Morbi Bridge Collapse: क्या लालच लील गया डेढ सौ जिंदगियां?
Morbi Bridge Collapse: गुजरात के मोरबी में मच्छू नदी पर बना 143 साल पुराना केबल पुल रविवार शाम 06:30 बजे टूट गया। मोरबी पुल के टूटने से आशंका है कि 150 से अधिक लोगों की मौत हुई है और कई लोग लापता हैं। मृतकों में 25 बच्चे भी शामिल हैं। 170 से अधिक लोगों को बचाया गया है। गुजरात सरकार के अधिकारियों के अनुसार जब पुल टूटा तो उस पर सैकड़ों लोग खड़े थे।
कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि मोरबी सस्पेंशन पुल की क्षमता 100 लोगों की है लेकिन रविवार की छुट्टी होने के चलते इस पर 400 से अधिक लोग पहुंच गए थे।

चश्मदीदों का यह भी कहना है कि पुल पर करीब 1,000 लोग थे जिसके चलते पुल भार सहन नहीं कर पाया तो बीच से टूट गया। बचाव एवं राहत कार्यों के लिए सेना, नेवी, एयरफोर्स, एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, एसडीआरएफ की टीमें जुटी हुई हैं। हालांकि नदी में कीचड़ व मटमैले पानी की अधिकता होने से बचाव कार्यों में परेशानी हो रही है।
143 साल पुराना है ब्रिज
मोरबी का यह सस्पेंशन ब्रिज 143 साल पुराना है। लकड़ी और तारों से बना यह पुल 233 मीटर लंबा और 4.6 फीट चौड़ा है। ब्रिज का निर्माण मोरबी के राजा सर वाघजी ठाकोर की रियासत के दौरान हुआ था जिसका उद्घाटन 20 फरवरी, 1879 को मुंबई के गवर्नर रिचर्ड टेम्पल ने किया था। ब्रिज उस समय लगभग 3.5 लाख की लागत से बनकर तैयार हुआ था और इसे बनाने का पूरा सामान इंग्लैंड से मंगाया गया था।
ब्रिटिश इंजीनियरों द्वारा बनाए गए इस पुल को उन्नत इंजीनियरिंग का जीता जागता नमूना माना जाता था। तत्कालीन समय में राजमहल से राज दरबार तक जाने के लिए स्थानीय राजा इसी पुल का इस्तेमाल करते थे। राजशाही खत्म होने के बाद इस पुल की जिम्मेदारी मोरबी नगर पालिका को सौंप दी गई थी। पिछले सौ साल में कई बार इसका रेनोवेशन किया जा चुका है। हाल ही में दिवाली से पहले इसकी मरम्मत का काम 2 करोड़ की लागत से किया गया था। इस सस्पेंशन ब्रिज को गुजरात के पर्यटन विभाग ने भी अपनी पर्यटन सूची में स्थान दिया है।
क्या लालच लील गया जिंदगियां?
मोरबी का केबल ब्रिज पिछले दो वर्षों से बंद था। यह ब्रिज मोरबी नगरपालिका की संपत्ति है लेकिन मार्च, 2022 में नगरपालिका ने 15 वर्षों तक इसके संचालन और रखरखाव का जिम्मा मोरबी के ओरेवा ग्रुप (अजंता मेन्युफेक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड) को दे दिया था। ब्रिज के रिनोवेशन के काम के बाद इसे 26 अक्तूबर को गुजराती नववर्ष से आम जनता के लिए खोल दिया गया था लेकिन इसकी जानकारी नगरपालिका को नहीं दी गई।
यही कारण था कि नगरपालिका ने इसे जांच कर इसका फिटनेस सर्टिफिकेट भी जारी नहीं किया था। ब्रिज का सेफ्टी ऑडिट भी नहीं हुआ था। ओरेवा ग्रुप ब्रिज पर आने वाले पर्यटकों को टिकट बेचकर इसकी सैर करवा रहा था। वयस्कों के लिए टिकट का मूल्य 17 रुपये था और बच्चों की टिकट 12 रुपये में बेची जा रही थी। ब्रिज की क्षमता यदि 100 व्यक्ति थी तो सरकारी आंकड़ों के अनुसार 400 से अधिक लोग टिकट लेकर ब्रिज तक कैसे पहुंचे? सरकारी दावा यह है कि ओरेवा ग्रुप पैसों के लालच में लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करता रहा।
गैर-इरादतन हत्या का केस और मुआवजे का एलान
मोरबी ब्रिज हादसे के बाद गुजरात सरकार ने जांच समिति का गठन कर दिया है वहीं पुल के रखरखाव और एमजीएमटी एजेंसियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या), 308 (गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास) और 114 (अपराध होने पर उपस्थित होने वाला) के तहत मामला दर्ज किया गया है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने हादसे में मरने वालों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये के मुआवजे का एलान किया है, वहीं घायलों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की है।
भाजपा सांसद ने खोये 12 पारिवारिक सदस्य
मोरबी ब्रिज हादसे में राजकोट से भाजपा सांसद मोहन कुंदरिया की बहन के परिवार के 12 सदस्यों की मौत हो गई है जिनमें बहन के पति के भाई की चार बेटियाँ, 3 दामाद और 5 बच्चे शामिल हैं। सांसद मोहन कुंदरिया रविवार शाम से ही मोरबी में बचाव और राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।
कांग्रेस ने स्थगित की सद्भावना यात्रा, मोदी ने नहीं किया रोड शो
मोरबी में हुए ब्रिज हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केवडिया में रोड शो को स्थगित कर दिया वहीं कांग्रेस की गुजरात इकाई ने भी आज से निकाली जाने वाली सद्भावना यात्रा स्थगित कर दी। राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा में मोरबी हादसे में जान गंवाने वालों के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी मोरबी पहुँच रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे ने मोरबी हादसे की निष्पक्ष जांच की मांग की है। आम आदमी पार्टी ने भी गुजरात में अपने आज के सभी कार्यक्रमों को रद्द कर दिया है।
एक बार फिर याद आया 1979 का खौफनाक मंजर
11 अगस्त, 1979 को लगातार हो रही भारी बारिश से मच्छू नदी पर बना बाँध टूट गया था। दोपहर करीब सवा तीन बजे बाँध टूटा तो मोरबी को आधे घंटे में तबाह कर गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि किसी को सँभलने का मौका ही नहीं मिला। इस आपदा में 1,500 से अधिक लोगों की जान गई थी।
जब पानी का स्तर कम हुआ तो लाशों से शहर पटा पड़ा था और इमारतें मलबे का ढेर बन चुकी थीं। सड़ती हुई लाशों के बीच बचाव कार्य करना मुश्किल हो रहा था और लोग बीमार हो रहे थे। इस भीषण आपदा के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी जब मोरबी आई थीं तो लाशों की दुर्गन्ध से उन्हें नाक पर रूमाल रखना पड़ा था।
एक बार फिर ब्रिज दुर्घटना के बाद मोरबी की जनता स्तब्ध है। दिवाली व गुजरात नव वर्ष उत्सव के तुरंत बाद आई इस आपदा ने सैकड़ों परिवारों को शोक में डूबो दिया है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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