इंडिया गठबंधन के लिए आसान नहीं दिल्ली का मैदान
Delhi Lok Sabha Seats: राजधानी दिल्ली में इंडिया गठबंधन की राह कठिन होती जा रही है। बीजेपी के खिलाफ आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की संयुक्त मोर्चाबंदी भी मजबूत नजर नहीं आ रही है। यहां की सात सीटों में से देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस जहां तीन सीटों पर ही लड़ रही है, वहीं सबसे नई पार्टी आप चार सीटों पर मैदान में है। लेकिन दोनों ही पार्टियों में आपसी सामंजस्य नहीं दिख रहा है।
रामलीला मैदान की रैली को छोड़ दें तो दोनों ही पार्टियों के नेता अब तक कहीं भी मैदान में एक साथ नजर नहीं आए हैं। इसका फायदा भारतीय जनता पार्टी को साफ तौर पर मिलता दिख रहा है।

दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस भले ही मिल कर लड़ रहे हों, लेकिन लगता नहीं कि दोनों ही दलों के जमीनी कार्यकर्ताओं के दिल मिल गए हैं। वैसे कांग्रेस में भी अंदरूनी कलह खूब दिख रही है। आम आदमी पार्टी का उभार कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ ही हुआ था। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान अरविंद केजरीवाल अक्सर तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भ्रष्टाचारी बताते हुए सत्ता में आने पर जेल भेजने का दावा करते थे। कांग्रेसी कार्यकर्ता उस बात को अब तक भूल नहीं पाए हैं।
शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित कहते भी रहे हैं कि अपनी मां के अपमान का बदला वे जरूर लेंगे। ऐलानिया तौर पर संदीप आम आदमी पार्टी के मुखर विरोधी रहे हैं। लेकिन मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए उन्होंने आम आदमी पार्टी के खिलाफ जुबान बंद रखी। उन्होंने दिल्ली से चुनाव लड़ने की चाहत का खुलकर इजहार भी किया। उनकी नजरें कांग्रेस के हिस्से में आई उत्तर पूर्वी दिल्ली की सीट पर थीं, जहां से बीजेपी के मनोज तिवारी तीसरी बार किस्मत आजमा रहे हैं।
लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने यहां से जेएनयू की वामपंथी छात्र राजनीति से कांग्रेसी दायरे में शामिल हुए कन्हैया कुमार को उम्मीदवार बना दिया है जिसे संदीप दीक्षित पचा नहीं पा रहे हैं। एक चुनावी बैठक में तो उन्होंने कन्हैया कुमार के साथ ही दिल्ली के कांग्रेस प्रभारी दीपक बावरिया को खरी-खोटी सुना दी। कन्हैया ने उन पर बीजेपी की तरह बोलने का आरोप भी लगा दिया। जिसका संदीप ही नहीं, कई कांग्रेसी नेताओं ने जोरदार विरोध किया। गनीमत इतनी रही कि कोई अप्रिय घटना नहीं घटी।
उत्तर पश्चिमी दिल्ली से कांग्रेस ने जिस उदित राज को अपना उम्मीदवार बनाया है, वे 2014 में बीजेपी के टिकट पर दिल्ली से ही सांसद बने थे। यह बात और है कि अगली बार उनका टिकट कट गया तो वे बागी बन गए और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। उदित राज को भी कांग्रेस के अंदरूनी हलके में खुलकर बाहरी उम्मीदवार बोला जा रहा है। उनकी उम्मीदवारी को कांग्रेसी ही नहीं पचा पा रहे हैं। उनके बड़बोलेपन से भी कांग्रेसी परेशान हैं।
दिल्ली के चुनाव में इंडिया गठबंधन के सामने दो तरह की चुनौतियां हैं। पहली चुनौती आप और कांग्रेस के बीच जमीनी स्तर पर तालमेल और सहयोग को लेकर है तो दूसरी चुनौती कांग्रेस का अपना अंदरूनी संकट है। कांग्रेस के अंदरूनी संकट का ही नतीजा है कि कन्हैया कुमार और उदित राज कांग्रेसी हलके को स्वीकार्य नहीं हो पा रहे हैं। दोनों नेताओं में एक समानता यह भी है कि दोनों की छवि अतिवादी विचारों की है।
