Pakistan Cricket: पाकिस्तान क्रिकेट में घोटाले और पक्षपात का जिन्न बोतल से बाहर
Pakistan Cricket: इधर पाकिस्तान क्रिकेट टीम भारत में हो रहे वर्ल्ड कप के मैदान में पिछड़ रही है, उधर पाकिस्तान में क्रिकेट टीम के घोटाले और धन की बंदरबाट पर हंगामा मचा हुआ है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड चाहता है कि इस मामले में जो भी निर्णय हो वह वर्ल्ड कप के बाद हो, लेकिन रोज हो रहे खुलासे के कारण पाकिस्तान क्रिकेट टीम और प्रबंधन दोनों की किरकिरी हो रही है। डॉन न्यूज के मशहूर एंकर हामिद मीर ने अपने प्रोग्राम कैपिटल टॉक शो में 31 अक्टूबर को कई ऐसे दस्तावेज स्क्रीन पर दिखाए, जिनसे पता चलता है कि पाकिस्तान क्रिकेट किस तरह से हितों के टकराव में उलझी हुई है।
ताजा विवाद याजू इंटरनेशनल लिमिटेड को लेकर है जिसके शेयरधारकों में पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इंजमाम उल हक और वर्तमान विकेट कीपर बल्लेबाज रिजवान हैं। याजू इंटरनेशनल लंदन में बनाई गई कंपनी है, जिसका मुख्य काम क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए अवसर तलाशने और उनके लिए कांट्रेक्ट करवाने का है। अब यह कहा जा रहा है कि इंजमाम ने उन खिलाड़ियों को वर्ल्ड कप की टीम में ज्यादा चांस दिया, जिनका याजू इंटरनेशनल के साथ कांट्रेक्ट साइन है।

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड इस मामले में अंजान बनने का दावा कर रहा है। बोर्ड के नए चेयरमैन जका अशरफ ने तमाम खबरें आने के बाद एक पांच सस्दयीय जांच टीम बैठा दी है, जो हितों के टकराव पर अपनी रिपोर्ट देगी। तब तक के लिए इंजमाम उल हक ने मुख्य चयनकर्ता के पद से इस्तीफा दे दिया है।
मामला सिर्फ हितों के टकराव का नहीं है। बोर्ड ओर खिलाड़ियों के बीच सेंट्रल कांट्रैक्ट का भी विवाद है। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार सेंट्रल कांट्रैक्ट को लेकर भी बोर्ड और सीनियर खिलाड़ियों के बीच काफी मतभेद हैं। कप्तान बाबर आजम इस विवाद के केंद्र में हैं। उन्होंने ही सेंट्रल कांट्रैक्ट की राशि बढ़ाने और आईसीसी मैचों से प्राप्त आय में हिस्सेदारी का मुद्दा उठाया है।
बाबर आजम और अन्य वरिष्ठ खिलाड़ी मांग कर रहे हैं कि आईसीसी टूर्नामेंट से प्राप्त आय का कम से कम 3 प्रतिशत हिस्सा खिलाड़ियों में भी बांटा जाए। भारत के दौरे पर आने से पहले यह मामला जोर शोर से उठा था, लेकिन इंजमाम उल हक की मध्यस्थता में मौखिक रूप से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और खिलाड़ियों के बीच एक सहमति बन गई, लेकिन सेंट्रल कांट्रैक्ट पर हस्ताक्षर नहीं हो सका। इसलिए खिलाड़ियों को पिछले चार महीने से कोई पेमेंट भी नहीं मिली है। इस मामले में पाकिस्तान के पूर्व विकेट कीपर राशिद लतीफ ने एक टीवी चैनल पर यह दावा कर सबको चौंका दिया कि बाबर के कॉल या मैसेज का जवाब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन जका अशरफ नहीं दे रहे हैं।
