Congress abuses Modi: 'मौत के सौदागर' से 'जहरीला सांप' तक मोदी को मिली गालियों का हिसाब किताब

हर चुनाव से पहले कांग्रेस का कोई न कोई नेता नरेन्द्र मोदी के लिए कोई न कोई ऐसा अपशब्द बोल ही जाता है जो कांग्रेस को ही संभालना भारी पड़ता है। कर्नाटक में भी यह काम खुद उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे ने कर दिया है।

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Congress abuses Modi: कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने मुझे 91 गालियां दी हैं। यदि इतना समय वे सुशासन देने में लगाते तो स्थिति दयनीय नहीं होती। आखिर कांग्रेसी नेताओं द्वारा नरेन्द्र मोदी को गालियां देने का यह सिलसिला कहां से शुरू हुआ?

दरअसल, नरेन्द्र मोदी को गालियां देने की शुरुआत 2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी, जब तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने उन्हें मौत का सौदागर कहा था। सोनिया गांधी का इशारा गुजरात दंगों में मोदी की कथित भूमिका को लेकर था लेकिन नरेन्द्र मोदी ने अपने अपमान को राज्य की अस्मिता से जोड़ दिया। इसके बाद गुजरात की जनता ने इस अपमान का बदला लेते हुए कांग्रेस को बुरी तरह से हराया। ऐसी ही गलती सोनिया गांधी ने 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार में भी की जब उन्होंने नरेन्द्र मोदी को जहर की खेती करने वाला बता दिया और इसका असर यह हुआ कि कांग्रेस मात्र 2 अंकों में सिमट कर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने को मजबूर हो गई।

2009 में कांग्रेस के बड़े नेता बीके हरिप्रसाद ने नरेन्द्र मोदी को गंदी नाली का कीड़ा कहा था जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे। कांग्रेस नेता रिजवान उस्मानी ने 2009 के लोकसभा चुनाव की रैली में मोदी को बदतमीज, नालायक कहते हुए सवाल उठाया कि इसका बाप कौन है? इसकी मां कौन है? इसके बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 13 जून, 2012 को मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को राक्षसराज रावण बता दिया था। उसी वर्ष तत्कालीन गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अर्जुन मोडवाडिया ने अक्तूबर, 2012 की अपनी चुनावी रैली के भाषण में नरेन्द्र मोदी की तुलना बंदर से करते हुए उन्हें रैबिज से पीड़ित बता दिया था।

इन्हीं मोडवाडिया ने नवंबर, 2012 में चुनावी रैलियों में मोदी के वैवाहिक जीवन पर सवाल खड़े कर दिए। नवंबर, 2012 की एक चुनावी रैली में कांग्रेस नेता और तत्कालीन सांसद मणिशंकर अय्यर ने नरेन्द्र मोदी को लहू पुरुष, पानी पुरुष और असत्य का सौदागर बोल दिया।

नवंबर, 2012 में चुनाव प्रचार के दौरान सुरेन्द्रनगर से तत्कालीन कांग्रेस सांसद सोमा पटेल ने मोदी पर जातिगत टिप्पणी करते हुए घांची कह दिया। तत्कालीन कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने 2012 में नरेन्द्र मोदी की तुलना दाऊद इब्राहिम से कर दी। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने 17 अगस्त, 2013 को नरेन्द्र मोदी को गंगू तेली कहा जबकि तत्कालीन केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने 14 जुलाई, 2013 को नरेन्द्र मोदी को पागल कुत्ता कहा।

इसके अलावा तत्कालीन कांग्रेस सांसद हुसैन दलवाई द्वारा उन्हें चूहा कहा गया। सलमान खुर्शीद ने मोदी को बंदर कहा। मणिशंकर अय्यर ने नरेन्द्र मोदी को नीच आदमी कहा।

