MBBS in Hindi: ग्रामीण भारत के लिए वरदान साबित होगी हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई
MBBS in Hindi: यदि आपसे कोई कहे कि फलां व्यक्ति 'चिकित्सा और जैव विज्ञान में परास्नातक' अथवा 'औषधि स्नातक शल्यचिकित्सा' है तो आप अचरज में पड़ जायेंगे कि भला यह कौन सी पढ़ाई हुई? किन्तु अब आपको इस अचरज से बाहर निकलना होगा क्योंकि अब एमबीबीएस यानि बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी की पढ़ाई हिन्दी भाषा में होगी और भविष्य में हो सकता है एमबीबीएस पढ़कर चिकित्सक बनने वालों को आपको इन्हीं नामों से संबोधित करना पड़े।

मध्य प्रदेश देश का प्रथम राज्य बन गया है जहाँ चिकित्सा (मेडिकल) की हिन्दी भाषा में पढ़ाई को न सिर्फ मान्यता मिली है वरन हिन्दी में पाठ्यक्रम की पुस्तकें भी तैयार हो चुकी हैं। यही नहीं, इससे उत्साहित मध्य प्रदेश सरकार अब इंजीनियरिंग भी हिन्दी में करवाने को तैयार है और जल्द ही 6 इंजीनियरिंग और 6 पॉलिटेक्निक कॉलेजों में हिन्दी में पढ़ाई शुरू की जाएगी। इसके अलावा राज्य में आईआईटी और आईआईएम में भी हिन्दी में शिक्षा शुरू करने की कवायद शुरू हो चुकी है।
चिकित्सा में हिन्दी पाठ्यक्रम के प्रयोग की मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आई है। हिन्दी भाषा का परचम लहराते देखने वाले इस कदम को भाषाई गुलामी से मुक्ति का महापर्व कह रहे हैं वहीं चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कई चिकित्सक इसकी निंदा करते हुए चिकित्सा शिक्षा को 19वीं सदी में ले जाने की बात कह रहे हैं। चूँकि अब चिकित्सा शिक्षा के हिन्दी पाठ्यक्रम को मान्यता प्राप्त हो चुकी है तो इस बहस में पड़ना मूर्खता होगी कि यह सही हुआ या गलत क्योंकि अब इसका निर्धारण भविष्य करेगा किन्तु राष्ट्रीय अस्मिता को सर्वोपरि मानने वालों में प्रसन्नता और उत्साह की लहर है।
पिछले 32 वर्ष से हिन्दी में चिकित्सा की पढ़ाई के लिए आंदोलन चला रहे इंदौर के डॉ. मनोहर लाल भंडारी सेवानिवृत सहायक प्राध्यापक होने के साथ ही मध्यप्रदेश की हिन्दी अनुवाद के लिये बनी उच्चस्तरीय समिति के सदस्य भी हैं। डॉ. भंडारी के नाम लगभग 6 हजार चिकित्सकों की फौज को खड़ी करने का इतिहास है। यहाँ तक कि डॉ. भंडारी ने अपनी परास्नातक (एमडी) का शोध प्रबंधन भी हिन्दी में प्रस्तुत किया था जिसके लिये उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ा था।
यह मामला उस समय समूचे देश में सुर्खियों में आया था। उक्त शोध प्रबंधन कार्य पर उन्हें उतर प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने 31 अक्तूबर, 1998 में सम्मानित किया जिसके मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. मुलायम सिंह यादव थे। डॉ. मनोहर लाल भंडारी ने 28 अक्तूबर, 1991 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. सुंदर लाल पटवा को ज्ञापन दिया और एमबीबीएस की शिक्षा हिन्दी में देने का मुद्दा उठाया। 1994 में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्व. अर्जुन सिंह को पत्र लिखा जिसका उत्तर आया कि यह राज्य सरकार का मामला है। किन्तु डॉ. भंडारी रुके नहीं। जितने भी राष्ट्रपति आये उन्हें पत्र लिखते रहे।
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डॉ. भंडारी बातचीत में बताते हैं, "चिकित्सा शिक्षा हिन्दी माध्यम से दिए जाने के निर्णय से इस बात की चिंता हुई है कि हिन्दी पढ़कर निकले चिकित्सक विदेशी शोध पत्रिकाओं को कैसे पढ़ेंगे? परन्तु हमने आज तक यह पता नहीं किया कि अंग्रेजी माध्यम से पढ़े कितने प्रतिशत भारतीय चिकित्सक देशी-विदेशी पत्र-पत्रिकाओं में छपनेवाले शोध को पढ़ते हैं। "मैंने लगभग ढाई दशक तक सफलतापूर्वक डिस्पेंसिंग चिकित्सक के रूप में कार्य किया तो मुझे इसकी कभी आवश्यकता ही नहीं पड़ी। जो चिकित्सक पढ़ते हैं, वे उस शोध को अपनी कार्ययोजना में कितना अपनाते हैं, यदि ऐसा शोध करेंगे तो वास्तविकता का अनुमान लग सकेगा।"
