Uttar Pradesh BJP: 'इंडिया' बनाने में जुटे अखिलेश के घर में भाजपा ने लगाई सेंध
Uttar Pradesh BJP: उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन की सियासी रणनीति पर भाजपा की सेंधमारी भारी पड़ रही है। एक तरफ विपक्षी दल एकजुट होकर नरेंद्र मोदी को हराने के अभियान में जुटे हुए हैं तो दूसरी तरफ उनके अपने नेता पराये हो रहे हैं। भाजपा ने सपा, कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के कई नेताओं को अपने पाले में लाकर कांग्रेसनीत गठबंधन को बड़ा झटका दिया है। इस पालाबदल का असर चुनाव के नतीजों पर भी पड़ेगा। सपा के कई ऐसे नेताओं ने भाजपा का दामन थामा है, जिनकी जमीनी पकड़ मजबूत है।
विपक्षी दल मजबूत गठबंधन बनाकर भाजपा को चुनौती देना चाहते हैं, लेकिन अपने घर को ही नहीं बचा पा रहे हैं। विपक्षी दलों में हो रही इस भगदड़ का लाभ भाजपा को चुनावी माहौल बनाने में मिलेगा। सोमवार को लखनऊ में सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद के कई दिग्गज नेताओं ने भाजपा की सदस्यता ले ली। सबसे ज्यादा झटका समाजवादी पार्टी को लगा है। उसके ग्यारह कद्दावर नेताओं ने भाजपा ज्वाइन कर ली है। बसपा के पांच तथा रालोद और कांग्रेस के एक-एक नेता ने भाजपा की सदस्यता ली।

दरअसल, भाजपा का पूरा फोकस पिछड़े वर्ग पर है। वह पिछड़े वोटरों को अपने खेमे में करने के लिए हर संभव कोशिश में जुटी हुई है और दूसरे दलों के पिछड़े वर्ग के नेताओं को पार्टी से जोड़ने का अभियान चला रही है। भाजपा शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, भूमिहार एवं कायस्थ वोटर उनको छोड़कर कहीं नहीं जा रहा है, क्योंकि उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। पिछड़ों के पास सपा, रालोद जैसे विकल्प हैं, लिहाजा इन वर्गों को जोड़ने से उसे दोहरा लाभ मिलेगा।
भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं में सबसे चौंकाने वाला नाम वाराणसी सीट से 2019 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ चुकी शालिनी यादव का है। शालिनी को अखिलेश यादव का नजदीकी माना जाता था, इसलिये उनका पार्टी छोड़ना सपा के लिए बड़ा झटका है। शालिनी चंदौली जिले के कद्दावर कांग्रेसी नेता राज्यसभा के उपसभापति तथा केंद्रीय मंत्री रहे दिवंगत श्याम लाल यादव की पुत्रवधु हैं। उन्होंने 2017 में कांग्रेस से बनारस के मेयर का चुनाव लड़ा था। कांग्रेस लंबे अर्से बाद दूसरे नंबर पर रही थी।
शालिनी यादव की जमीनी पकड़ और लोकप्रियता को देखते हुए ही अखिलेश यादव ने उन्हें समाजवादी पार्टी में शामिल करके बनारस में नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव में उतारा था। शालिनी दूसरे नंबर पर रहीं, जबकि कांग्रेस के दिग्गज नेता एवं कोलअसला से तीन बार विधायक रह चुके अजय राय की जमानत तक जब्त हो गई थी। शालिनी के भाजपा में आने से बनारस के साथ पड़ोसी जिले चंदौली में भी पार्टी को मजबूती मिलेगी। शालिनी का परिवार मूलरूप से चंदौली जिले का ही रहने वाला है।
शालिनी के अलावा समाजवादी पार्टी छोड़ने वालों में पूर्व मंत्री सहारनपुर के साहब सिंह सैनी, पूर्व मंत्री जौनपुर के जगदीश सोनकर, हरदोई के पूर्व सांसद अंशुल वर्मा, जौनपुर की पूर्व विधायक सुषमा पटेल, जौनपुर से ही पूर्व विधायक गुलाब सरोज, हमीरपुर के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा, हापुड़ के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सत्यपाल यादव, हापुड़ से ही पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी सत्यपाल की पत्नी सुनीता यादव, हापुड़ के सिंभावली से ब्लॉक प्रमुख शालिनी यादव तथा बनारस के पूर्व जिलाध्यक्ष पीयूष यादव शामिल हैं।
