The Kerala Story: केरल की करुण कहानी पर सेक्युलर पार्टियों की परेशानी
'दि केरला स्टोरी' पर फिल्म समीक्षक खामोश है पर पॉलिटिक्स करने वाले खूब बयानबाजी कर रहे हैं। केरल में सत्तारूढ़ वामपंथी नेता हों या विपक्षी कांग्रेस के नेता, सभी फिल्म के विरोध में एकजुट हैं।

हमेशा चर्चा में रहने वाले केरल के कांग्रेस नेता शशि थरूर हों या फिर स्थानीय वामपंथी नेता सब एक सुर में लव जिहाद पर बनी फिल्म "द केरला स्टोरी" का विरोध कर रहे हैं। शशि थरूर ने कहा है कि वो अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान करते हैं लेकिन केरल के लोगों को पूरा हक है कि इसका विरोध करें क्योंकि इसमें उनके राज्य की गलत छवि प्रस्तुत की गयी है। केरल में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने तो इसे आरएसएस की साजिश ही बता दिया है।
कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों के नेता अपने वोटबैंक की खातिर जो चाहें कहें लेकिन शालिनी उन्नीकृष्णन की सच्चाई से कौन इन्कार करेगा जो अभी भी अफगानिस्तान की जेल में है। शालिनी को एक मुस्लिम लड़का प्रेम जाल में फंसाकर उसे इस्लाम कबूल करवा देता है। इस तरह शालिनी फातिमा बी बन जाती है। 2016 में उसे 21 लोगों के साथ अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन आईएसआईएस की तरफ से लड़ने के लिए अफगानिस्तान पहुंचा दिया जाता है। वहां वह 2019 में आत्मसमर्पण करती है और तभी से वह अफगानिस्तान की जेल में पड़ी हुई है। तथाकथित सेकुलर पार्टियों के जो नेता आकड़ों के जाल में फंसा कर केरल की जड़ में पहुंच चुकी मजहबी धर्मांतरण की गंदगी पर मिट्टी डालने में लगे हैं, वो इस सत्य से कैसे इंकार कर देंगे?
केरल में आजादी से लेकर आज तक या तो कांग्रेस का शासन रहा है या फिर वापमंथियों का। इसलिए केरल में इस्लामिक चरमपंथ के प्रसार की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर आती है। अब ये यह तो कह नहीं सकते कि केरल में इस्लामिक आतंकवादी संगठनों की पैठ नहीं है, या यहां पर मजहबी मतांतरण का खेल नहीं चल रहा है, क्योंकि इन सबके सबूत राज्य पुलिस के पास है, देश के गृहमंत्रालय के पास है और यहां तक कि विदेशी सरकारों के पास भी है। अब जब "दि केरला स्टोरी" के जरिए इन्हीं सबूतों को दुनिया के सामने लाया जा रहा है तो ये दो पार्टियां रूदाली करने में लगी हैं। इन दोनों पार्टियों के पास इस सच्चाई को झुठलाने के लिए एक ही बयान बचता है कि इसे भाजपा और आरएसएस के एजेंडे वाली फिल्म बताकर विवादित कर दें। पर सच्चाई को स्याह कैसे बना पाएंगे?
