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सवाल एक सांसद, और वह भी महिला, के सम्मान का है

Swati Maliwal FIR: जब किसी के साथ कोई घटना होती है और वह इसकी शिकायत पुलिस में करता है तो उसे यह बताना होता है कि उसके साथ क्या हुआ और कहां पर हुआ। दिल्ली पुलिस में दर्ज एफआईआर में राज्यसभा सांसद स्वाती मालीवाल के साथ हुई मारपीट का विवरण तो है ही लेकिन उनके साथ ये घटना कहां हुई, उसकी जगह दिल्ली के मुख्यमंत्री आवास का पता दर्ज है।

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में संभवत: यह पहली घटना है जब किसी के साथ हुई मारपीट और हिंसा के लिए उसने मुख्यमंत्री आवास का पता दर्ज कराया है। वह भी यह शिकायत करनेवाला कोई सामान्य नागरिक या विरोधी दल का कार्यकर्ता नहीं है। पीड़ित महिला उनकी अपनी ही पार्टी की एक सम्मानित नेता और राज्यसभा सांसद है।

Swati Maliwal FIR

यह घटना निश्चित रूप से एक महिला सांसद और किसी भी राज्य के सीएम हाउस के सम्मान के खिलाफ है। क्या प्रधानमंत्री आवास या मुख्यमंत्री आवास में अगर इस तरह मारपीट या हिंसा की घटना हो तो उसे किसी भी आधार पर सही ठहराया जा सकता है? वह भी तब जब ऐसी घटना किसी पारिवारिक सदस्य के बजाय पार्टी की एक सांसद के साथ हो?

स्वाती मालीवाल ने जो एफआईआर दर्ज करवायी है उसमें उन्होंने यह तो नहीं बताया है कि वो सीएम हाउस में मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से मिलने क्यों गयी थीं, लेकिन जब वो वहां पहुंची तो उनके साथ क्या हुआ इसे उन्हें विस्तार से एफआईआर में लिखवाया है। एफआईआर के मुताबिक वो सीएम से मिलने गयीं और घर के अंदर उस जगह इंतजार करने लगीं जहां सीएम केजरीवाल लोगों से मिलते जुलते हैं।

मुख्यमंत्री के सहयोगियों द्वारा उन्हें बताया गया कि आप थोड़ी देर इंतजार करिए, जल्द ही सीएम साहब आपसे मिलेंगे। वो बैठक में इंतजार करती रहीं इतने में सीएम के निजी सहायक बिभव कुमार वहां आते हैं और गाली गलौज करते हुए मारपीट शुरु कर देते हैं। मारपीट करते हुए वो लगातार धमकियां भी देते रहते हैं मानों स्वाती मालीवाल से कुछ करने के लिए कहा गया था, जिसे वो करने के लिए तैयार नहीं थीं। इसी के कारण न सिर्फ उनके साथ गाली गलौज की जाती है बल्कि एफआईआर के मुताबिक उनके ऊपर लात घूसों से प्रहार भी किया जाता है।

एफआईआर में लिखा है "तू कैसे हमारी बात नहीं मानेंगी। कैसे नहीं मानेगी? (गाली) तेरी औकात क्या है कि हमको ना कर दे? समझती क्या है खुद को नीच औरत। तुझे तो हम सबक सिखायेंगे।" एफआईआर के मुताबिक इतना कहकर बिभव कुमार ने स्वाती मालीवाल पर थप्पड़ों की बारिश कर दी। सात आठ थप्पड़ मारने के बाद बिभव कुमार ने स्वाती मालीवाल के शर्ट को पकड़कर खींच लिया जिसके कारण न केवल उनके शर्ट की बटन टूट गयी बल्कि उनकी शर्ट भी खुल गयी।

एफआईआर में स्वाती मालीवाल ने लिखवाया है कि वो लगातार मदद के लिए चिल्लाती रहीं लेकिन सीएम हाउस में कोई उनकी मदद के लिए सामने नहीं आया जबकि उस समय मुख्यमंत्री केजरीवाल सहित उनके दर्जनों स्टाफ और सिक्योरिटी पर्सनल सीएम हाउस में मौजूद था। आखिरकार जब स्वाती मालीवाल ने यह कहा कि उसका 'पीरियड' चल रहा है इसलिए भगवान के लिए उसे छोड़ दो, तब जाकर बिभव कुमार ने उसे मारना बंद किया।

स्वाती मालीवाल द्वारा दर्ज एफआईआर में आगे लिखा है कि उन्होंने अपना चश्मा उठाकर लगाया। शर्ट व्यवस्थित की और वहीं सोफे पर बैठ गयीं। इसके बाद गेट पर तैनात सिक्योरिटी को अंदर बुलाया गया जिसने उनको वहां से चले जाने के लिए कहा। इस घटना से जुड़ा वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। इसी वीडियो की आड़ में कुछ लोग यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि सीएम हाउस में स्वाति के साथ बहुत 'सभ्य व्यवहार' हुआ था।

इस पूरे घटनाक्रम में जो चौंकानेवाला तथ्य है वह यह कि जब सीएम केजरीवाल खुद उस समय सीएम हाउस में मौजूद थे तब उन्होंने यह सारा घटनाक्रम कैसे हो जाने दिया? सवाल यह भी है कि लगभग बीस साल से केजरीवाल के साथ काम कर रही स्वाति मालीवाल को ऐसा क्या करने के लिए कहा जा रहा था जिससे इन्कार करने के कारण उन्हें इस तरह से शारीरिक प्रताड़ना दी गयी?

