मोदी के इंटरव्यू की इतनी चर्चा क्यों है?
Modi Interview: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मीडिया के सवालों से बचने के लिए प्रेस कांफ्रेंस नहीं बुलाते, जबकि उनके पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह हर साल एक प्रेस कांफ्रेंस करते थे| अटल बिहारी वाजपेयी तो संसद के कोरिडोर से गुजरते हुए चार पत्रकार देख कर रुक जाया करते थे, और हंसी मजाक करते हुए उनके सवालों के जवाब भी दे दिया करते थे|
वाजपेयी संसद सत्र के दौरान एक सदन से दूसरे सदन में जाते हुए रास्ते में सेंट्रल हाल में पत्रकारों से हालचाल पूछ लिया करते थे| अक्सर पत्रकारों को पीएम आवास पर बुला कर भोजन की मेज पर चर्चा भी किया करते थे, राष्ट्रपति भवन में होने वाले समारोहों में भी पत्रकारों से बातचीत किया करते थे| उनसे पहले इंद्रकुमार गुजराल और नरसिंह राव भी पत्रकारों से ऐसे ही घुलते मिलते और राजनीतिक सूचनाओं का आदान प्रदान करते थे|

नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही मीडिया को विदेशी दौरों पर साथ ले जाना बंद कर दिया, उनकी जगह पर उद्योगपति जाने लगे, उद्योगपति पहले भी जाते थे, लेकिन इंडस्ट्री एसोसिएशन के बैनर तले अपने आप पहुंचते थे| मोदी ने सालाना प्रेस कांफ्रेंस भी बंद कर दी थी।
2019 के चुनाव में पहली बार मोदी ने कुछ चुनिन्दा अखबारों, और चुनिन्दा न्यूज चैनलों को इंटरव्यू दिया था, लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने शायद ही ऐसा कोई नामी मीडिया ग्रुप होगा, जिसे उन्होंने इंटरव्यू नहीं दिया हो| हर इंटरव्यू में उन्होंने खुल कर जवाब भी दिए| उनमें से कई इंटरव्यू चर्चा का विषय भी बने, जिनमें उन्होंने उन सवालों के जवाब दिए, जिनके जवाब देने के लिए भारतीय जनता पार्टी के नेता भी बिदकते हैं|

नरेंद्र मोदी पर विपक्ष का आरोप है कि 19 अप्रेल को पहले चरण की वोटिंग के बाद जब उन्हें फीडबैक मिला कि जनता में कोई उत्साह नहीं है, वोटिंग कम हुई है और भाजपा की सीटें घट रही हैं, तो उन्होंने अपने भाषणों में हिन्दू-मुस्लिम करना शुरू कर दिया है| हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले चरण की वोटिंग से पहले ही कांग्रेस के चुनाव घोषणापत्र को मुस्लिम लीग का चुनाव घोषणा पत्र कह कर कांग्रेस को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया था। लेकिन पहले चरण की वोटिंग के दो दिन बाद 21 अप्रेल को नरेंद्र मोदी ने बांसवाडा में कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र के उस अंश को उठाया, जिसमें देश के हर नागरिक की सम्पत्ति का डाटा तैयार करके रि-डिस्ट्रीब्यूशन की बात कही थी|
राहुल गांधी ने 6 अप्रेल को हैदराबाद में अपनी इस योजना को विस्तार से बताया था| ठीक उसी समय ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष और राहुल गांधी के राजनीतिक गुरु सैम पित्रोदा ने अपने एक इंटरव्यू में इस योजना को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि किसी के मरने के बाद उसकी सारी संपत्ति उसके वारिसों को नहीं मिलनी चाहिए, उसकी संपत्ति का कुछ हिस्सा राष्ट्रीय कोष में जाना चाहिए, जो समाज के बाकी लोगों के काम आए| उन्होंने अमेरिका के कुछ राज्यों का उदाहरण दिया, जहां किसी के मरणोंपरांत उसकी 55 प्रतिशत संपत्ति टैक्स के रूप में सरकार के पास चली जाती है|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2006 में मनमोहन सिंह के भाषण को कांग्रेस की टैक्स थ्योरी के साथ जोड़कर कहा कि कांग्रेस महिलाओं के मंगलसूत्र तक छीनकर ज्यादा बच्चे पैदा करने वालों और घुसपैठियों में बांट देगी| नरेंद्र मोदी की ओर से कांग्रेस पर मुसलमानों को लेकर किया गया यह पहला हमला था| मनमोहन सिंह ने 2006 में कहा था कि भारत के संसाधनों पर पहला हक अल्पसंख्यकों का है, और अल्पसंख्यकों में से भी मुसलमानों का| मनमोहन सिंह