साहब सिंह सैनी की सहारनपुर और मुरादाबाद में सैनी वोटों पर अच्छी पकड़ है। खतौली विधानसभा उपचुनाव में हार के बाद से ही भाजपा की नजर दूसरे दलों के सैनी नेताओं पर थी। धर्म सिंह सैनी ने जब भाजपा छोड़ी थी, तब भाजपा ने इसकी भरपायी के लिए कांग्रेस नेता एवं विधायक नरेश सैनी को अपने खेमे में लाकर बेहट सीट से लड़ाया था, लेकिन नरेश जीत नहीं पाये। सपा की सरकार नहीं बनने के बाद धर्म सिंह फिर से भाजपा में लौटने का प्रयास कर रहे थे।
खतौली उपचुनाव में भाजपा की करारी हार के बाद उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य एवं प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने धर्म सिंह सैनी की वापसी का रोड मैप भी बना दिया था, लेकिन कार्यकर्ताओं के विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धर्म सिंह सैनी की ज्वाइनिंग को टाल दिया था। अब साहब सिंह सैनी के साथ भाजपा ने रालोद के दिग्गज नेता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद राजपाल सैनी को अपने खेमे में लाकर पश्चिम में सैनी वोटों के बिखराव को रोक दिया है। राजपाल सैनी की मुजफ्फरनगर में सैनी वोटों पर मजबूत पकड़ मानी जाती है।
पूर्व मंत्री जगदीश सोनकर के भाजपा में शामिल होने पर जौनपुर में भी सपा को बड़ा झटका लगा है। मछलीशहर एवं शाहगंज सीट से चार बार विधायक रहे जगदीश सोनकर जमीन से जुड़े जुझारू नेता माने जाते हैं। रागिनी सोनकर के आने के बाद जगदीश के विकल्प सपा में सीमित हो गये थे। जगदीश के साथ ही मुंगराबादशाहपुर की पूर्व विधायक सुषमा पटेल एवं केराकत के पूर्व विधायक गुलाब सरोज ने भी भाजपा ज्वाइन कर लिया है। इन तीनों पूर्व विधायकों के आने से भाजपा की रेड जोन वाली जौनपुर सीट ग्रीन जोन में बदल सकती है।
बसपा छोड़ने वाले नेताओं में आगरा में जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन गंगाधर कुशवाहा, आगरा से बसपा के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी रहे रवि भारद्वाज, हमीरपुर के तिंदवारी विधानसभा सीट से प्रत्याशी रहे दिलीप सिंह, सीतापुर के सिधौली विधानसभा सीट से प्रत्याशी रहे पुष्पेंद्र पासी तथा मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से प्रत्याशी रहे शिवान सैनी शामिल हैं। बसपा नेताओं के अलावा कांग्रेस के पूर्व मीडिया चेयरमैन राजीव बक्शी ने भी भाजपा का दामन थाम लिया है।
दरअसल, 2024 के सियासी समर में उतरने से पहले भाजपा विरोधी खेमे में हलचल पैदा करने की कोशिश कर रही है। दूसरे दलों के कद्दावर पिछड़े नेताओं के भाजपा में शामिल होने पर उसके पक्ष में माहौल तो बनेगा। साथ ही, पिछड़ों का विश्वास जमने के बाद भाजपा को यूपी तथा केंद्र की सत्ता से हटा पाना किसी भी राजनीतिक दल के लिए आसान नहीं होगा। हालांकि एक तथ्य यह भी है कि सवर्ण वोटरों को यह लगने लगा है कि भाजपा उनके वोट को अपनी जेब में मानकर चल रही है और पार्टी नेताओं को उनकी कोई परवाह नहीं है। इस कारण सवर्ण जातियों का भाजपा से मोहभंग होने लगा है, लेकिन इसका पार्टी को कितना नुकसान होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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