Congress: मोदी ने किया नेहरू परिवार मुक्त संसद की ओर इशारा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा में दिए गए भाषण में कुछ बातें तो एक दम स्पष्ट हैं, लेकिन कुछ बातों को डिकोड करने की जरूरत है। खासकर वे बातें जो उन्होंने कांग्रेस और नेहरू परिवार के बारे में उनका नाम लिए बिना कही हैं।
2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस मुक्त भारत का नारा लगाया था, लोकसभा में सिर्फ 44 सीटें देकर देश की जनता ने कांग्रेस को ऐसी स्थिति में पहुंचा भी दिया था। इस बार उन्होंने नेहरू परिवार को सदन से दर्शक दीर्घा में पहुँचाने की बात कही है।

इसका मतलब यह है कि नेहरू परिवार की अमेठी सीट से राहुल गांधी को हराने के बाद मोदी का संकल्प परिवार की रायबरेली सीट से कांग्रेस को हराना है। ठीक इसी समय पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा ने कांग्रेस को सलाह दी है कि वह गांधी परिवार के अलावा अपने भविष्य के बारे में सोचना शुरू करे।
जिस गांधी के कारण इस परिवार के लोग अपने नाम में गांधी लगाते हैं, रायबरेली उस फिरोज गांधी की लोकसभा सीट है। इस सीट का नेहरू परिवार से कोई ताल्लुक नहीं। 1952 और 1957 में इस सीट से फिरोज जहांगीर गांधी जीते थे।
1960 में फिरोज गांधी के देहांत के बाद उपचुनाव में कांग्रेस के आरपी सिंह और बाद में 1962 के आम चुनाव में कांग्रेस के ही बैजनाथ कुरील जीते। 1967 में फिरोज गांधी की पत्नी और जवाहर लाल नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी ने अपने पति की सीट पर चुनाव लड़ा। 1971, 1977 और 1980 में भी इंदिरा गांधी ने ही रायबरेली से चुनाव लड़ा। 1977 के चुनाव में राज नारायण से हार जाने के बाद इंदिरा गांधी कर्नाटक की चिकमंगलूर सीट से उप चुनाव जीत कर लोकसभा पहुंची थी।

