Mahua Moitra: कैश फॉर क्वेशचन या मामला कुछ और?
Mahua Moitra: 1990 के दशक में ब्रिटेन में कैश फॉर क्वेशचन का मामला पहली बार उछला था| गार्जियन अखबार ने खबर छापी थी कि सांसदों के माध्यम से लॉबिंग करने वाली फर्म इयान ग्रीर के मालिक ने कंजर्वेटिव पार्टी के दो सांसदों को सवाल पूछने के बदले मोटी रकम दी थी| रिश्वत देने वाले मोहम्मद अल फयाद ने खुद आरोप लगाया था कि उन्होंने दो मंत्रियों को सवाल पूछने के बदले रिश्वत दी थी। उन्होंने जिन दो मंत्रियों का नाम लिया था, उन दोनों को इस्तीफा देना पड़ा था|
यह 1994 का मामला था, इसी खबर से प्रेरित होकर भारत के एक वेब पोर्टल कोबरा पोस्ट ने 2005 में अपने दो पत्रकारों को भारत में भी सांसदों के स्टिंग आपरेशन में लगा दिया| असल में इस स्टिंग आपरेशन में सांसदों को अपने जाल में फंसाने के लिए कोबरा पोस्ट के पत्रकार किसी कंपनी के प्रतिनिधि बन कर सांसदों से मिल रहे थे, और उन्हें संसद में पूछने के लिए सवाल दे रहे थे| पत्रकार सांसदों को अपनी तरफ से गिफ्ट के तौर पर लिफाफा भी दे रहे थे, जिनमें से कुछ सांसदों ने लिफाफा लेने से इंकार भी किया था| सांसदों को दी गई राशि मात्र 15 हजार रूपए से लेकर अधिकतम 1,10,000 रूपए थी|

कोबरा पोस्ट ने गुप्त कैमरे से लिफाफा लेते हुए सांसदों के वीडियो बना लिए। लोकसभा के 10 और राज्यसभा के एक सांसद का स्टिंग आपरेशन हुआ था, इनमें सिर्फ एक सांसद सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी का था, बाकी सब विपक्ष के थे, जिनमें छह भाजपा के थे| कोबरा पोस्ट ने यह स्टिंग आपरेशन आजतक न्यूज चैनल को बेच दिया था, जिसने 12 दिसंबर 2005 को यह स्टिंग आपरेशन अपने चैनल पर टेलीकास्ट किया| उस समय संसद का शीत सत्र चल रहा था, जहां जम कर हंगामा हुआ|
तत्कालीन लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने चंडीगढ़ के कांग्रेसी सांसद पवन बंसल की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी बनाकर उन सभी सांसदों को निलंबित कर दिया| राज्यसभा के सभापति ने भी वही तरीका अपनाया| पवन बंसल कमेटी की सिफारिश पर 23 दिसंबर को इन सभी 11 सांसदों की सदस्यता खत्म कर दी गई थी| इन सभी 11 सांसदों पर भ्रष्टाचार निरोधक क़ानून में मुकद्दमा अभी भी अदालत में लंबित है|

अब 2023 में भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोईत्रा ने अडानी ग्रुप पर सवाल पूछने के लिए उनके एक प्रतिद्विन्दी दर्शन हीरानन्दानी से भारी मात्रा में कैश लिया है| दुबे ने लोकसभा स्पीकर को चिठ्ठी लिख कर महुआ मोईत्रा की लोकसभा सदस्यता तुरंत निलंबित करके जांच करवाने की मांग की है| छह नुक्तों पर आधारित तीन पेज की लंबी चिठ्ठी में दुबे ने महुआ मोईत्रा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120 ए के अंतर्गत आपराधिक मामला दर्ज करवाने की मांग भी की है|