डॉ भंडारी कहते हैं "विदेश की चिंता में आकंठ डूबे लोगों ने कभी पता ही नहीं किया कि हमारे गाँवों के नागरिकों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं अथवा नहीं या उन सुविधाओं का स्तर कैसा है?" "हमारे ग्रामीण परिवार इसी के चलते शनैः शनैः गाँव को छोड़कर शहर की भीड़भाड़ में अपनी अस्मिता को तिरोहित करने को विवश हो रहे हैं। हमें अपने ग्रामीण नागरिकों की चिंता प्राथमिकता से करने की आवश्यकता है। संभव है, यह भाषाई परिवर्तन गाँवों के लिए भी वरदान सिद्ध हो।"
जब डॉ. भंडारी से सवाल किया कि क्या चिकित्सा शिक्षा में आने वाले विद्यार्थी इस बदलाव को स्वीकार करेंगे तो उन्होंने कहा, "जब चिकित्सा शिक्षा के प्रथम वर्ष में विद्यार्थी आता है तो अंग्रेजी के कई टेक्निकल शब्द उसे 12वीं की पढ़ाई से एकदम अलग मिलते हैं। वो सबकुछ आते हुए भी हिन्दी में सोचने के कारण अपनी वाक्य रचना का क्रम बदल देता है। ऐसा करने से इन छात्रों से भाषाई अशुद्धियाँ भी होती हैं। मैं जब उनका मूल्यांकन किया करता था तो सोचता था कि इन बच्चों को यदि इन टेक्निकल शब्दों को समझकर फिर हिन्दी में लिखने को कहा जाए तो ये बेहतर तरीके से समझकर लिख सकते हैं। चूँकि मैं अनुवाद टीम में भी था अतः यह बता सकता हूँ कि अभी अनुवाद में मेडिकल टर्म को वैसे का वैसा ही रखा गया है। उदाहरण के लिए हीमोग्लोबिन को हीमोग्लोबिन ही लिखा है और ब्रैकेट में हीमोग्लोबिन की स्पेलिंग लिखी है। फीमर हड्डी को हिन्दी में फीमर कहा जाता है। ऐसे हजारों शब्द हैं जिन्हें वैसा ही रखा गया है। यह प्रारंभ है तो समय के साथ इसमें सुधार व बदलाव होते रहेंगे।"
सेवानिवृत बाल एवं शिशुरोग विशेषज्ञ डॉ. अवधेश त्रिपाठी कहते हैं, 'मेडिकल टर्मिनोलोजी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है किन्तु हिन्दी की जो शब्दावली बनेगी उसे कितना प्रतिसाद मिलेगा, इसका आकलन अभी कठिन है। हिन्दी में यदि टेक्निकल टर्म बनेगी तो उसमें संस्कृत की शब्दावली की प्रचुरता होगी। उदाहरण के लिए कई शब्द चरक संहिता, सुश्रुत संहिता से आयेंगे और वर्तमान में संस्कृत की क्या स्थिति है यह किसी से छुपी हुई नहीं है।'
डॉ त्रिपाठी आगे बताते हैं कि "हिन्दी भाषा में चिकित्सा शिक्षा का सीमित क्षेत्र तक प्रयोग होगा। वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर जिस प्रकार की प्रतियोगिता है उससे हिन्दी में चिकित्सा शिक्षा के भविष्य को लेकर अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। यहाँ पर यह ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है कि चिकित्साशास्त्र के अध्ययन में पुस्तकों के हिन्दी में अनुवाद के समय भाषा की अत्यधिक शुद्धता का विचार विषय को गहराई से समझने में व्यवधान ही पैदा करेगा। अतः प्रचलित अंग्रेजी के शब्दों को देवनागरी लिपि में यथावत स्वीकारना उद्देश्य की सफलता के लिए आवश्यक है।"
स्वराज, सुराज और स्वदेशी के प्रवर्तक महात्मा गाँधीजी ने यंग इंडिया में 1931 में लिखा था, 'अगर मेरे हाथों में तानाशाही सत्ता हो तो मैं आज से ही विदेशी माध्यम के जरिये हमारे लड़के-लड़कियों की शिक्षा बंद कर दूं और सारे शिक्षकों एवं प्राध्यापकों से यह माध्यम तुरंत बदलवा दूं या उन्हें बर्खास्त कर दूं। मैं पाठ्यपुस्तकों की तैयारी का इन्तजार नहीं करूँगा। वे तो माध्यम के परिवर्तन के पीछे-पीछे चली आएँगी। यह एक बुराई है जिसका तुरंत इलाज होना चाहिए।'
महात्मा गाँधी की मंशा स्वतंत्रता के ठीक पश्चात तो पूरी हो सकती थी किन्तु वर्तमान में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग हमारे जीवन में इतना अधिक हो चुका है कि हम हिन्दी भाषा में कार्य न करने के आदी हो चुके हैं। ऐसे में चिकित्सा शिक्षा का हिन्दी भाषा में प्रारंभ होना कितना सफल होगा यह भविष्य पर निर्भर है।
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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