जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का कल आठवां दिन, जानिए क्या होने वाला है खास

जयपुर, 11 मार्च: राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर में इन दिनों साहित्य का उत्सव चल रहा है। मशहूर जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का ये 15वां संस्करण है। 5 मार्च से इस फेस्टिवल की शुरुआत हुई है और अब तक यानी शुरु के एक हफ्ते का इसका सफर कमाल का रहा है। शनिवार, 12 मार्च को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आठवां दिन है। आठवें दिन इस कार्यक्रम में वक्ताओं की एक दिलचस्प लाइन है, जिसमें गुलाम भारत में ब्रिटिश सत्ता को झटका देने वाले रॉयल इंडियन नेवी के विद्रोह पर बातचीत होगी तो साथ ही वैश्वीकरण पर भी सत्र होगा।

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रोली बुक्स के संस्थापक और प्रकाशक प्रमोद कपूर, जिन्होंने लगभग चार दशकों के अपने करियर में भारत और इसकी विरासत से संबंधित कुछ सबसे साहसिक काम किया है, इतिहासकार श्रीकांत केसनूर के साथ बातचीत करेंगे। वहीं अपकमिंग फ्लिक लॉर्ड्स ऑफ द डेक्कन: सदर्न इंडिया फ्रॉम द चालुक्यस टू द चोलस के लेखक अनिरुद्ध कनिसेट्टी मनु एस पिल्लई के साथ बातचीत में शामिल होंगे। रेबेल सुल्तान्स: द डेक्कन फ्रॉम खिलजी टू शिवाजी के लेखक भी आठवें दिन फेस्टिवल में होंगे।

Kanisetti's Lords of the Deccan: चालुक्यों से लेकर चोलों तक का दक्षिण भारत का मध्यकालीन इतिहास विचारशील और व्यापक अध्ययन और समकालीन राजनीति और संस्कृति पर इसके प्रभाव का एक प्रमाण है। वह मध्यकालीन राजनीतिक शक्ति, वैश्वीकरण और मध्यकालीन दक्षिण के जीवंत सांस्कृतिक संरक्षण की खोज करता है। मनु एस पिल्लई ने मध्यकालीन दक्कन के आकर्षक इतिहास में व्यापक योगदान दिया है। मनु शनिवार का एक आकर्षण होंगे। वहीं लेखक और बायोकेमिस्ट प्रणय लाल अपनी पुस्तक इनविजिबल एम्पायर में वायरस को लेकर सर्जन और लेखक अंबरीश सात्विक के साथ बातचीत करेंगे।

भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है, ऐसे में यहां बहुभाषी होना और ट्रांसलेशन का भी काफी महत्व है। शनिवार को चार लेखक अपनी साहित्यिक गतिविधियों में एक से अधिक भाषाओं में दक्षता के साथ खुद को अभिव्यक्त करने और अपनी मातृभाषाओं और सीखी हुई भाषाओं के बीच की दूरी को कैसे पार करते हैं, इस पर बात करेंगे। कुणाल बसु को अंग्रेजी और बांग्ला पर बात करेंगे। अनुकृति उपाध्याय का काम, राजस्थान और जापान जैसी विविध संस्कृतियों पर है। तनुज सोलंकी अपनी मातृभाषा हिंदी और अभिव्यक्ति की चुनी हुई भाषा अंग्रेजी में काम करते हैं। ये लोग शनिवार को फेस्टिवल में होंगे और भाषाओं को लेकर काफी अच्छी चर्चा की उम्मीद है।

इतिहासकार और लेखक मनु एस पिल्लई ने अपनी नई पुस्तक, फाल्स एलीज़: इंडियाज़ महाराजाज़ इन द एज ऑफ़ रवि वर्मा पर बात करेंगे। प्रतिष्ठित चित्रकार रवि वर्मा की यात्रा के माध्यम से पिल्लई ने कानूनी लड़ाई, प्रतिरोध, औद्योगीकरण, सामाजिक और राजनीतिक लामबंदी की रियासत की दुनिया को उजागर किया है।

शशि थरूर ने एन एरा ऑफ डार्कनेस: द ब्रिटिश एम्पायर इन इंडिया और इनग्लोरियस एम्पायर: व्हाट द ब्रिटिश डिड टू इंडिया में विघटनकारी इतिहास को लिखा है। उनकी हालिया पुस्तक, द बैटल ऑफ बिलॉन्गिंग: ऑन नेशनलिज्म, पैट्रियटिज्म, एंड व्हाट इट मीन्स टू बी इंडियन, भारत के समकालीन इतिहास की एक विद्वतापूर्ण समीक्षा है। लेखक और इतिहासकार इरा मुखोटी कल पिल्लई और थरूर से बातचीत के लिए साथ होंगे।

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सातेंव दिन के आकर्षण

प्रतिष्ठित जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के सातवें दिन यानी शुक्रवार के खास कार्यक्रमों की भी बात कर लेते हैं। शुक्रवार को अलग-अलग सत्रों में कई विषयों पर शानदार प्रोग्राम हुए। साहित्य श्रृंखला के लिए जेसीबी पुरस्कार के एक सत्र में लिंडसे पेरिरार, पत्रका रिजुला दास, लेखिका शब्बीर अहमद मीर, लेखक दरिभा लिंडम, करुणा एजारा पारिख पर बातचीत की। सत्र के दौरान पैनल ने अपने पहले उपन्यासों के साथ उनके रोमांचक अनुभवों पर चर्चा की।

योग प्रशिक्षक सुमित थलवाल ने प्राणायाम और ध्यान पर बात की। साहित्यिक समारोह में "सुबह का संगीत" प्रशंसित शास्त्रीय गायिका आस्था गोस्वामी ने प्रस्तुत किया। उन्होंने तबला और हारमोनियम के मिश्रण के साथ अपने संगीत के सेट की शुरुआत की, जिसने दर्शकों को समृद्ध उत्सव के फ्रंट लॉन में शामिल किया।

शुक्रवार को राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता मनोज वाजपेयी ने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता पुस्तक आरडी बर्मन: द मैन, द म्यूजिक पर बालाजी विट्टल और प्रज्ञा तिवारी के साथ एक बातचीत की, जो काफी दिलचस्प और जानकारी को बढ़ाने वाली रही।

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