्पताल पहुंच रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी, मौत की एक बड़ी वजह हो सकती है, लेकिन ऐसी मौतों का क्या, जिसमें लोगों को घर से ही मृतावस्था में लाया जा रहा है। ये तो गंभीर लापरवाही है। लक्षण दिखने के बाद अगर जांच करवा लें और अस्पताल में जाएं तो ऐसी मौतों को रोका जा सकता है।
जितने मरीज मिले उससे ज्यादा ठीक हुए
पिछले 24 घंटों में कोरोना के जो आंकड़े सामने आए हैं वे डराते जरूर हैं, लेकिन उनमें भी एक उम्मीद है। पिछले 24 घंटे में राज्य में 15,625 नए मरीज मिले जबकि इसी दौरान अस्पताल और होम आइसोलेशन से ठीक होने वालों की संख्या 15,830 है। 181 लोगों की मौत हुई। पिछले हफ्ते हुईं 10 मौतों की जानकारी मंगलवार को सरकार ने दी। कुल 191 मौत की जिक्र सरकारी रिपोर्ट में है। अब प्रदेश में एक्टिव मरीजों की संख्या 1 लाख 25 हजार 688 हो चुकी है।
प्रदेश में मरीजों की औसत वृद्धि दर अब 3% से घटकर 2.1% पर आ गई है। राजधानी रायपुर में सबसे ज्यादा केस मिलने के बावजूद रिकवरी रेट यानी मरीजों के ठीक होने की दर प्रदेश के औसत से ज्यादा है। प्रदेश में अभी 77.02 के करीब रिकवरी रेट है। जबकि राजधानी में ये 81.86% है। रायपुर में पिछले एक हफ्ते में 25 हजार से ज्यादा मरीज केवल होम आइसोलेशन यानी घर में इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं।
सरकारी दावा- टीकाकरण में छत्तीसगढ़ चौथे नंबर पर
45 साल से अधिक उम्र के लोगों को कोविड 19 वैक्सीन की पहली डोज देने में छत्तीसगढ़ राज्य पूरे देश में चौथे नंबर पर है। पूरे देश में सिर्फ लद्दाख, सिक्किम और त्रिपुरा ही छत्तीसगढ़ से आगे हैं। 60 साल से ऊपर के लोगों के टीकाकरण के मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश में लद्दाख, राजस्थान, सिक्किम और त्रिपुरा के बाद पांचवें स्थान पर है। राज्य के कोविड-19 वैक्सीनेशन की स्टेट नोडल ऑफिसर डॉक्टर प्रियंका शुक्ला ने यह जानकारी केंद्र सरकार की तरफ से जारी की है।












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