गोवा से कांग्रेस राज्यसभा सांसद शंताराम नाइक द्वारा हिटलर और तानाशाह पोल पोट कहा जाना हो या कांग्रेस नेत्री रेणुका चौधरी द्वारा नरेंद्र मोदी को न्यूमोनिया की तरह का वायरस कहकर नमोनिटिस का नाम देना हो, कांग्रेसी नेताओं द्वारा मोदी को हमेशा अपमानित किया गया।

जयराम रमेश की नजर में मोदी भस्मासुर हैं। कांग्रेस नेता इमरान मसूद तो मोदी के टुकड़े-टुकड़े करने की बात सार्वजनिक मंच से कह चुके हैं। जब सभी कांग्रेसी नरेन्द्र मोदी को भला-बुरा कह रहे हों तो "प्यार के दुकानदार' राहुल गांधी कहां पीछे रहते? 6 अक्तूबर, 2016 को उन्होंने मोदी को जवानों के खून का दलाल कह दिया। 2019 में कांग्रेस पार्टी ने चौकीदार चोर है का नारा दिया था जिसने उसकी लुटिया ही डुबा दी। यही नहीं, नरेन्द्र मोदी की मां और उनके परिजनों को भी कांग्रेसी नेताओं द्वारा भर-भरकर गालियां दी गईं।

गालियाँ कैसे बनीं मोदी की ताकत?

नरेन्द्र मोदी के काम करने के तरीके पर राजनीतिक दलों में भले ही मतभेद हों किन्तु अपने कार्यों से उन्होंने एक बहुत बड़ा जनसमर्थन खड़ा किया है जो उनकी स्वयं की कमाई है। उस वर्ग को भारतीय जनता पार्टी से उतना मतलब नहीं हैं जितना नरेन्द्र मोदी से है। जब कोई नरेन्द्र मोदी को नीचा दिखाता है या उनके प्रति अपशब्दों का प्रयोग करता है तो यही वर्ग विभिन्न माध्यमों द्वारा उनके समर्थन में अन्य लोगों को जोड़ने लगता है। ऐसे में यह सन्देश बहुत दूर तक जाता है कि मोदी तो काम कर रहे हैं लेकिन विपक्षी उन्हें हतोत्साहित करने के लिए गालियां दे रहे हैं।

यही बात नरेन्द्र मोदी की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। किस बात को कहां और किस अपशब्द को किस अस्मिता से जोड़ना है, उन्हें बखूबी आता है। यह गलत भी नहीं है। राजनेता यही राजनीति करते हैं। इसके अलावा हमारे समाज में आज भी किसी को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना अच्छा नहीं माना जाता। जो अपमान करता है उसे शोषक माना जाता है और जिसका अपमान हुआ उसे शोषित मानते हैं। नरेन्द्र मोदी गाली खाने की राजनीति में शोषित हो चुके हैं जिस कारण जनता की सहानुभूति भी उन्हें प्राप्त होती है।

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    हालांकि कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान स्वयं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी की तुलना सांप से कर दी। इसी तरह उनके बेटे ने भी मोदी के बारे में अपशब्द कहे। जब मोदी ने ही इसका सार्वजनिक रूप से जवाब दिया कि सांप तो शिवजी के गले में रहता है तो संभावित नुकसान से बचने के लिए प्रियंका गांधी ने कांग्रेसियों से अपील किया कि वे नरेन्द्र मोदी को लेकर अपशब्द न कहें।
    यदि प्रियंका की अपील पर ही कांग्रेसी रुक जाएं तो संभवतः उनका राजनीतिक लाभ होगा अन्यथा तो सोनिया गांधी से शुरू हुआ गालियों का सिलसिला थमते नहीं दिख रहा। अभी तक तो नरेन्द्र मोदी को गाली देकर या अपशब्द कहकर कांग्रेस ने अपना नुकसान ही किया है। देखना यह होगा कि कर्नाटक में इसका क्या परिणाम आता है।

    (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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