का यह बयान पिछले 18 साल से कांग्रेस के गले में हड्डी की तरह अटका हुआ है, जिसे कांग्रेस न निगल सकती है, न उगल सकती है|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जब लगा कि उनका सबका साथ, सबका विकास, और सबका विश्वास वाला फार्मूला फेल हो गया है, और मुसलमान एकतरफ़ा भाजपा के खिलाफ ही वोट कर रहे हैं, तो 21 अप्रेल के बाद से उनके सब्र का प्याला भरा हुआ दिखाई दे रहा है, क्योंकि उसके बाद उन्होंने अपने अनेक भाषणों में हिन्दू-मुस्लिम किया है| विपक्ष इस मुद्दे को बार बार उठा रहा है, जबकि विपक्ष खुद भी मुसलमानों को भाजपा के खिलाफ भड़काने का काम करता रहता है| कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद की भतीजी का मुसलमानों के बीच दिया गया भाषण वायरल हुआ है, जिसमें वह मुसलमानों को भाजपा के खिलाफ वोट जेहाद करने की बात कह रही हैं|
लालू प्रसाद यादव ने सभी मुसलमानों को नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की बात कही है| जबकि संविधान सभा ने धर्म के आधार पर आरक्षण को लगभग सर्वसम्मति से यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि यह सेक्यूलरिज्म के सिद्धांत के खिलाफ होगा| लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह हिन्दू-मुस्लिम करना शुरू किया है, उस तरह आजतक मनमोहन सिंह के एक भाषण के अलावा किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया था| इंटरव्यू में उनसे इस पर सवाल भी पूछे जाने लगे हैं, जिनसे वह कई बार असहज होते है| लेकिन हाल ही के एक इंटरव्यू में जब उनसे इस पर सवाल पूछा गया, तो उनका यह दर्द उनकी जुबान पर आ गया कि मुस्लिम भाजपा से दूरी क्यों बनाए हुए हैं|
मोदी कहते हैं कि उन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए जितनी भी योजनाएं बनाई, क्या उनका फायदा सिर्फ हिन्दुओं को मिला। क्या प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना पर सिर्फ हिन्दू चलते हैं, क्या अस्पतालों में सिर्फ हिन्दू जाते हैं, क्या आयुष्मान योजना का फायदा सिर्फ हिन्दुओं को मिल रहा है| क्या रसोई गैस कनेक्शन सिर्फ हिन्दुओं को फ्री में मिले है, क्या राशन सिर्फ हिन्दुओं को फ्री मिल रहा है| फिर मुसलमान उनका विरोध क्यों करते हैं? क्या सिर्फ इसलिए क्योंकि विपक्षी दल उन्हें भाजपा के खिलाफ झूठे प्रचार से भड़काते हैं|
इस इंटरव्यू में उन्होंने मुसलमानों को सीधा संबोधित करते हुए कहा कि "वे आत्ममंथन करें, सोचें कि कांग्रेस के जमाने में सरकार की योजनाओं का फायदा उन्हें क्यों नहीं मिला, मुसमान सोचें कि वे कांग्रेस के काल खंड में दुर्दशा का शिकार हुए या नहीं| उन्होंने कहा कि मुसलमानों के दिमाग में जो यह बैठा हुआ है कि वही सत्ता में बिठाएंगे, वही सत्ता से हटाएंगे, इससे वे अपना और अपने बच्चों का ही भविष्य खराब कर रहे हैं| दुनिया भर में मुसलमान बदल रहा है, मुस्लिम देश योग पर रिसर्च कर रहे हैं, सउदी अरब में योग पढाई में शामिल है, लेकिन भारत में अगर वह योग की बात करते हैं, तो कहा जाता है कि योग मुस्लिम विरोधी है| योग को भारत में हिन्दू मुसलमान बना दिया गया है|"
उन्होंने कहा- "मुसलमानों को अपने बच्चों की जिन्दगी के बारे में सोचना चाहिए, अपने बारे में सोचना चाहिए, वे (कांग्रेस के) बंधुआ मजदूरों की तरह जिन्दगी जी रहे हैं, क्योंकि उन्हें कोई (भाजपा से) डरा रहा है| मोदी ने मुसलमानों से आह्वान किया कि वे भाजपा के दफ्तरों में जाना शुरू करें, तब उन्हें सच्चाई का पता चलेगा|" मोदी के इस जवाब से स्पष्ट है कि उनका असली दर्द यह है कि कांग्रेस ने उनका सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास वाला प्रयास विफल कर दिया है| वह मुसलमानों का विश्वास जीतने में विफल रहे हैं|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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