इंडिया गेट से: तुष्टिकरण बनाम तृप्तिकरण
राजनीतिक दृष्टि से प्रशांत किशोर ज्यादा महत्व के व्यक्ति नहीं है। वह चुनाव मैनेजमेंट करने वाले ठेकेदार हैं, लेकिन मीडिया ने उन्हें राजनीति का चाणक्य बना रखा है। इसके बावजूद मई के पहले हफ्ते में एक्सप्रेस अड्डा पर कही गई उनकी इस बात से सहमत हुआ जा सकता है कि अगले 30 साल तक भारत की राजनीति भाजपा के इर्दगिर्द ही घूमेगी। बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 21 मई को जयपुर में हुई भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा के लिए अगले 25 सालों का लक्ष्य तय करने और उसे हासिल करने के लिए लगातार काम करने का समय है। यही बात अमित शाह ने भाजपा की हैदराबाद में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में एक बार फिर दोहराई है।

एक राजनीतिक विश्लेषक के नाते मेरा भी मानना है कि भाजपा इसलिए लंबे समय तक सत्ता में रहेगी, क्योंकि देश में हिंदुत्व का उभार हुआ है। इस उभार के दो कारण हैं। पहला कारण अयोध्या से ट्रेन से लौट रहे कारसेवकों की गोधरा में बोगी जलाना था जिससे गुजरात में हिंदुत्व का उदय हुआ। इसके बाद जिस तरह से सेक्युलर दलों ने मोदी को निशाना बनाया उससे नरेन्द्र मोदी पूरे देश में हिंदुओं के चहेते नेता बन गये। दूसरा कारण भी कांग्रेस और सेक्युलरिज्म के नाम पर हिंदू विरोधी राजनीति करने वाले अन्य दल हैं जिन्होंने साठ साल तक मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति की। देश के संसाधनों पर पहला हक अल्पसंख्यक वर्ग का बताया और उसी के अनुसार काम भी किया। लेकिन इससे भी हिंदुओं को अधिक फर्क नहीं पड़ता था।
हिंदुओं को फर्क तब दिखने लगा, जब यूपीए शासन काल में आतंकवाद का ठीकरा उनके सिर फोड़ना शुरू हो गया। हिंदू साधु संत ही नहीं, भारतीय सेना को बदनाम करने के लिए एक हिंदू सैन्य अधिकारी पर आतंकवाद का आरोप लगा कर जेल में डाल दिया गया और टॉर्चर किया गया। समझौता एक्सप्रेस में विस्फोट का ठीकरा भी हिंदुओं के सिर फोड़ा गया। यह कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की पराकाष्ठा थी। हिंदुओं को पहली बार लगने लगा कि भारत भी पाकिस्तान बनता जा रहा है। देश में प्रखर हिंदुत्व के उभार का यह दूसरा कारण बना जिसका नेतृत्व नरेन्द्र मोदी कर रहे थे।
हिंदुत्व के मुद्दे पर सत्ता हासिल करना एक बात है, लेकिन उसे बनाए रखना दूसरी बात है। मोदी और अमित शाह के अगले तीस साल तक सत्ता बनाए रखने के आत्मविश्वास के पीछे भी वजहें हैं। पहला, हिंदुओं का संतुष्टिकरण ताकि सरकार पर उनका विश्वास बना रहे और दूसरा, समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के प्रयास करना जो कि हर सरकार का धर्म होना चाहिए। इसे ही नरेंद्र मोदी ने तृप्तिकरण का नाम दिया है। समाज के हर वर्ग के लिए बिना भेदभाव विकास के मार्ग खुले। केन्द्र में मोदी सरकार इन्हीं दो बातों को ध्यान में रखकर आगे बढ रही है।
2013 में कौन ऐसा सोचता था कि मई 2014 में भाजपा की ऐसी प्रचंड जीत से सरकार आयेगी जिसके बाद भाजपा का स्वर्ण युग शुरू होगा। जैसे ही भाजपा ने नरेंद्र मोदी का नाम पेश किया देश में हिंदुत्व का नवसंचार हो गया। इसकी दो वजहें थीं। पहली यह कि कोई अनुभव न होते हुए भी उन्होंने गुजरात को एक मॉडल स्टेट बनाने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की थी। दूसरी यह कि उन्होंने खुद की छवि एक मजबूत हिन्दू नेता की बनाई। इससे पहले मुख्यमंत्री के नाते यह छवि उतर प्रदेश में कल्याण सिंह ने बनाई थी, लेकिन बाबरी ढांचा टूटने के बाद उन्होंने इस्तीफा देकर सेक्युलर राजनीति के सामने घुटने टेक दिए थे। जबकि मोदी ने गुजरात में मुस्लिम विरोधी दंगे करवाने के आरोपों का एक दशक तक सामना करके खुद की छवि एक मजबूत हिन्दू नेता की बनाई। देश का जागरुक हिन्दू लंबे समय से ऐसे नेता की तलाश कर रहा था जो सेक्युलर गैंग के सामने घुटने न टेके और उनके हितों की रक्षा करे। इसलिए देश की जनता ने नरेन्द्र मोदी को 2014 के चुनावों से पहले ही चुन लिया था।
