Kamal Nath: कमलनाथ को गुस्सा क्यों आता है?

Kamal Nath: तीन पीढ़ियों को नेतृत्व दे चुके कांग्रेस के वेटरन नेता कमलनाथ को आजकल गुस्सा बहुत आ रहा है। कभी वह खीज में अपने ही वरिष्ठ साथी दिग्विजय सिंह का कपड़ा फाड़ने को कहते हैं, तो कभी सपा प्रमुख को अखिलेश वखलेश कह कर झल्ला उठते हैं। हमेशा हंस कर बात करने वाले आखिर कमलनाथ इतने गुस्से में क्यों हैं।

जानकार कहते हैं कि कमलनाथ इस बार अपनी जिंदगी के राजनीतिक मोर्चे पर आखिरी लड़ाई लड़ रहे हैं। अबकि चुके तो फिर कभी नहीं के मुहाने पर खड़े हैं। उम्र का सातवां दशक पार कर चुके हैं। 76 साल के हो चुके हैं। एक बार भले ही उन्हें मुख्यमंत्री का पद मिल गया, पर इतने कम समय के लिए कि शासन करने की प्यास बुझने के बजाय और भड़क गयी है। ऊपर से फिर एक बार कांग्रेस के भीतर और बाहर दोनों से उनको परेशान करने वाली ख़बरें आ रही हैं।

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शिवपुरी के एक नेता को टिकट नहीं दिए जाने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपने सहयोगी दिग्विजय सिंह के 'कपड़े फाड़ने' के लिए कहने वाले कमल नाथ दरअसल दिग्गी राजा की गुगली से परेशान थे। अभी टिकट बंटवारे का काम बीच में ही था कि दिग्विजय सिंह ने अपने इस्तीफे का पत्र मीडिया में लहरा दिया। जाहिर है कि उससे जुड़े सारे सवाल कमलनाथ की ओर ही मोड़ दिए गए हैं। क्योंकि दिग्गी राजा ने बाहर यह संदेश दे ही दिया कि पार्टी में दरार है।

मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस और भाजपा में सीधी लड़ाई है और इस लड़ाई में कांग्रेस किसी भी कमजोड़ कड़ी को छोड़ना नहीं चाहती। पर अब जो सर्वे आ रहे हैं, उसमें कमलनाथ और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच की लड़ाई का कांग्रेस की संभावनाओं पर असर पड़ता दिखाया जा रहा है। कमलनाथ इस बार कोई और 'सिंधिया' नहीं चाहते। 2018 में यही स्थिति ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भी थी। अब सिंधिया बीजेपी में हैं पर उनका उदाहरण कांग्रेस के साथ ही चिपका हुआ है।

कमलनाथ कांग्रेस के कुछ उन गिने चुने नेताओं में हैं, जिन्हे गाँधी परिवार की तीन पीढ़ियों के साथ काम करने का अवसर मिला है। इंदिरा गाँधी कभी उन्हें अपना तीसरा बेटा कहा करती थी। वह जितने संजय गाँधी के करीबी थे, उतने ही उनके बड़े भाई राजीव के भी। वह बचपन से ही गांधी परिवार के काफी करीब रहे हैं।

कमल नाथ सोनिया गांधी और राहुल गाँधी के भी विश्वासपात्र बने हुए हैं। वह 1980 में अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ चुके है तब से लगातार कांग्रेस उन्हें प्रमुख पदों पर बिठाती रही है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे कमलनाथ के 30 से ज्यादा कंपनियों में शेयर हैं। उनकी निजी सम्पति 200 करोड़ रुपए से अधिक की है।

इतना सब कुछ होने के बावजूद कमलनाथ आश्वस्त नहीं हैं, क्योंकि मध्य प्रदेश में इंडिया गठबंधन पूरी तरह से बिखर गया है। सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच जुबानी जंग रोज तेज हो रही है। अखिलेश यादव कांग्रेस को धोखेबाज पार्टी तक कह चुके हैं। उत्तरप्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय सपा पर भाजपा की मदद करने का आरोप लगा रहे हैं। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल 'मामा' के बदले चाचा बनकर चुनाव में उतर चुके हैं। और सबसे बड़ी बात कि 2003 से ही बीजेपी शासन होने के बावजूद मैदान पकड़ कर बैठी हुई है।

सभी सर्वे में यही बात सामने आ रही है कि मोदी की भाजपा सत्ता के रेस में अब भी पीछे नहीं है। दो दिन पहले इंडिया टीवी-सीएनएक्स ओपिनियन पोल में यह दिखाया गया है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब भी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है और 116 सीटों का जादुई आंकड़ा भी छू सकती है।

वोट शेयर में भी भाजपा को सबसे अधिक 44.38 प्रतिशत मत पाते हुए दिखाया गया है। कांग्रेस को 42.51 प्रतिशत वोट मिल रहे हैं। सर्वेक्षण में शिवराज सिंह चौहान 44.32 प्रतिशत लोगों ने फिर से नेतृत्व देने को कहा है तो कांग्रेस प्रमुख कमल नाथ को 38.58 प्रतिशत लोगों ने। अगर यह सही होता है तो कमलनाथ का गुस्सा होना समझा जा सकता है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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