Sachin Pilot : सचिन और सारा के निजी जीवन पर सार्वजनिक चर्चा क्यों?
Sachin Pilot : देश के उभरते नेता सचिन पायलट के लाखों प्रशंसकों को यह जानकर कतई अच्छा नहीं लग रहा कि उनका नेता अब अकेला है। समर्थकों को सुनकर बुरा लग रहा है कि पायलट का तलाक हो चुका है और अब वे सारा अब्दुल्ला के पति नहीं हैं। माना कि यह सत्य है, लेकिन यह सत्य किसी को नहीं सुहाया। वैसे, पायलट और सारा के निहायत निजी जीवन से जुड़े इस सत्य को कम लोग ही जानते थे, और ज्यादातर बिल्कुल ही अनजान थे, मगर अब जमाना जान रहा है। यह तो पायलट चुनाव नहीं लड़ रहे होते, तो शायद कुछ और सालों तक किसी को पता तक नहीं चलता। लेकिन चुनाव आयोग के नियमों में सख्ती इतनी है कि ऐसे सत्य को सार्वजनिक करना ही सही होता है।
यह एक दिल कचोटने वाला संयोग हैं कि सारा से पायलट के तलाक की खबर उस दिन सार्वजनिक हुई जिस दिन पूरा देश पायलट के नामांकन में उमड़ी अथाह भीड़ में उनकी लोकप्रियता का अक्स आंक रहा था। वास्तव में चर्चा तो होनी थी पायलट के नामांकन में उपस्थित समर्थकों के ऐतिहासिक जलसे की और उनकी अप्रतिम लोकप्रियता की। चर्चा होनी थी राजस्थान के इस लोकप्रिय युवा नेता के प्रति युवा वर्ग के स्नेह की। मगर, हलफनामे के हिसाब ने हादसे की शक्ल में जब हकीकत परोस दी, तो उसकी चर्चा को भी रोका तो नहीं जा सकता था।

फिर, क्योंकि हमारी दुनिया में अक्सर यह होता रहा है कि कोई एक जीता जागता शख्स अचानक ही कुछ अलग तरह के कारणों से शीर्षकों और सुर्खियों में तब्दील हो जाता है और फिर उसके बारे में लोग वे कहानियां भी कहने लगते हैं जिनसे उसका कभी कोई वास्ता तक नहीं रहा होता। शायद इसी कारणवश कुछ लोग हैं, जो कह रहे हैं कि पायलट के जीवन की इस निजी घटना के वे गवाह हैं, लेकिन कौन जाने कि वे सच ही बोल रहे हैं।
बहरहाल, राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए 31 अक्टूबर को टोंक में सचिन पायलट ने अपना नामांकन दाखिल किया, तो उसके साथ दिये जाने वाले हलफनामे में अनिवार्य रूप से किए जाने वाले खुलासों में पायलट ने घोषित किया है कि वे तलाकशुदा हैं और विवाह से संबद्ध कोई बात उन पर लागू नहीं होती। मतलब साफ है कि उनका अपनी पत्नी सारा अब्दुल्ला से अधिकारिक तलाक हो चुका है और यह मामला सरकारी फाइलों के कागजों की कैद में ही रहे, और चर्चा का विषय न बने तो ही अच्छा।
सारा अब्दुल्ला नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक और जम्मू-कश्मीर के दो बार मुख्यमंत्री रहे शेख अब्दुल्ला की पोती, फारूक अब्दुल्ला की बेटी और उमर अब्दुल्ला की बहन हैं। फारूक और उमर भी जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे हैं। जब सचिन पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई कर रहे थे तभी सारा और सचिन नजदीक आए और 2004 में दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया। हालांकि महज 10 साल बाद ही सन 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले भी सचिन और सारा के बीच सब कुछ ठीक नहीं होने की चर्चाएं सुनाई दी थीं। लेकिन दोनों के तलाक की बात साबित नहीं हुई। राजस्थान विधानसभा चुनाव में जीत के बाद दिसंबर 2018 में सचिन जब उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे, तो उस आयोजन में सारा अब्दुल्ला अपने दोनों बेटे आरान और विहान और अपने पिता फारूक अब्दुल्ला के साथ उपस्थित थीं। लेकिन उस दिन के 4 साल और लगभग 11 महीने बाद अब साफ तौर पर जाहिर है कि सचिन और सारा पति - पत्नी नहीं हैं।
वैसे, जीवन में कुछ हादसे इतने अंतरंग होते हैं कि बाहर की दुनिया को आखिर उन हादसों की हकीकत जानने का हक हासिल भी क्यों होना चाहिए। मगर, दुनिया तो दुनिया है, जिसे हादसों और उनकी हकीकत सूंघने की ललक लगी रहती है। शायद इसीलिए सामान्य किस्म के लोग सामान्यतः यही मान लेते है कि व्यक्ति का जीवन अगर सार्वजनिक है, तो फिर उसके जीवन की हर बात सार्वजनिक होनी चाहिए। ऐसे लोगों को व्यक्तिगत विवादों और निजी घटनाओं को भी चौराहों की चर्चा बनाए रखने में रस आता है। मगर, फिर भी सचिन पायलट के निजी जीवन के इस अंतरंग प्रसंग की निजता का सम्मान बनाए रखना ही उचित होगा।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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