Rajasthan: क्या राष्ट्रपति शासन में होंगे राजस्थान विधानसभा चुनाव?
जहां एक तरफ सचिन पायलट अपनी रैलियों में अशोक गहलोत पर हमले कर रहे हैं, वहीं कुछ असंतुष्ट मंत्री एवं विधायक अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए भाजपा में जाने के लिए तत्पर बैठे हैं।

आप भारत का नक्शा देख लीजिए, दक्षिण के एक छोर पर केरल है, और पश्चिम के एक छोर पर पाकिस्तान के बॉर्डर से लगा हुआ राजस्थान है। केरल से लेकर राजस्थान तक कांग्रेस टूट रही है। जब राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा निकाल रहे हैं तो कांग्रेस बिखर रही है। राहुल गांधी केरल से यात्रा करते हुए आगे बढ़े थे। अब केरल के सबसे पुराने कांग्रेस नेताओं में से एक ए.के. एंटनी, जो मुख्यमंत्री भी रहे, देश के रक्षामंत्री भी रहे, कांग्रेस के कोषाध्यक्ष भी रहे, उनका बेटा अनिल एंटनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बनी बीबीसी की फिल्म का समर्थन करने पर कांग्रेस छोड़ गया।
इससे पहले पंजाब में राहुल गांधी की यात्रा के तुरंत बाद कांग्रेस की पिछली सरकार का वित्तमंत्री मनप्रीत बादल कांग्रेस छोड़ गया। अब राजस्थान सरकार के कुछ मंत्री कांग्रेस छोड़ रहे हैं। राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र खत्म होते ही अशोक गहलोत सरकार पर संकट आने वाला है। संभव है विधानसभा चुनाव से पहले ही गहलोत सरकार गिर जाएगी और राष्ट्रपति शासन में विधानसभा के चुनाव हों।
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के समय ही अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने शक्ति प्रदर्शन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। राहुल गांधी के राजस्थान की सीमा पार करते ही सचिन ने अपनी राजनीतिक दुकान अलग खोल ली है। सचिन पायलट न तो मंत्री हैं, न कांग्रेस में पदाधिकारी, लेकिन वह उसी तरह दौरे कर रहे हैं, जैसे 2018 में विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश अध्यक्ष के नाते करते थे। हर जिले और हर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेसी दो फाड़ हो गए हैं, कुछ गहलोत के साथ हैं, तो कुछ सचिन पायलट के साथ।
सचिन पायलट प्रदेश भर में किसान सम्मेलन करके अपने समर्थकों को अपने पीछे लामबंद कर रहे हैं और अशोक गहलोत की जड़ों में मठ्ठा डाल रहे हैं। हालांकि वह दावा यही कर रहे हैं कि तीस साल की परंपरा तोड़ कर राज्य में दुबारा कांग्रेस सरकार बनाएंगे। अपनी किसान रैलियों के माध्यम से वह असल में भाजपा की ही मदद कर रहे हैं, क्योंकि राहुल गांधी की यात्रा के दौरान उनके अपने प्रभाव वाले क्षेत्र दौसा में सांसद किरोड़ीलाल मीणा के नेतृत्व में किसान सडकों पर आ गए थे। किसानों के सड़कों पर आने से यह बात खुल कर सामने आ गई थी कि पिछले चुनाव में किया गया किसानों की कर्ज माफी का वायदा पूरा नहीं हुआ है।
किरोड़ी लाल मीणा तो उसके बाद से युवाओं को साथ लेकर पेपर लीक मामले में भी आन्दोलन कर रहे हैं। किसानों के बाद उन्होंने जवानों को भी साथ ले लिया है। गहलोत राज में नौकरियों की जितनी भी परीक्षाएं हुई, उन सबके पेपर लीक हो गए थे, जिस कारण किसानों की तरह बेरोजगार जवानों में भी आक्रोश है। राजस्थान में लग रहा जय जवान जय किसान का नारा कांग्रेस की खटिया खड़ी कर रहा है। इसलिए संशय पैदा होता है कि सचिन पायलट किसानों को कांग्रेस के पक्ष में लामबंद कर रहे हैं या उनमें गहलोत के प्रति आक्रोश को हवा देकर भाजपा के पक्ष में।