कहा जाता है कि सातवीं सदी में अरब व्यापारियों के साथ इस्लाम केरल आया और इसी समय यहां कोडनगल्लूरु में एक मस्जिद का निर्माण भी करवाया जिसे आज चेरामन जुम्मा मस्जिद कहा जाता है। इस कहानी के पीछे के इतिहास में कई तरह के विवाद हैं फिर भी इतना तो सत्य है केरल में इस्लाम पहले पहल मालाबार के इलाके में ही आया। आज यही इलाका अतिवादी मुस्लिमों का गढ़ बना हुआ है। मुख्य रूप से उत्तरी केरल अतंराष्ट्रीय इस्लामिक आतंकवादी संगठनों का रिक्रूटमेंट सेंटर बना हुआ है और इसे बनने देने में केरल की सेक्युलर सरकारों, विशेषकर कांग्रेस नेताओं का पूरा हाथ रहा है। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि 2016 में कांग्रेस को हराकर सत्ता में आई वामपंथी सरकार कह रही है।
19 मई 2016 को घोषित 140 सदस्यों वाली केरल विधानसभा के चुनाव परिणाम में कांग्रेस को केवल 47 सीटें आईं थी और वामपंथी दलों ने अपनी सरकार बनाई थी। सत्ता में आने के तुंरत बाद केरल की सरकार ने वहां कपोत अभियान (ऑपरेशन पीजन) चलाया, जिसका एक ही मकसद था केरल के मुस्लिम युवकों को आईएसआईएस और अन्य आतंकवादी संगठनों में भर्ती होने से रोकना। क्योंकि केरल सरकार के पास यह रिपोर्ट थी कि 2016 में केरल के कई मुस्लिम युवक सीरिया, यमन और अफगानिस्तान में आईएसआईएस के लड़ाके बनने के लिए पहुंचे हैं। खुद केरल की पुलिस का जून 2017 में दावा था कि एनआईए और आईबी के साथ उसने ऑपरेशन पीजन के जरिए 350 से अधिक मलयाली मुस्लिम युवकों को आतंकवादी संगठनों के साथ जाने से रोका। दि केरला स्टोरी को ''अपने केरल'' से अलग बताने वाले कांग्रेसीे नेता शशि थरूर क्या केरल के आईएसआई रिक्रूटमेंट हब बन जाने की स्टोरी को भी झुठला सकते हैं?
रिसर्च एजेंसी आब्जर्बर रिसर्च फाउन्डेशन ने केरल में आईएसआईएस पर अक्टूबर 2019 में विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी। उसके अनुसार पूरे देश में केरल ही ऐसा राज्य हैं जहां आतंकवादी संगठन आईएसआईएस से जुड़ने वाले मुस्लिम युवकों की संख्या सबसे अधिक है। कन्नूर जिले से सबसे अधिक 118, मलप्पुरम से 89, कासरगोड से 66 ऐसे लड़कों की पहचान हुई जो आईएसआई से जुड़े हुए थे। अप्रैल 2019 में श्रीलंका के चर्च में आईएसआईएस ने बम धमाका कर 269 लोगों को मार दिया था। इस घटना में भी केरल कनेक्शन सामने आया और श्रीलंका की सरकार ने खुद इस मामले को भारत के सामने उठाया था।
केरल के पलक्कड जिले के 29 वर्षीय रियास का सीधा कनेक्शन श्रीलंका में बम विस्फोट करने वाले आईएस आतंकवादी जाहरान हाशिम के साथ सामने आया था। 27 मई 2019 को तब के केरल पुलिस चीफ लोकनाथ बेहरा ने अपने आधिकारिक फेस बुक पेज पर लिखा था- "आईएसआईएस की पैठ केरल में बन चुकी है, जिसके प्रति राज्य पुलिस समेत सभी सुरक्षा एजेंसियां चौकन्नी हैं और सभी एजेंसियों के बीच समन्वय के लिए इंसपेक्टर जनरल जी लक्ष्मण को नियुक्त कर दिया गया है।" क्या कांग्रेस और वामपंथी इसे भी भाजपा और आरएसएस का प्रोपेगेंडा बताएंगे?