दुबे के महुआ मोईत्रा पर लगाए गए आरोप उन्हें मिली एक वकील जय अनंत देहादराई की चिठ्ठी पर आधारित है, हालांकि चिठ्ठी में महुआ मोईत्रा को मिली किसी राशि का जिक्र नहीं किया गया है, लेकिन मीडिया में छपी खबरों में दो करोड़ रूपए, चुनाव के लिए 75 लाख रूपए और महंगा आईफोन गिफ्ट लेने का भी जिक्र किया गया है| महुआ मोईत्रा और दर्शन हीरानन्दानी ने इन सभी आरोपों से इंकार किया है|
लोकसभा स्पीकर को भेजी गई शिकायत में दुबे ने कहा है कि महुआ मोईत्रा ने कुल 61 सवाल पूछे हैं, इनमें से 50 सवाल दर्शन हीरानन्दानी और उनकी कंपनी के व्यापारिक हितों से जुड़े हैं| ज्यादातर सवाल कहीं न कहीं अडानी ग्रुप से संबंधित रहे है, क्योंकि कुछ बड़े टेंडर में दर्शन हीरानन्दानी और अडानी ग्रुप बीडिंग में प्रतिद्वन्दी रहे हैं| दुबे ने महुआ मोईत्रा की ओर से पूछे गए सवालों और उनकी ओर से अडानी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर संसद के भीतर आरोप लगाए जाने को भी आपस में जोड़ा है| दुबे ने यह चिठ्ठी 15 अक्टूबर को लिखी है, उसी दिन शाम को महुआ मोईत्रा ने एक्स पर लगातार कई ट्विट किए, जिनमें अडानी और दुबे पर कई तरह के कटाक्ष किए गए थे|
लोकसभा स्पीकर को लिखी गई निशिकांत दुबे की चिठ्ठी तुरंत लीक भी हो गई थी, इसलिए यह खबर 2005 के कैश फॉर क्वेशचन वाले मामले की तरह ही देश की सबसे बड़ी खबर बन गई| पहले तो महुआ मोईत्रा ने किसी भी जांच का सामना करने की बात कही, लेकिन जब उन्हें लगा कि उन पर करोड़ों रूपए की रिश्वत लेने, और गिफ्ट लेने के आरोपों पर लोग विश्वास कर रहे हैं, तो अगले ही दिन उन्होंने निशिकांत दूबे और इस खबर को प्रसारित करने वाले 18 मीडिया ग्रुपों को कानूनी नोटिस भेज दिया|
महुआ ने कानूनी नोटिस में निशिकांत दुबे के सभी आरोपों से तो इंकार किया ही है, नोटिस में यह भी लिखा है कि क्योंकि कुछ दिन पहले उन्होंने निशिकांत दूबे की फर्जी शैक्षणिक डिग्री का मामला उठाया था, इसीलिए वह जय अनंत देहादराई के आरोपों के आधार पर उन पर झूठे आरोप लगा रहे हैं| मोईत्रा के लीगल नोटिस में कुछ निजी बातें भी लिखी गई हैं, जैसे निशिकांत दूबे को चिठ्ठी लिखने वाला वकील जय अनंत देहादराई पहले महुआ मोईत्रा का निकट मित्र था, लेकिन जब यह दोस्ती टूट गई तो जय अनंत देहादराई ने महुआ मोईत्रा को कई तरह के मेसेज भेजे, जिनमें कुछ अश्लील मेसेज भी थे| एक बार वह उनके सरकारी आवास में घुस गया था, जहां से वह एक कुत्ता भी चुरा कर ले गया| जिसे बाद में पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने के बाद उसने लौटा दिया था|