जो लोग आज उन्हें बीजेपी का एजंट बता रहे हैं उन्हें यह समझना चाहिए कि इतना सब होने के बाद स्वाति मालीवाल सीधे पुलिस स्टेशन नहीं गयीं। उन्होने एफआईआर भी तीन दिन बाद लिखवाई जब उन्हें यह समझ में आ गया कि पार्टी फोरम पर उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। स्वाती मालीवाल न केवल एनजीओ के दिनों से केजरीवाल के साथ हैं बल्कि वो पार्टी लाइन पर चलनेवाली महिला रही हैं। अपने काम और बयान से उन्होंने हमेशा बीजेपी को असहज किया है। इसलिए यह कहना कि आज वो बीजेपी के इशारे पर काम कर रही हैं उनकी चोट पर मरहम के बजाय नमक रगड़ने जैसा काम होगा।

तीस हजारी कोर्ट में उनकी पेशी का वीडियो हो या मेडिकल रिपोर्ट। उन्हें देखकर और उनकी रिपोर्ट दोनों यह साफ साफ बता रही हैं कि उनके साथ मारपीट की गयी है। मेडिकल रिपोर्ट में बताया गया है कि उनके चेहरे और बायें पैर में अंदरुनी चोट लगी है। उनके चलने के अंदाज से भी लग रहा है कि उन्हें भीषण शारीरिक कष्ट से गुजरना पड़ा है जिससे अभी भी वो उबर नहीं पायी हैं।

यह सब देखकर भी अगर कोई उन्हें किसी पार्टी के इशारे पर काम करनेवाला ठहराये तो यह उसकी राजनीतिक चालाकी होगी और कुछ नहीं। अपने सोशल मीडिया एकाउण्ट पर स्वाति मालीवाल ऐसे लोगों को जवाब दे भी रही हैं जो उन्हें बीजेपी का एजंट ठहरा रहे हैं। उन्हें ट्वीट किया है कि एक गुण्डे को बचाने के लिए उनके साथ यह सब किया जा रहा है।

किसी पार्टी की अंदरुनी राजनीति क्या है इससे देश के लोगों को कुछ लेना देना नहीं होता। लेकिन यहां सवाल एक महिला सांसद की सीएम हाउस में हुई पिटाई से जुड़ा है। अगर पार्टी फोरम पर ही इस मामले को निपटा लिया गया होता तो संभवत: स्वाति मालीवाल पुलिस के पास भी नहीं जातीं। लेकिन अब वो पुलिस के पास पहुंच चुकी हैं और एफआईआर दर्ज हो चुकी है। बाकी पुलिस जांच में सामने आयेगा कि सीएम हाउस में उनके साथ क्या हुआ।

लेकिन यह देश के हर नागरिक के लिए शर्म से सिर झुका देने वाली घटना है। अगर किसी सीएम हाउस में किसी महिला सांसद के साथ इस तरह की मारपीट हो सकती है तो नारी सम्मान और नारी अधिकार के राजनीतिक नारे का क्या मतलब रह जाएगा? वैसे भी राजनीति में नैतिकता उस अनाथ बच्चे की तरह होती है जिससे प्यार तो सभी करते हैं लेकिन अपने साथ कोई नहीं रखना चाहता। अतीत में भी राजनीति पूरी तरह से नैतिक रही होगी इसे दावे से नहीं कहा जा सकता लेकिन जैसे जैसे भारत में लोकतंत्र मजबूत हो रहा है नैतिकता कमजोर पड़ती जा रही है।

दिल्ली के सीएम हाउस में स्वाति मालीवाल के साथ 13 मई को हुई मारपीट एक ऐसी ही घटना है जो एक नागरिक के तौर पर हमें शर्म से भर देती है। जिन सरकारी घरों की ओर हम इतने सम्मान से देखते हैं, जहां हमारे द्वारा चुने गये जनप्रतिनिधि जाकर निवास करते हैं अगर उन घरों के भीतर यह सब होता है जो एक राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ हुआ तो एक नागरिक का आत्मविश्वास टूटता है। इस पर सभी राजनीतिक दलों को ध्यान देने की जरूरत है कि नारी सम्मान या अधिकार की बात सिर्फ राजनीतिक नारेबाजी न हो बल्कि राजनीतिक लोग उसका पालन सबसे पहले अपने आचरण और व्यवहार से करके दिखायें।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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