Tamil Nadu BJP: अन्ना के काम और मोदी के नाम से खिलेगा कमल?
प्रधानमंत्री मोदी के अबकी बार बीजेपी 370 और एनडीए 400 पार का नारा बिना दक्षिण भारत के सहयोग से संभव नहीं हो सकता। मोदी और अमित शाह भी इस बात को जानते है कि उत्तर भारत में वह शीर्ष पर बैठे है, ऐसे में दक्षिण में सीटों में बढ़त एनडीए को 400 पार के उनके दावे के करीब पहुचने में मदद करेगी और इसी कारण प्रधानमंत्री मोदी लगातार दक्षिण भारत का दौरा कर रहे है।
दक्षिण के राज्यों में तमिलनाडु ऐसा राज्य है जहां से भाजपा को इस बार सबसे ज्यादा उम्मीद है। तमिलनाडु से 39 सीटें आती हैं और इन सभी सीटों पर पहले चरण में 19 अप्रैल को मतदान होना है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई ने इस राज्य में भाजपा को मुकाबले में लाकर खड़ा कर दिया है।

इसलिए तमिलनाडु में पहली बार भाजपा को गंभीरता से लिया जा रहा है। हालांकि डीएमके नेतृत्व में बना गठबंधन सबसे मजबूत है और कांग्रेस इसी गठबंधन का हिस्सा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में डीएमके और कांग्रेस गठबंधन ने राज्य की 39 सीटों में से 38 सीटें जीती थीं। जयललिता के निधन के बाद अन्नाद्रमुक अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रही है। ऐसे में तीसरे विकल्प के तौर पर बीजेपी के नेतृत्व में बना गठबंधन तमिलनाडु की लड़ाई में दिखाई दे रहा है।
इस गठबंधन में बीजेपी के साथ पट्टाली मक्कल काच्ची (पीएमके) है। इसके नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामदास हैं और यह पार्टी ओबीसी में प्रभाव रखती है। भाजपा ने गठबंधन में पीएमके को 10 सीटें दी हैै। तमिलनाडु में इसका वोट शेयर 5 प्रतिशत के आस पास है। पीएमके का उत्तरी तमिलनाडु, कावेरी डेल्टा रीजन में कुछ असर है, वहीं भाजपा का पश्चिमी तमिलनाडु में अच्छा आधार बन गया है।
भाजपा के साथ एक और पार्टी इस गठबंधन का हिस्सा है और वह पार्टी है अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम, यानी एएमएमके। यह पार्टी जयललिता की करीबी रही शशिकला के भांजे टीटीवी दिनाकरन ने बनायी है। इसको गठबंधन में 2 सीटें मिली हैं। इसका असर तमिलनाडु साउथ में है और थेवर कम्युनिटी में इसका काफी प्रभाव है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री जीके वासन की पार्टी तमिल मनीला कांग्रेस भी भाजपा गठबंधन का हिस्सा है। इसके अलावा कई छोटी छोटी पार्टियां भी गठबंधन का हिस्सा हैं।
लेकिन भारतीय जनता पार्टी को अपने सहयोगी दलों से अधिक उम्मीद कभी आईपीएस अधिकारी रहे और अब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई से है। जैसे पूरे भारत में भाजपा को मोदी खींच रहे हैं वैसे ही तमिलनाडु में अन्नामलाई भाजपा को सींच और खींच रहे हैं।
प्रदेश में पूरी पार्टी अन्नामलाई पर निर्भर है। मोदी और शाह ने सोची समझी रणनीति के तहत पार्टी की सदस्यता दिलाने के एक साल के भीतर अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया था। पूर्व आईपीएस अन्नामलाई युवाओं के बीच लोकप्रिय चेहरा हैं और आक्रामक तेवर वाले नेता माने जाते हैं।
अन्नामलाई वेल्लार कोडर कम्युनिटी से आते हैं। इस कम्युनिटी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और अन्नाद्रमुक गठबंधन को एकतरफा वोट दिया था। अन्नामलाई जिस जाति से आते हैं वह तमिलनाडु की राजनीति में काफी महत्व रखती है। अन्नामलाई के जरिए भाजपा इस वोट बैंक पर फोकस करना चाहती है। खास बात यह है कि अन्नामलाई उसी जाति से आते हैं जिस जाति से अन्ना द्रमुक के पलानीस्वामी आते हैं। भाजपा इस पूर्व आईपीएस के जरिए पलानीस्वामी के वोट बैक मे सेंध लगाना चाहती है।
अन्नामलाई की तेज तर्रार छवि का फायदा भाजपा तमिलनाडु में अपनी सियासी पकड़ को मजबूत करने के लिए कर रही है। अन्नामलाई को कोयम्बटूर से टिकट दिया गया है। पहली बार भाजपा के पास एक आक्रामक छवि वाला युवा नेता है। अन्नामलाई की पदयात्रा एन मन एन मक्कल (माई लैंड, माई पीपल) ने भाजपा को सुदूर गांव की अनपढ़ महिलाओं तक पहुंचा दिया है। अन्नामलाई की पदयात्रा 28 जुलाई 2023 को रामेश्वरम से शुरू हुई थी जिसका शुभारंभ गृह मंत्री अमित शाह ने किया था और इसका समापन 28 फरवरी 2024 को पल्लदम में मोदी के रैली के साथ हुआ।
