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National Film Awards: राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में तेलुगु सिनेमा का दबदबा

National Film Awards: तेलुगु सिनेमा के बारे में अक्सर ये कहा जाता है कि एक दिन वह हिंदी सिनेमा से बड़ा हो जाएगा। इस साल के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों को देखें तो ये बात बहुत हद तक सच साबित होती नजर आती है। अपनी फिल्मों के जरिए तेलुगु के फिल्मकार न केवल हिन्दी सिनेमा जगत पर छा गये हैं बल्कि इस बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में भी उन्हीं का दबदबा है। इस साल के लिए घोषित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में तेलुगु सिनेमा के लिए जश्न का माहौल बना दिया है।

मूल तेलुगु में बनी फिल्म आरआरआर को सर्वश्रेष्ठ मनोरंजक फिल्म पुरस्कार के साथ कुल 6 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले हैं। सर्वश्रेष्ठ पुरुष गायक के लिए कालभैरव को, सर्वश्रेष्ठ नृत्य निर्देशन के लिए प्रेम रक्षित को, सर्वश्रेष्ठ स्पेशल इफैक्ट्स के लिए श्रीनिवास मोहन, सर्वश्रेष्ठ बैकग्राउंड स्कोर के लिए एमएम कीरावानी और सर्वश्रेष्ठ एक्शन कोरियोग्राफी के लिए किंग सोलोमन को चुना गया है। तेलुगू के ही चंद्राबोस को सर्वश्रेष्ठ गीतकार का और तेलुगू के ही पुरुषोत्तम चारयुलू को सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक का पुरस्कार मिला है।

National Film Awards 2023 winner Telugu cinema dominates the National Film Awards

अल्लू अर्जुन तेलुगू के ऐसे पहले अभिनेता बन गए हैं, जिन्हें अभिनय के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला है। यह पुरस्कार उन्हें "मैं झुकेगा नहीं साला' फेम पुष्पा फिल्म के लिए दिया गया है। पुष्पा को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ही नहीं, सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का पुरस्कार भी मिला है, जो देवी श्री प्रसाद के हिस्से में आया है।

हालांकि सोशल मीडिया को देखकर ऐसा लग रहा है कि नेशनल फिल्म अवार्ड नहीं मानो फिल्म फेयर अवॉर्ड्स का ऐलान हुआ हो। फिल्म फेयर अवॉर्ड्स की तरह ही इतने जाने पहचाने चेहरों को नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के लिए चुना गया है कि लग ही नहीं रहा कि ये वो वाले अवॉर्ड हैं, जिनके विजेताओं के बारे में ज्यादा जानकारी पाने के लिए गूगल करके देखना पड़ता था। सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जहां पूरे भारत के चहेते 'साला झुकेगा नहीं' फेम पुष्पा यानी अल्लू अर्जुन को मिला है वहीं, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए गंगूबाई काठियावाड़ी की आलिया भट्ट और कृति सोनन को चुना गया। कृति सोनन को आदिपुरुष की सीता के लिए नहीं बल्कि 'मिमी' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला है। द नम्बी इफैक्ट के लिए सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता पंकज त्रिपाठी, तो सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेत्री चुनी गईं 'कश्मीर फाइल्स' की निवेदिता मेनन यानी पल्लवी जोशी।

सर्वश्रेष्ठ फिल्म चुनी गई माधवन की 'रॉकेट्री' तो विकी कौशल की 'सरदार ऊधम' को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म चुना गया। बेस्ट स्क्रीन प्ले का पुरस्कार 'गंगू बाई काठियावाड़ी' के लिए संजय लीला भंसाली और उत्कर्षिता के हिस्से में गया है। ऐसे में हर आइफा या फिल्म फेयर अवॉर्ड्स की तरह ऐसा लग रहा है कि कई सारी भाषाओं की कई सारी फिल्मों को झोली भर भर के मिला है और सभी जगह जश्न मनाए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में संजय लीला भंसाली की 'गंगूबाई काठियाबाड़ी' भी पीछे नहीं रही। सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और सर्वश्रेष्ठ पटकथा के पुरस्कार के साथ साथ सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक का सम्मान भी उत्कर्षिनी वशिष्ठ और प्रकाश कपाड़िया के हिस्से में आया। सर्वश्रेष्ठ फिल्म सम्पादन के लिए भी इसी मूवी के लिए संजय लीला भंसाली को चुना गया। इसी मूवी के लिए सर्वश्रेष्ठ मेकअप का पुरस्कार भी प्रीतिशील सिंह को मिला।

उसी तरह विकी कौशल की 'सरदार ऊधम' के हिस्से में भी केवल सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का ही नहीं कई और पुरस्कार भी आए, जिनमें सर्वश्रेष्ठ ऑडियोग्राफी, सिनेमेटोग्राफी, कॉस्ट्यूम डिजाइनर और प्रोडक्शन डिजाइन के लिए मिलने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार भी शामिल हैं। हिंदी से श्रेया घोषाल को भी सर्वश्रेष्ठ गायिका के लिए चुना जाना चर्चा बनी है, हालांकि उनके साथ इराविन निझाल को भी इस सम्मान के लिए चुना गया है। तो सिद्धार्थ मल्होत्रा की 'शेरशाह' को स्पेशल ज्यूरी मेंशन मिला है।

