Morbi Bridge Tragedy: सरकारी व्यवस्था और कंपनियों के लालच पर सवाल उठाता मोरबी हादसा
Morbi Bridge Tragedy: मोरबी पुल हादसे में घायल लोगों का हाल चाल जानने के लिए प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार को मोरबी के सिविल अस्पताल गये थे। उनके दौरे से पहले जिस तरह रातों रात अस्पताल की मरम्मत वाली बात सामने आयी उससे एक बार फिर उसी सिस्टम पर सवाल खड़ा होता है जिस पर मोरबी पुल हादसे के बाद से ही सवाल उठ रहा है।

क्या सरकारी सिस्टम की जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन के शीर्ष पर बैठे लोगों के सामने ही बेहतर प्रदर्शन करना है या फिर उसकी जनता के प्रति भी कोई जवाबदेही है? सवाल यह भी है कि मोरबी में जो हुआ, क्या उसे प्रशासनिक लापरवाही की श्रेणी में ही रखा जा सकता है?
भारतीय जनता पार्टी की मौजूदा ऐश्वर्य गाथा की बुनियाद गुजरात ही है, जहां पिछले 27 सालों से पार्टी सत्ता में काबिज है। गुजरात की सफलता की कहानियों और उसके प्रशासनिक-आर्थिक मॉडल ने ही देश को पहले चमत्कृत किया और आठ साल पहले वह चमत्कार इतना प्रभावी हुआ कि भारतीय जनता पार्टी देश के शीर्ष पर जा पहुंची। लेकिन गुजरात की बुनियाद पर रची गई सफलता की इस राजनीतिक कहानी पर भाजपा विरोधी राजनीतिक दलों के साथ ही मुखालफत करने वाले नैरेटिव निर्माताओं की भी निगाह है।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या इन तथ्यों की तरफ गुजरात की सत्ता पर सत्ताइस सालों से काबिज भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का ध्यान नहीं है? क्या उन्हें इस तथ्य की समझ नहीं है कि ऐन चुनावों के ठीक पहले ऐसे जानलेवा हादसों से गुजरात के इस्पाती सत्ता मॉडल में ऐसी दरार पड़ सकती है, जिसे आसानी से पाटा नहीं जा सकता। सवाल तो यह भी उठता है कि क्या सत्ताइस साल की सत्ता की सफल यात्रा के बाद भाजपा सत्ता सुख की इतनी आदी हो गयी है कि वह अपने पैनेपन को खो रही है?
हो सकता है कि इन दोनों ही सवालों के जवाब ना में ही हों। मोरबी हादसे की जांच के लिए बनी समिति जब अपनी रिपोर्ट देगी तो इन प्रश्नों के उत्तर मिल जाएंगे। लेकिन तब तक देर हो चुकी होगी। मोरबी या गुजरात का तंत्र यह कैसे भूल गया कि राज्य की सत्ता की ताक में बैठी या बुनियाद में ही भाजपा को पटखनी देने की कोशिश करने वाली ताकतें ऐसे हादसों का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश नहीं करेंगी?
मोरबी का हादसा अतिनिजीकरण की अवधारणा का साइड इफेक्ट भी कहा जा सकता है। मच्छू नदी पर बने 143 साल पुराने इस पुल को पिछले दो साल से बंद रखा गया था। ताकि पुराने पुल की मरम्मत की जा सके। इसे महज छह दिन पहले गुजराती नववर्ष के दिन खोल दिया गया। हालांकि इसके फिटनेस आदि के प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए थे। इस पुल के रख-रखाव और संचालन का जिम्मा मोरबी के ओरेवा ग्रुप (अजंता मेन्युफेक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड) को दिया गया है।
इस पुल पर एक बार में सौ लोगों का भार सहने की क्षमता है। लेकिन जिस वक्त हादसा हुआ, प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि चार सौ से ज्यादा लोग पुल पर ना सिर्फ मौजूद थे, बल्कि उस पर हिचकोले लेकर आनंद उठा रहे थे। चूंकि यह झूला पुल है, इसलिए यहां लोग पार उतरने की बजाय उस पर झूलकर आनंद उठाने के लिए आते थे। सवाल यह है कि जिस पुल की क्षमता सौ लोगों को झेलने की है, उस पर चार सौ लोगों का पहुंचना क्या निजी कंपनी की लापरवाही नहीं है?