अन्नामलाई की रैली का यह असर हुआ कि तमिलनाडु के लोग अब तामिरै (कमल) को घर घर पहचानने लगे हैं। अन्नामलाई की एन मन एन मक्कल यात्रा ने 9,827 किलोमीटर, 39 संसदीय क्षेत्रों और 234 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया। अन्नामलाई ने 209 नुक्कड़ सभाओं में भाग लिया। यात्रा के दौरान पांच लाख से ज्यादा किताबें वितरित की गई जिसमें तमिलनाडु के लिए मोदी सरकार के काम काज का वर्णन है। अन्नामलाई की पदयात्रा और स्टालिन के परिवारवाद और भ्रष्टाचार पर उनके प्रहार ने भाजपा को चर्चा में ला दिया है।
अन्नामलाई भाजपा के लिए किस कदर अहम हैं, यह इससे भी समझा जा सकता है कि अन्नाद्रमुक ने भाजपा को साफ कर दिया था कि अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बनाए रखने पर अन्नाद्रमुक गठबंधन तोड़ लेगी। भाजपा ने अन्नाद्रमुक से गठबंधन तोड़ना स्वीकार किया लेकिन अन्नामलाई पर भरोसा बनाए रखा। अमित शाह ने अन्नामलाई को तमिल में थंबी कहा था, जिसका अर्थ होता है छोटा भाई। अन्नामलाई ने तमिलनाडु में वह सब किया जिसकी बदौलत आज भाजपा तमिलनाडु में सुर्खियों में है। वह हर दिन प्रेस कांफ्रेंस करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि पार्टी खबरों में बनी रहे और मुख्यमंत्री स्टालिन असहज होते रहें।
डीएमके और कांग्रेस गठबंधन ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 39 में से 38 सीटें और 53.53 प्रतिशत वोट और 2021 के विधानसभा चुनावों 234 में से 159 सीटें और 45.38 प्रतिशत वोट हासिल किया था। अभी भी यही गठबंधन सबसे ज्यादा सीटें जीतने की स्थिति में है।
मुस्लिम और ईसाई वर्ग में द्रमुक की अच्छी पैठ है। 2014 के चुनाव में जब उनकी विरोधी अन्नाद्रमुक को 39 में से 37 सीटें मिली थी, तब भी यह वर्ग द्रमुक के साथ रहा। तमिलनाडु में इस वर्ग के वोटर 12-15 प्रतिशत हैं और इनमें 85 से 90 प्रतिशत द्रमुक समर्थक हैं।
बहरहाल इस बार भारतीय जनता पार्टी अपना वोट शेयर डबल डिजीट में ले जाने के साथ तमिलनाडु में कम से कम 3 सीटें जीतने का प्रयास कर रही है। इस बार भाजपा का वोट शेयर 10 से 12 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। 2019 में यह 3.7 प्रतिशत था। पिछले कुछ सालों में पार्टी ने संगठन को भी मजबूत किया है। यहां भाजपा ने बूथ लेवल पर कमेटियां भी बना दी हैं। ऐसे में तमिलनाडु में 12 सीटें ऐसी हैं जहां भाजपा कड़ी टक्कर दे सकती है। इनमें कन्याकुमारी, कोयम्बटूर, वेल्लूर, चिदंबरम, चेन्नई सेट्रल, थिरूपुर, थेणी, रामानंतपुरम, तिरूनेलवेली, पेराम्बलूर, धर्मपुरी और चेन्नई साउथ शामिल है।
इन सीटों में कोयबंटूर से अन्नामलाई के जीतने की पूरी संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी के थिरूपुर रैली और कोयबंटूर रोड शो में आई भीड़ इस बात का सबूत है कि भाजपा का आधार यहां बढ़ा है। कोयबंटूर को मोदी ने इसलिए चुना क्योंकि 1998 में यहां बम ब्लास्ट हुआ था। ब्लास्ट में आतंकी संगठन अल उम्मा का नाम आया था। इस विस्फोट में 58 लोग मारे गए थे। मोदी ने बम विस्फोट में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि भी दी।
इसी तरह साउथ तमिलनाडु में लगातार भाजपा का उभार नजर आने लगा है। कन्याकुमारी में भाजपा मजबूत है। साउथ चेन्नई सीट पर भाजपा का प्रभाव बढा है। यहां ब्राह्मण कम्युनिटी ज्यादा है। पहले ये जयललिता के सपोर्टर थे, लेकिन अब भाजपा की तरफ झुक रहे हैं।
कच्चाद्वीप को श्रीलंका को देने का मामला उठाकर भाजपा ने कांग्रेस को असहज कर दिया है। इस मामले को तमिलनाडु के मछुआरों से धोखा बताकर भाजपा राजनीतिक लाभ लेने का हरसंभव प्रयास कर रही है। इस मुद्दे पर तटीय इलाकों में मछुआरा समुदाय के प्रभावित होने की संभावना है जिसका असर 15 सीटों पर रहता है। इसका कितना फायदा भाजपा को होता है यह 4 जून को पता चलेगा लेकिन इसमें कोई दो राय नही कि अपने प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई की मेहनत और मोदी की लोकप्रियता के दम पर भाजपा तमिलनाडु के घर घर पहुंच गई है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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