लव जिहाद और केरल हाईकोर्ट
बात आती है लव जेहाद की, जिसे कांग्रेस और वामपंथी दोनों एक सिरे से नकार रहे हैं। लेकिन किसी को यदि सच्चाई जाननी हो तो 2009 में आए एर्नाकुलम हाईकोर्ट के फैसले से जान सकता है। इस फैसले में यह भी तथ्य सामने आता है कि किस तरह एक सोची समझी साजिश के तहत वहां धर्मांतरण हो रहा है, जिसे कांग्रेस और वापमंथी सीधे तौर पर नकार रहे हैं। शहान शा बनाम केरल केस के अपने फैसले में जस्टिस के टी शंकरन ने लिखा था "शहान शा और हिंदू लड़की की एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान दोस्ती हुई। बाद में शा को कॉलेज ने निकाल दिया, लेकिन उसने हिंदू लड़की से मेलजोल जारी रखा। उसे प्यार के जाल में फंसाया। फिर उसे हिंदू देवी देवताओं के खिलाफ भड़काना शुरू किया और इस्लाम को सबसे अच्छा मजहब बताने लगा। दोनों एक फोटोस्टेट की दुकान में जाते थे, जो किसी मुस्लिम का था। वहां एक क्रिश्चियन लड़की भी आती थी। उसे भी ईसाई धर्म के खिलाफ बरगलाया गया। एक समय ऐसा आ गया कि हिंदू लड़की शा के जाल में पूरी तरह से आ गई और शा उसका भावनात्मक भयादोहन करने लगा। उसे अक्सर अपने घर ले जाने लगा जहां उसकी मां भी हिंदू लड़की पर धर्म बदलने का दबाव बनाने लगी।
एक दिन हिंदू और क्रिश्चियन दोनों लड़कियों ने उनकी बात मान कर धर्मांतरण का फैसला कर लिया। पूरी योजना से दोनों लड़कियों को घर से भगाया गया। उन्हें रास्ते में एक ऐसी गाड़ी में बिठाया गया जहां पहले से पीएफआई के लोग बैठे थे। उनको रास्ते पर पीएफआई की तकरीर सुनाई गई। हिंदू लड़की को तो शहन शा के साथ निकाह के लिए पहले ही राजी कर लिया गया था पर क्रिश्चियन लड़की से निकाह के लिए कई मुस्लिम लड़कों को दिखाया गया। इसमें पीएफआई के लोग पूरी तरह से संलग्न थे। इधर लड़की वालों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी पर इसके पहले की पुलिस उन तक पहुंचती दोनों का इस्लाम में धर्मांतरण कर निकाह करा दिया गया और दोनों को हाईकोर्ट में पेश कर दिया गया।
शुरूआत में तो दोनों लड़कियों ने अपनी मर्जी से धर्म बदलकर निकाह करने की बात की और अपने अभिभावकों के साथ जाने से इनकार किया। लेकिन जब कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ उनके अभिभावकों को सौंप दिया तो यही दोनों लड़कियां ने कुछ ही दिन बाद उन लड़कों के साथ रहने से इनकार कर दिया जिन्होंने उनका जबरन धर्म परिवर्तन कर निकाह पढ़वाया था। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ लिखा कि केस डायरी पढ़ने के बाद सिद्ध होता है कि केरल में इस तरह का लव जिहाद धड़ल्ले से चल रहा है, जिसे रोकने के लिए राज्य को तुरंत कोई कानून बनाना चाहिए।
जाहिर है ऐसे किसी कानून को बनाने में ना कांग्रेस की रूचि होगी ना वाम दलों की। दोनों को बारी बारी से राज करना है तो केरल के इस्लामीकरण पर सवाल क्यों उठायेंगे? केरल एक ऐसा राज्य हैं जहां मुसलमानों की संख्या 18 प्रतिशत के राष्ट्रीय औसत से ज्यादा लगभग 27 प्रतिशत है और 20 में से 11 लोकसभा और 60 विधानसभा की सीटों के चुनाव परिणाम पर मुस्लिम मतदाताओं का असर है।
इसीलिए धर्म को अफीम बताने वाले वामपंथी केरल में शिक्षा से लेकर चिकित्सा संस्थानों तक में मुस्लिम बहुलता को बढ़ावा देते जा रहे हैं और सेकुलर होने का दावा करने वाली कांग्रेस देश के विभाजन के बाद भी इस्लामिक चरमपंथ को हमेशा जायज ठहराने में लगी रहती है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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