पायलट खुलकर अशोक गहलोत के खिलाफ नहीं बोलते, वह उनका नाम ही नहीं लेते, लेकिन इशारों ही इशारों में सारे हमले उन्हीं पर होते हैं। सच यह है कि राजस्थान में कांग्रेस पूरी तरह दो फाड़ हो चुकी है। कहने को पायलट कुछ भी कहें, लेकिन वह भी अच्छी तरह जानते हैं कि कांग्रेस लौट कर नहीं आएगी। इसलिए अगले पांच साल के लिए राजनीति तय करने का अभी समय है।

अंदर ही अंदर खुसुर पुसर तो यह भी चल रही है कि गहलोत सरकार के कुछ मंत्रियों के कांग्रेस और सरकार छोड़ते ही सचिन पायलट भी कांग्रेस छोड़ कर अपनी क्षेत्रीय पार्टी बना लेंगे। यदि राजस्थान में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो ऐसे में किसी भी सरकार का बनना निर्दलियों और छोटी पार्टियों के हाथ में आ जायेगा। सचिन पायलट सोचते हैं कि अगर वह अलग पार्टी बना कर 25-30 विधायक जीता लाए, तो उन्हें नीतीश कुमार और कुमार स्वामी की तरह मुख्यमंत्री बनने से कोई नहीं रोक सकता। इसीलिए वह किसानों को गहलोत के खिलाफ और अपने समर्थन में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।
जहां एक तरफ सरकार और संगठन में बयानबाजी का दौर जारी है तो वहीं अशोक गहलोत भी सरकार की ताकत दिखा रहे हैं। गहलोत-सचिन की खुली जंग के बीच अब सोशल मीडिया पर वायरल इस पोस्ट ने राजनीति को गर्म दिया है कि सरकार के पांच मंत्री जल्द ही पाला बदल सकते हैं और उनमें कई दिग्गज नेता शामिल हैं। इन सबके भाजपा में जाने की चर्चा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 जनवरी को राजस्थान के भीलवाड़ा का दौरा करेंगे। इसी दौरे से तय होगा कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के मुकाबले मोदी को राजस्थान में कितना रिस्पांस मिलता है। हो सकता है कि उनके दौरे के तुरंत बाद गहलोत सरकार गिरने की कगार पर आ जाए।
30 जनवरी को अपनी भारत जोड़ो यात्रा निपटाने के तुरंत बाद राहुल गांधी को राजस्थान में अपनी टूट रही कांग्रेस को बचाना पड़ेगा। इन खबरों में कितनी सच्चाई है, यह तो नहीं पता, लेकिन पांच मंत्रियों के इस्तीफों की खबरों से चुनावी साल में कांग्रेस के विधायकों में खलबली मच गई है कि वे किसके साथ रहें, तो उनका भला होगा। गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि उन्हें नहीं लगता ऐसा कुछ चल रहा है। उनके इस बयान से लगता है कि कुछ तो चल रहा है, जिसके बारे में वे अभी बात नहीं करना चाहते।
राजस्थान में कांग्रेस के टूटने की दूसरी वजह भी है। वह वजह यह है कि राजस्थान वह धरती है, जहां से भारतीय सेना में बड़ी तादाद में जवान भर्ती होते हैं। अब तक चीन और पाकिस्तान से जितने भी युद्ध हुए , राजस्थान के जवानों ने अपनी कुर्बानी देकर सीमाओं की रक्षा की है। राजस्थानियों को इस बात पर गर्व है कि पुलवामा में उसके जवानों की शहादत का सर्जिकल स्ट्राईक कर के बदला लिया गया था। पुलवामा में जो 40 जवान शहीद हुए थे, उनमें से पांच राजस्थान के थे। लेकिन कांग्रेस बालाकोट सर्जिकल स्ट्राईक पर बार बार सवाल उठाकर उनके जख्मों को हरा करने की कोशिश करती रहती है। ऐसे में कांग्रेस नेताओं के लिए अपने मतदाताओं के सवालों का सामना करना मुश्किल हो जाता है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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