कुछ ऐसी मूवीज भी थीं, जो पिछले साल के इंटरनेशनल फिल्म अवॉर्ड्स (इफ्फी, गोवा) में भी छाई रही थीं, जैसे 'कश्मीर फाइल्स', जो निर्माताओं की बॉडीज की तरफ से गई और इंटरनेशनल ज्यूरी के प्रमुख ने उसको लेकर अपने बयान से विवाद पैदा कर दिया था। दूसरी है अल्लू अर्जुन की 'पुष्पा'। दिलचस्प बात है कि तब 'पुष्पा' भी इसी रास्ते गई थी, लेकिन उसको ज्यूरी ने नहीं चुना। तीसरी फिल्म थी, मराठी की 'गोदावरी', जिसके हीरो जितेन्द्र को इफ्फी ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना था, इस बार उनके फिल्म निर्देशक निखिल महाजन को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राष्ट्रीय सम्मान मिला है।

सर्वश्रेष्ठ उड़िया फिल्म के लिए चुनी गई 'प्रतिक्ष्या' इफ्फी में भी इंडियन पैनोरमा की सर्वश्रेष्ठ 20 फिल्मों में चुनी गई थी। उसी तरह सर्वश्रेष्ठ गुजराती फिल्म के तौर पर चुनी गई 'छेल्लो शो' को पिछले साल ऑस्कर के लिए भारत की एंट्री के तौर पर भेजा गया था, तब विवाद हुआ था, उसके हीरो भाविन को भी सर्वश्रेष्ठ बाल अभिनेता चुना गया है।

अहमदाबाद के फिल्मकार मनीष सैनी ने बच्चों के लिए एक फिल्म बनाई थी 'गांधी एंड कम्पनी', काफी तारीफ होने के बावजूद इस फिल्म को कोई पुरस्कार ना मिलना चौंका रहा था, इस बार के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में इसे सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म के तौर पर चुना गया है। इसी तरह पिछले साल इफ्फी की ज्यूरी के बीच चर्चित रही आसामी फिल्म 'अनुनाद' को इस बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सामाजिक मुद्दों पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म चुना गया है।

गैर फीचर फिल्मों में सर्वश्रेष्ठ फिल्म के तौर पर 'एक था गांव' को चुना गया है, जबकि सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के तौर पर इस श्रेणी में बनी 'स्माइल प्लीज' के निर्देशक बकुल मटियानी को सम्मान के लिए चुना गया है। तीन ज्यूरी बनाई गई थीं, जिनमें केतन मेहता फीचर फिल्मों की ज्यूरी के प्रमुख थे, गैर फीचर फिल्मों की ज्यूरी के प्रमुख वसंत एस साई, व सिनेमा पर लेखन की ज्यूरी के प्रमुख यतिन्द्र मिश्रा थे।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा के साथ उत्तर से लेकर दक्षिण तक, पूर्व से पश्चिम तक फिल्मकारों में जश्न मनाने की ही खबरें आ रही हैं। खासतौर पर दक्षिण से जहां से आरआरआर, पुष्पा और रॉकेट्री के चलते अल्लू अर्जुन, माधवन, जूनियर एनटीआर, रामचरण आदि के प्रशंसक जश्न मना रहे हैं। बंगाली सिनेमा के किसी बड़े चेहरे को राष्ट्रीय पुरस्कार ना मिलना कल को विवाद का विषय हो सकता है, हालांकि पिछले साल इफ्फी में बंगाली फिल्में छाई रहीं।

कई बार ऐसा हुआ है कि नेशनल अवॉर्ड्स में बड़े बड़े विवाद हुए हैं। मोदी सरकार में केवल एक बार ऐसा हुआ जब 2018 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एक घंटे के लिए ही रुके, तो 50 पुरस्कार विजेताओं ने उनके हाथ से सम्मान ना मिलने पर पत्र लिखकर नाराजगी जताई। एक वक्त था जब 'हम तुम' के लिए सैफ अली खान को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान मिला तो लोग इसलिए गुस्सा हुए क्योंकि उनकी मां शर्मिला टैगोर सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष थीं। 'शहीद भगत सिंह' के लिए अजय देवगन को चुना गया तो अडूर गोपालकृष्णन ने ऐतराज किया क्योंकि उनको 'गंगाजल' में डायरेक्ट कर रहे प्रकाश झा उस साल ज्यूरी में थे। 2001 में तो अनिल कपूर और रवीना टंडन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता अभिनेत्री चुने जाने पर कई ज्यूरी सदस्यों ने ही ऐतराज जता दिया था। उससे पहले के सालों में भी काफी विवाद रहे हैं।

लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। अगर कश्मीर फाइल्स को राष्ट्रीय एकता के लिए नरगिस दत्त पुरस्कार दिये जाने पर उमर अब्दुल्ला द्वारा किया गया व्यंग किनारे कर दें तो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में वैचारिक पूर्वाग्रह की बजाय फिल्म की कलात्मकता को ही ध्यान में रखा गया है। इसलिए इसमें एक ओर कश्मीर फाइल्स को पुरस्कार मिला है तो दूसरी ओर सरदार ऊधम को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म के लिए चुना गया है। अगर कश्मीर फाइल्स पर वैचारिक पूर्वाग्रह का आरोप था तो सरदार ऊधम को भी वाम विचारधारा वाली फिल्म बताया जा रहा था। लेकिन राष्ट्रीय पुरस्कारों में इन बातों को कोई महत्व नहीं दिया गया।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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