यह सच है कि निजीकरण की अवधारणा को बल सरकारी तंत्र की लालफीताशाही, भ्रष्टाचार और अकर्मण्यता के चलते मिला है। आज भी सरकारी सिस्टम में कार्यरत लोग एक बार नियमित होने के बाद खुद को सरकार मानने लगते हैं।
मेहनत और गंभीरता से काम नहीं करना और नियमित अंतराल पर वेतन-भत्ते और दूसरी सहूलियतें हासिल करते रहना ही उनका उद्देश्य होता है। जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी और कार्यशीलता और निष्ठा कहीं पीछे छूट जाती है। थोड़े असहज करने वाले शब्दों में कहें तो सरकारी तंत्र के कर्मचारी एक बार नियमित होने या प्रोबेशन अवधि बीतने के बाद खुद को देश का दामाद समझने लगते हैं।
यही वजह है कि आज ज्यादातर जगहों पर निजीकरण को बढ़ावा मिल रहा है। निजीकरण के बारे में मान्यता रही है कि वह ज्यादा मेहनत से काम करता है और फिजूलखर्जी पर रोक लगाता है। इसके साथ ही वह आर्थिक रूप से ज्यादा सक्षम होता है।
लेकिन मोरबी जैसी घटनाएं बताती हैं कि अतिनिजीकरण का मकसद व्यवस्था को बनाए रखने से ज्यादा कमाई पर फोकस करना होता है। निजीकरण के पीछे दरअसल जो मुनाफाखोरी की मानसिकता है, वह लोक कल्याण और व्यापक हित की भावना पर भारी पड़ती है।
मोरबी हादसे ने यह भी सबक दिया है कि ब्यूरोक्रेसी और शासन तंत्र पर अति भरोसा भी लोकतंत्र की जनार्दन कही जाने वाली जनता पर भारी पड़ता है। हर जगह नौकरशाही, तंत्र और निजीकरण के बढ़ते वर्चस्व पर भी यह हादसा बड़ा सवाल बनकर सामने खड़ा हो चुका है।
चूंकि हादसे में डेढ़ सौ के करीब जानें जा चुकी हैं, इसलिए अभी गुजरात के विपक्षी दल राज्य सरकार और भारतीय जनता पार्टी की खिंचाई नहीं कर रहे हैं। सवाल भी नहीं उठा रहे हैं।
लेकिन यह तय है कि अगर एक बार चुनावों की घोषणा हो गई तो कांग्रेस के साथ ही आम आदमी पार्टी इस मसले पर हमलावर होगी। तब मोरबी हादसे के लिए राज्य की सत्ताधारी पार्टी को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर हर चुनाव में उतरने वाली भारतीय जनता पार्टी को भले ही कुछ राहत मिल जाए, लेकिन यह भी तय है कि जिन घरों के चिराग पानी में डूबकर बुझ गए हैं, वे भाजपा की सफाई को शायद ही स्वीकार कर पाएं...उनके रिश्तेदार भी शायद ही इस गमजदा दृश्य को भूल पाएं। इसलिए इस हादसे का असर गुजरात चुनावों पर सीमित ही सही, जरूर पड़ेगा।
यह भी पढ़ें: Morbi Bridge Collapse: क्या लालच लील गया डेढ सौ जिंदगियां?
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
-
मौत से हुआ सामना? दुबई से हैदराबाद लौटीं सानिया मिर्जा, आपबीती सुनाते हुए बयां किया दर्द -
US Iran War: ईरान के हमलों के आगे बेबस Trump, हटाना पड़ा 100 साल पुराना कानून, अमेरिका में तेल-गैस की किल्लत? -
Iran Vs America: ईरान के बाद अब चीन पर कहर बनकर टूटेंगे ट्रंप! अमेरिकी रिपोर्ट के खुलासे से हड़कंप -
Parliament session: 'मोहब्बत हमसे, शादी मोदी से', राज्यसभा में बोले खड़गे, वायरल हुआ PM का रिएक्शन -
'वो मर्द शादीशुदा था, मैं उसके प्यार में पागल थी', फिर मिला ऐसा दर्द, 83 की उम्र में कुंवारी हैं ये एक्ट्रेस -
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच लगातार गिर रहे सोने के भाव, अब 10 ग्राम की इतनी रह गई है कीमत, नए रेट -
UGC के नए नियमों पर आज फैसले की घड़ी! केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में देगी सफाई -
Saudi Arabia Eid Ul Fitr 2026 : सऊदी अरब में 20 मार्च को मनाई जाएगी ईद, भारत में कब दिखेगा चांद? -
Gold Rate Today: थमी सोने की रफ्तार, कीमतों में जबरदस्त गिरावट! खरीददारी से पहले चेक कर लें लेटेस्ट रेट -
Silver Price Today: चांदी की कीमतें क्रैश! मार्च महीने में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट, कितना हुआ सिल्वर का रेट? -
Iran US War: 'खुद भी डूबेंगे सनम तुम्हें भी ले डूबेंगे', ट्रंप पर भड़के बक्शी, कहा- Trump ने जनता से झूठ बोला -
PNG Connection: गैस संकट के बीच सबसे बड़ी गुड न्यूज! सिर्फ 24 घंटे में खत्म होगी किल्लत, सरकार ने उठाया ये कदम












Click it and Unblock the Notifications