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Religious Conversion: यूपी में आर्थिक मदद के बहाने धर्मांतरण का धंधा

Religious Conversion: पहले झुग्‍गी बस्‍ती में रहने वाले गरीब हिंदू परिवारों की कोरोना संकट में सहायता के नाम पर मदद की गई, फिर सुनियोजित तरीके से उनके हाथों तक बाइबिल पहुंचाकर प्रार्थना सभा में शामिल कराया गया, और आखिर में हिंदू देवी-देवताओं की तस्‍वीरों-पहचानों से अलग करके उन्‍हें ईसाई धर्म में शामिल करा लिया गया, और इस तरह उत्‍तर प्रदेश के मेरठ में चार सौ परिवार हिंदू से ईसाई बन गये।

Religious Conversion rising in uttar pradesh

धर्मांतरण की भनक ना तो लोकल इंटेलिजेंस को लगी, ना अन्‍य सुरक्षा एजेंसी को। देश के धार्मिक जनसख्‍ंया आंकड़ों में भी कोई बदलाव नहीं हुआ, और चार सौ हिंदू परिवार चुपचाप ईसाई बन गये। दरअसल, भारत में ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्मांतरण करने का तरीका है, जिसमें हिंदू परिवार ईसाई बन जाते हैं, लेकिन सरकारी आंकड़ों में इनकी संख्‍या ज्‍यों की त्‍यों रहती है।

मेरठ पुलिस ने धर्मांतरण मामले में तीन महिलाओं समेत आठ लोगों को अरेस्‍ट किया है। लेकिन अपनी असफलता और लापरवाही को छुपाने के लिये कहानी में ट्विस्‍ट देते हुए इस मामले में जमीन से जुड़े विवाद की संभावना का एक सिरा भी उछाल दिया है, ताकि इसे पकड़कर विपक्षी दल और ईसाई मिशनरी समर्थक मीडिया इस गंभीर मसले को हल्‍का कर सकें।

धर्मांतरण का पुराना इतिहास

भारत में धर्मांतरण का इतिहास कई सदी पुराना है। बौद्ध, ईसाई एवं इस्‍लाम दुनिया में तीन ऐसे बड़े धर्म हैं, जिनके चलते धर्मांतरण जैसा शब्‍द अस्तित्‍व में आया। इन तीनों धर्मों के सामने था हिंदू और यहूदी धर्म। भारत में प्राचीन काल से ही सनातन हिंदू धर्म अस्तित्व में रहा है। प्राचीन काल में जैन एवं बौद्ध पंथ के प्रचार प्रसार के बाद अनेक हिंदुओं का धर्मांतरण हुआ। लेकिन हिंदुओं का जैन एवं बौद्ध धर्म में धर्मांतरण स्‍वेच्‍छा से हुआ। सामाजिक, आध्यात्मिक कारणों से अनेक लोगों ने बौद्ध एवं जैन धर्म अपनाया, लेकिन इस्‍लाम एवं ईसाई में धर्मांतरण स्‍वेच्‍छा से नहीं हुआ। ईसाई मिशनरियों ने धन को अपना हथियार बनाया, वहीं इस्‍लाम ने तलवार के जरिये धर्मांतरण कराया।

कई शताब्दियों से ईसाई मिशनरी भी हिंदुओं को ईसाई बनाने के काम में जुटे हुए हैं। यूरोप एवं अमरीका से अरबों डॉलर के फंड पाने वाली मिशनरी संस्थाएं मसीही सत्‍संग, चंगाई सभा, यीशु दरबार, प्रार्थना सभा चलाकर भारत के गरीब, दलित एवं आदिवासी वर्ग के हिंदुओं को फुसलाती हैं तथा शिक्षा-स्‍वास्‍थ्‍य-सेवा के नाम पर मदद करके धर्मांतरण कराती हैं।

सेवा की आड़ में धर्मांतरण

सेवा की आड़ में मिशनरियों द्वारा धर्म परिवर्तन का काम सदियों से चल रहा है। ईसाईयत में धर्मांतरण को तेजी 1542 में मिली जब फ्रांसिस जेवियर ने भारत में रोमन कैथोलिक चर्च का काम बढ़ाना शुरू किया और हिंदुओं को साम दाम दण्ड भेद किसी भी प्रकार से ईसाई बनाने को प्रोत्साहन दिया।

अंग्रेजों का शासन आने के बाद ईसाई धर्मांतरण को और गति मिली। अंग्रेजों के शोषण से त्रस्त लोगों में व्‍याप्‍त गरीबी का लाभ उठाकर मिशनरियों ने लाखों भारतीयों का धर्म परिवर्तन कराया। भारत की स्वतंत्रता के बाद ऐसे धर्मांतरण की खूबी यह रही कि ईसाई बन जाने वाली जातियों ने सरकारी कागजों में अपना धर्म नहीं छोड़ा, और हिंदुओं को मिलने वाले लाभ ईसाई बनकर भी उठाते रहे। इसके चलते धार्मिंक आंकड़ों में किसी प्रकार का परिवर्तन देखने को नहीं मिलता है।

इस तरह के धर्मांतरण का चर्चित उदाहरण छत्‍तीसगढ़ के पहले मुख्‍यमंत्री अजीत जोगी हैं। अजीत जोगी के पिता ने मिशनरियों के सहयोग से ईसाई धर्म अपना लिया था, लेकिन अजीत जोगी हिंदू आदिवासियों को मिलने वाले सारे लाभ लेते रहे। जोगी छत्‍तीसगढ़ के आदिवासी कोटे से पहले आईएएस अफसर बने और बाद में सीएम, लेकिन मौत के बाद उनका अंतिम संस्‍कार ईसाई रीति रिवाज से हुआ। राजस्थान से भारतीय जनता पार्टी के एक आदिवासी सांसद की मृत्यु के बाद ही लोगों को पता चला कि वे भी वर्षों पहले ही ईसाई बन चुके थे।

मिशनरियों के धर्मांतरण के कारण पूर्वोतर तथा देश के आदिवासी बाहुल्‍य राज्‍य ओडिशा, झारखंड, छत्‍तीसगढ़, तथा आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु में धर्मांतरण करने वाले ईसाइयों की संख्‍या बढ़ चुकी है। मिशनरियों के एजेंडे के खिलाफ हिंदू संगठन खड़े होने लगे तथा आदिवासी क्षेत्रों में वनवासी कल्‍याण आश्रम के जरिये मिशनरियों के धर्मांतरण अभियान को रोकने की पहल की। फिर धर्म जागरण मंच के जरिये घर वापसी का अभियान शुरू किया।

महात्‍मा गांधी भी मानते थे कि मिशनरियों द्वारा कराया जाने वाला धर्मांतरण एक अनावश्‍यक हिंसा है। संविधान प्रारूप समिति में अनुच्‍छेद 25 पर लंबी बहस के बाद अपने धर्म के प्रचार की अनुमति मिली, लेकिन धर्मांतरण की नहीं। अब समय आ गया है कि धर्म के प्रचार के नाम पर धर्म परिवर्तन करने वालों पर भी नकेल कसी जाए।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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