क्योंकि 1977 में इंदिरा गांधी रायबरेली से हार गई थी, इसलिए एहतियात के तौर पर 1980 में वह रायबरेली के साथ साथ कर्नाटक की मेढक सीट से भी चुनाव लड़ी। दोनों सीटों से जीतने के बाद इंदिरा गांधी ने रायबरेली से इस्तीफा दे दिया। 1980 का उप चुनाव और 1984 का आम चुनाव नेहरु परिवार के ही अरुण नेहरु ने जीता।
1989 में रायबरेली सीट इंदिरा गांधी की मौसी शीला कौल को दे दी गई, जो लगातार दो बार वहां से जीती। लेकिन 1996 में भाजपा के अशोक सिंह ने यह सीट कांग्रेस से छीन ली थी, वह 1998 में भी वहां से जीते।
इसलिए सोनिया गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ने से डर रही थीं। उन्होंने सतीश शर्मा को रायबरेली से चुनाव लड़वाया और खुद अपने देवर और अपने पति के निर्वाचन क्षेत्र अमेठी से चुनाव लड़ी, लेकिन आश्वस्त नहीं थी कि वह अमेठी में जीत ही जाएँगी, इसलिए वह अमेठी के साथ साथ कर्नाटक की उस बेल्लारी सीट से भी चुनाव लड़ी, जो आज़ादी के बाद कांग्रेस कभी नहीं हारी थी।
गांधी परिवार हमेशा सुरक्षित सीटें ढूंढता रहा है। जब जब आशंका हुई इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी दो दो सीटों से चुनाव लड़ते रहे। 1999 में रायबरेली से राजीव गांधी के करीबी सतीश शर्मा को चुनाव लड़वाया गया, लेकिन 2004 में अमेठी सीट राहुल गांधी को देकर सोनिया गांधी खुद अपने ससुर फिरोज गांधी की सीट रायबरेली चली गई।
पिछले चार चुनाव सोनिया गांधी रायबरेली से ही जीत रही हैं। अपनी उम्र और बीमारी की वजह से इसबार वह चुनाव नहीं लड़ना चाहती। उन्हीं के बारे में बिना नाम लिए नरेंद्र मोदी ने कहा कि वह राज्यसभा में आने का रास्ता खोज रही हैं।
अमेठी के बाद मोदी का इस बार का टारगेट रायबरेली है। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि यह परिवार जल्द ही दर्शक दीर्घा में दिखेगा। जबकि गांधी परिवार रायबरेली सीट को बचाए रखने के लिए वहां से राहुल गांधी या प्रियंका वाड्रा को चुनाव लड़ाने पर विचार कर रहा है।
एक विचार यह चल रहा है कि राहुल गांधी रायबरेली से लड़ें और प्रियंका वाड्रा को उनके चाचा संजय गांधी, पिता राजीव गांधी और भाई राहुल गांधी की सीट अमेठी से स्मृति ईरानी के सामने उतार कर अमेठी वापस छिनी जाए। अब अमेठी में स्मृति ईरानी का मुकाबला करना राहुल गांधी के बस में नहीं है। क्योंकि स्मृति ईरानी ने अपनी सीट को पहले से भी ज्यादा मजबूत कर लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद जब अजय राय ने कहा था कि राहुल गांधी अमेठी से लड़ेंगे, तो उन्हें अपना मुंह बंद रखने के लिए कह दिया गया था।
राहुल गांधी के बारे में ही मोदी ने अपने भाषण में कहा कि वह पिछली बार सीट बदल कर लोकसभा में पहुंच गए थे, इस बार फिर सीट बदलने की सोच रहे हैं। मोदी ने लोकसभा में यह बात बिना आधार के नहीं कही। कांग्रेस सर्कल में चर्चा है कि राहुल गांधी ने क्योंकि पीएफआई पर बैन का विरोध नहीं किया, इसलिए वह वायनाड से जीत नहीं सकते।
वायनाड में पीएफआई समर्थक मुस्लिमों की भरमार है, जिन्होंने पिछली बार राहुल का खुल कर समर्थन किया था। केरल की वायनाड सीट में हिन्दू 49.48 प्रतिशत हैं, मुस्लिम 29 प्रतिशत और 21 प्रतिशत ईसाई हैं। बचे खुचे आधा प्रतिशत जैन सिख आदि हैं। पिछली बार राहुल गांधी मुसलमानों के एक तरफा वोटों और ईसाईयों के समर्थन से जीत गए थे। ऐसा नहीं कि उन्हें हिन्दू वोट नहीं मिला था, उन्हें हिन्दू वोट भी मिला था, लेकिन कम।
इस बार वायनाड की तस्वीर पूरी तरह बदली हुई है। वायनाड के करीब 50 प्रतिशत हिन्दू श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर बनने से गदगद हैं। वायनाड के साथ भगवान राम का गहरा रिश्ता भी माना जाता है। जहां तक ईसाई मतदाताओं का सवाल है, तो 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस से मुलाक़ात के बाद परिस्थितियां बदली हैं। केरल के ईसाई नेता पीसी जार्ज ने अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया है। जार्ज ने भाजपा ज्वाइन करने से पहले केरल के विभिन्न चर्चों के प्रतिनिधियों से चर्चा की थी। चर्चों की सहमति के बाद ही उन्होंने भाजपा ज्वाईन की।
केरल में हिन्दू-ईसाई का नया समीकरण बन रहा है, जो सोनिया गांधी की कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है। क्योंकि केरल के ईसाईयों को कांग्रेस की रहनुमाई वाले यूडीएफ का समर्थक माना जाता रहा है। लेकिन लव जिहाद, धर्मांतरण और यूडीएफ में मुस्लिम लीग के बढ़ते दबदबे के कारण ईसाई भाजपा की तरफ झुक रहे हैं।
केरल के चर्चों के बिशपों ने भी भाजपा के साथ संपर्क बढाया है। क्रिसमस के मौके पर बिशपों की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाक़ात इसी कड़ी में हुई थी। कांग्रेस के टॉम वडकम और अनिल एंटनी भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इसलिए मुस्लिम समर्थन कर भी दें, तो भी हिन्दू ईसाई समीकरण ही राहुल गांधी को वायनाड से हरा सकता है।
नेहरू गांधी परिवार का उत्तर प्रदेश की दो सीटों के अलावा कर्नाटक से भी गहरा रिश्ता रहा है। इंदिरा गांधी कर्नाटक की चिकमंगलूर से और सोनिया गांधी कर्नाटक की बेल्लारी सीट से एक एक बार चुनाव जीत चुकी हैं। इसलिए ज्यादा संभावना यही है कि सोनिया गांधी कर्नाटक से राज्यसभा में आ सकती हैं।
राहुल गांधी न खुद को अमेठी में सुरक्षित महसूस कर रहे हैं, न वायनाड में। इसलिए ज्यादा संभावना यही है कि राहुल गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ें, लेकिन नरेंद्र मोदी के नेहरू परिवार मुक्त संसद के एजेंडे से भयभीत राहुल गांधी रायबरेली के साथ साथ कर्नाटक की किसी सीट से भी चुनाव लड़ सकते हैं।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












Click it and Unblock the Notifications