मोदी जिस तरह गुजरात की जनता के हितों की रक्षा करने में खरे साबित हुए थे उसी तरह देश और देश की जनता के हितों की रक्षा करने में खरे साबित हुए। जैसे उन्होंने गुजरात में विकास का मॉडल पेश किया, उसी तरह देश में भी विकास का मॉडल पेश किया। दस साल के शासन के बाद यूपीए सरकार के पास गिनाने को सिर्फ एक मनरेगा था, जबकि पिछले आठ साल में नरेंद्र मोदी की आठ उल्लेखनीय उपलब्धियां हैं जिनका दायरा असीमित है। इनमें से कुछ आत्मविश्वास पैदा करने वाली उपलब्धियां हैं तो कुछ समाज के जरूरतमंदों की तृप्तिकरण की योजनाएं हैं। जनधन योजना, प्रधानमंत्री बीमा पेंशन योजना, सबके लिए आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, किसान सम्मान निधि, स्वच्छ भारत अभियान और मुद्रा योजना। ये ऐसी आठ योजनाएं हैं जो भारत के अति सामान्य लोगों को ध्यान में रखकर चलायी गयी हैं।
लेकिन साथ साथ आठ ऐसी योजनाएं भी मोदी सरकार में साकार हुई हैं जिन्होंने बहुसंख्यक हिन्दुओं में आत्मविश्वास पैदा किया है। इनमें, अयोध्या में भगवान राम की जन्मस्थली पर भव्य मन्दिर का निर्माण शुरू होना, भगवा आतंकवाद के झूठे आरोपों से घिरे असीमानंद साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित की रिहाई, कैलाश मानसरोवर यात्रा का दूसरा रूट खुलवाना, कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए आवटित राशि दोगुनी की, वैष्णो देवी तक रेलमार्ग पहुंचाना, जम्मू कश्मीर में 370 और 35 ए समाप्त कर के जम्मू कश्मीर को भारत की मुख्यधारा से जोड़ना, तथा सीएए को लागू करके पड़ोसी देश के पीड़ित अल्पसंख्यकों के लिए भारत की नागरिकता के दरवाजे खोलना शामिल हैं।
इसके साथ ही मोदी सरकार ने राष्ट्र के विकास के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण में रिकार्ड तोड़ उपलब्धि हासिल की है। इसमें प्रमुख है हजारों गाँवों में बिजली पहुंचाना, चार धाम यात्रा के लिए हर मौसम में वर्ष भर उपयोगी रोड का निर्माण और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए चीन बार्डर के करीब सड़कों और पुलों का बेशुमार जाल बिछा देना। पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक करके और गलवान घाटी में चीन को मुहंतोड़ जवाब देकर नागरिकों और सेना के हौंसले बुलंद करना और दुनिया को नए शक्तिशाली भारत का एहसास करवाना। कोरोना का सफलतापूर्वक मुकाबला करना और पूरी दुनिया को भारत की क्षमता का कायल बनाना। अनेक विसंगतियों और विरोधों के बावजूद देश में जीएसटी के रूप में एक टैक्स प्रणाली शुरू करना। अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाकर रखने के साथ साथ मोदी सरकार ने विश्व राजनय में भी भारत की छवि एक मजबूत राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत की है। यूक्रेन-रूस युद्ध के समय भारत न रूस के दबाव में आया, न अमेरिका के। भारत ने आत्मविश्वासी विदेश नीति से दुनिया को एहसास करवाया कि भारत अब कमजोर देश नहीं |
स्पष्ट है कि मोदी ने बीते आठ साल में पहले से चली आ रही तुष्टीकरण की नीति की बजाय समाज के हर वर्ग के तृप्तीकरण की नीति को अपनाया है। जिस वर्ग की जैसी जरूरत है, उसकी जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया है। इसलिए कोई आश्चर्य नहीं कि नरेन्द्र मोदी ने जो रास्ता बनाया है उस पर चलते हुए भाजपा को लंबे समय तक केन्द्र में शासन करने का मौका मिलता रहे।
(इस लेख में व्यक्त विचार, लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की तथ्यात्मकता, सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं।)












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