लीगल नोटिस के मुताबिक़ जिस वकील की चिठ्ठी पर भरोसा करके निशिकांत दूबे ने लोकसभा स्पीकर को चिठ्ठी लिखी है, उसके खिलाफ महुआ मोईत्रा पुलिस रिपोर्ट दर्ज करवा चुकी है। हालांकि पिछले महीने ही महुआ मोईत्रा ने उसके खिलाफ दायर शिकायत वापस ले ली थी| अब बात यह सामने आ रही है कि वकील जय अनंत देहादराई ने पहले मीडिया में उनके खिलाफ खबर छपवाने की कोशिश की थी, लेकिन किसी भी मीडिया ने उस पर विश्वास नहीं किया, तो उसने निशिकांत दूबे को उनके खिलाफ इस्तेमाल किया है| अब यह मामला कुछ ओर बन गया लगता है|
महुआ मोईत्रा ने अपने कानूनी नोटिस के जरिए निशिकांत दुबे से लोकसभा स्पीकर को लिखी चिठ्ठी वापस लेने और सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने की मांग की है| निशिकांत दुबे ने क्योंकि खुद मीडिया के सामने कुछ नहीं कहा है, जो कुछ कहा भी है, वह ऑफ द रिकार्ड कहा है, इसलिए लोकसभा स्पीकर को लिखी चिठ्ठी पर उनके खिलाफ कोई कानूनी मामला बनने की संभावना तो नहीं है| लेकिन जैसा कि कानूनी नोटिस में कहा गया है कि महुआ मोईत्रा के पुराने मित्र जय अनंत देहादराई ने उन्हें विद्वेषपूर्ण गलत जानकारियाँ देकर लोकसभा स्पीकर को चिठ्ठी लिखवाई है| अगर यही बात साबित होती है और निशीकांत दुबे अपने आरोप साबित नहीं कर पाते, तो खुद उनके लिए मुश्किल खड़ी होगी|
अगर निशिकांत दूबे की मांग के अनुसार ही लोकसभा स्पीकर अनुशासन समिति या विशेष जांच समिति को मामला सौंपते हैं, तो दूबे को समिति के सामने अपने आरोप साबित करने पड़ेंगे| किसी सांसद के बारे में अनाप शनाप आरोप लगा कर उसकी छवि खराब करने की कोशिश में उन्हें सदन में फटकार भी लग सकती है, या उलटे उनपर कार्रवाई हो सकती है| महुआ मोईत्रा वैसे भी बहुत आक्रामक मानी जाती हैं, इसलिए उन्होंने कानूनी नोटिस जारी करने में बिलकुल देरी नहीं की| अलबत्ता उससे पहले लोकसभा स्पीकर पर भी टिप्पणी की कि पहले वह भाजपा सदस्यों के खिलाफ लंबित शिकायतों का निपटारा करें, उसके बाद वह अपने खिलाफ दायर की गई शिकायत का सामना करने को तैयार हैं|
उन्होंने ईडी को भी धमकी दी कि उनके दरवाजे पर आने से पहले अडानी के कोयला घोटाले पर एफआईआर दर्ज करे| एक्स पर उन्होंने लिखा कि अडानी ग्रुप या तो मुझे चुप कराने या मुझे नीचा दिखाने के लिए संदिग्ध संघियों और फर्जी डिग्री वालों की ओर से प्रसारित संदिग्ध डोजियर पर भरोसा कर रहा है, तो मैं उन्हे सलाह दूंगी कि वह अपने वकीलों का जरा अक्लमंदी से इस्तेमाल करें|
असल में कुछ दिन पहले ही महुआ मोईत्रा ने निशिकांत की शैक्षणिक डिग्री पर सवाल उठाया था| जिस दिन निशिकांत दुबे की चिठ्ठी लीक हुई, ठीक उसी समय महुआ मोईत्रा के कांग्रेस सांसद थरूर के साथ जाम से जाम टकराते हुए कई वीडियो भी वायरल हो गए, जिस पर आग बबूला होते हुए महुआ मोईत्रा ने आरएसएस और भाजपा पर आरोप लगाया है कि वे उनके निजी फोटो लीक कर रहे हैं| निशिकांत दुबे और मीडिया घरानों को भेजे गए कानूनी नोटिस में इन फोटोज और वीडियोज का भी जिक्र है|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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