पाकिस्तान क्रिकेट टीम में सेलेक्शन को लेकर भी नया विवाद छिड़ गया है। कहा जा रहा है कि जो खिलाड़ी याजू इंटरनेशनल या साया इंटरनेशनल के साथ बंधे हुए हैं उनका चयन आसानी से हो जा रहा है और जो इनके साथ नहीं जुड़े हैं उनके अच्छे प्रदर्शन को भी नजरंदाज कर दिया जाता है। इस मामले में उदाहरण इंजमाम उल हक के भतीजे और ओपनर इमाम उल हक का दिया जा रहा है। वर्ल्ड कप में बिना दमदार प्रदर्शन के भी उनको लगातार अवसर दिया जा रहा है, जबकि पीएसएल में बैट और बॉल दोनों से शानदार प्रदर्शन करने वाले इमाद वसीम का चयन नहीं किया गया। इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने 170 के स्ट्राइक रेट से 404 रन बनाए थे। इसी तरह के कई और नाम हैं। उपकप्तान शादाब खान ना बल्लेबाजी कर पा रहे हैं और ना ही गेंदबाजी फिर भी उन्हें लगातार चांस दिया जा रहा है। इस तरह के तमाम उदाहरण आज कल पाकिस्तानी मीडिया में आ रहे हैं।
अब जबकि पाकिस्तान के वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में आने के चांस बहुत कम रह गए हैं, तो अभी से ही जिम्मेदारियों से भागने की शुरूआत हो गई है। मुख्य चयनकर्ता के रूप में इंजमाम उल हक पहले ही अपना पद छोड़ चुके हैं। अब क्रिकेट बोर्ड के चेयरमैन जका अशरफ भी यह कह कर पल्ला झाड़ रहे हैं कि वर्ल्ड कप में जो टीम भारत गई है, उसके चयन में उनकी कोई भूमिका नहीं है। यह टीम नजम सेठी के चेयरमैन रहते ही तय हो गई थी, तब हारून रशीद मुख्य चयनकर्ता थे और मिस्बाह, हाफिज जैसे खिलाड़ी अन्य चयनकर्ता थे।
हारून रशीद की नियुक्ति जनवरी 2023 में हुई जरूर थी, लेकिन जका अशरफ के आने के बाद जुलाई में उन्हें हटा दिया गया था। 7 जुलाई 2023 को इंजमाम उल हक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के नये चीफ सेलेक्टर बन गए थे। अब हारून रशीद ने यह बयान दिया है कि यदि जका अशरफ ने उन्हें आरोपित करने वाले बयान वापस नहीं लिए तो वह उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि जब टीम पिछले सेलेक्टर के हिसाब से ही भेजी जानी थी तो 25 लाख रुपये महीने की सैलरी के साथ इंजमाम उल हक को नया चीफ सेलेक्टर क्यों बनाया गया।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चैयरमैन का पद हमेशा से विवादों में रहा है। यह पूरी तरह से राजनीतिक पंसद और ना पसंद का पद बन गया है। जब पाकिस्तान में पीडीएम की सरकार बनी तो मौजूदा चेयरमैन जका अशरफ भी इसी रूट से आए। वह पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सबसे बड़े नेता और पूर्व राष्ट्रपति जरदारी के करीबी हैं। उन्हें इसके पहले भी 2010-11 में पीसीबी का चेयरमैन बनाया गया था। उनके बारे में पूर्व पाकिस्तानी आल राउंडर अब्दुर रज्जाक कहते हैं कि पीसीबी का चैयरमैन वह केवल प्रोटोकॉल के लिए बने हैं। क्रिकेट बोर्ड को चलाने का उनका तर्जुबा बिल्कुल नहीं है। केवल सलाहकारों के कहे अनुसार चलते हैं। किसी भी बोर्ड मीटिंग में वह एक मिनट से ज्यादा बोल नहीं पाते।
पाकिस्तान में इस बात की भी चर्चा हो रही है कि जिन खिलाड़ियों पर पहले भी आरोप लगते रहे हैं, उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कैसे दी जा रही है। इस संबंध में जस्टिस कयूम की रिपोर्ट बहुत महत्वपूर्ण है। इस रिपोर्ट में यह कहा गया है कि क्रिकेट मे बेतहाशा पैसा आने के कारण इस खेल को बिजनेस बना दिया गया है और पाकिस्तान में मैच फिक्सिंग के कारनामे 1979-80 में आसिफ इकबाल के दौर में ही आने लगे थे। इस रिपोर्ट में इंजामाम उल हक, सलीम मलिक, वकार युनूस जैसे खिलाड़ियों के बारे में कहा गया है कि इन्होंने मैच फिक्सिंग के लिए पैसे लिए। पाकिस्तान का यह क्रिकेट विवाद कभी ना थमने वाली कथा बन चुका है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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