पारंपरिक कांग्रेसी नेताओं को लगता है कि इनकी छवि के चलते इनके लिए समर्थन जुटाना आसान नहीं होगा। कन्हैया कुमार के जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष रहते हुए ही देश के टुकड़े होंगे वाली नारेबाजी हुई थी। कांग्रेसी नेताओं को लगता है कि कन्हैया कुमार पर इस नारे की छवि इतने गहरे तक अंकित हो चुकी है कि उनके लिए वोट हासिल कर पाना आसान नहीं होगा।
बेशक दिल्ली पर जेएनयू छात्रसंघ चुनाव नतीजों का असर नहीं पड़ता, लेकिन दिल्ली में जेएनयू के होने की वजह से वहां होने वाली घटनाओं की जानकारी दिल्लीवालों को और इलाके के लोगों की तुलना में ज्यादा ही है। कांग्रेसी नेताओं को लगता है कि जैसे ही वे मैदान में उतरेंगे, बीजेपी के कार्यकर्ता और नेता "भारत तेरे टुकड़े होंगे" जैसे नारों की जनता को खूब याद दिलाएंगे।
प्रचार में उतरे कांग्रेसी नेताओं के लिए उसका बचाव करना आसान नहीं है। स्थानीय कांग्रेसी नेताओं को लगता है कि संदीप दीक्षित अगर मैदान में होते तो वे कन्हैया की तुलना में ज्यादा प्रभावी होते। उनकी वजह से सुप्त कांग्रेसी कार्यकर्ता भी मैदान में उतर जाते। दिल्ली में कांग्रेस विरोधी भी शीला दीक्षित के विकास कार्यों को नकार नहीं पाते। शीला दीक्षित के दिल्ली में अब भी समर्थक ज्यादा हैं। इसी तरह उदित राज को लेकर भी कांग्रेसी सहज नहीं हैं।
दिल्ली में इंडिया गठबंधन का दूसरा बड़ा संकट आम आदमी पार्टी और कांग्रेस में आपसी तालमेल का ना होना है। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता कुछ साल पहले तक कांग्रेस के ही खिलाफ सड़कों पर उतरते रहे हैं, जिसे कांग्रेसी कार्यकर्ता अब तक भुला नहीं पाए हैं। दिलों की यह दूरी इतनी है कि जमीनी स्तर पर दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं का मन नहीं मिल पा रहा है। प्रत्याशियों और नेताओं के बीच भी कोई सामंजस्य नजर नहीं आ रहा। अलबत्ता उदित राज जरूर संजय सिंह से मिल आए हैं। लेकिन इसका असर जमीनी स्तर पर प्रचार अभियान में नहीं दिख रहा है।
कांग्रेसी कार्यकर्ता ही नहीं, आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भी उदास हैं। इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता हुआ दिख रहा है। जिन चार सीटों पर आम आदमी पार्टी लड़ रही है, वहां सिर्फ उसके ही कार्यकर्ता सक्रिय हैं, जबकि कांग्रेसी हिस्से वाली दो सीटों पर आपसी खींचतान ही जारी है। ऐसे में एक-दूसरे दलों के समर्थकों का वोट दोनों दल के कार्यकर्ता किस तरह अपने पक्ष में शिफ्ट करा पाएंगे, इसकी ना तो ठोस रणनीति नजर आ रही है और ना ही आपसी तालमेल। ऐसे दिल्ली के दंगल में इंडिया गठबंधन की सफलता संदिग्ध मानी जा रही है। कह सकते हैं कि आपसी तालमेल की कमी, जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के दिल ना मिलने से दिल्ली में इंडिया गठबंधन के लिए पनघट की डगर कठिन नजर आ रही है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
-
Delhi NCR Weather Today: दिल्ली-NCR में होगी झमाझम बारिश, दिन में छाएगा अंधेरा, गिरेगा तापमान -
युद्ध के बीच ईरान ने ट्रंप को भेजा ‘बेशकीमती तोहफा’, आखिर क्या है यह रहस्यमयी गिफ्ट -
Gold Silver Price: सोना 13% डाउन, चांदी 20% लुढ़की, मार्केट का हाल देख निवेशक परेशान -
Ram Navami Kya Band-Khula: UP में दो दिन की छुट्टी-4 दिन का लंबा वीकेंड? स्कूल-बैंक समेत क्या बंद-क्या खुला? -
इच्छामृत्यु के बाद हरीश राणा पंचतत्व में विलीन, पिता का भावुक संदेश और आखिरी Video देख नहीं रुकेंगे आंसू -
'मुझे 10 बार गलत जगह पर टच किया', Monalisa ने सनोज मिश्रा का खोला कच्चा-चिट्ठा, बोलीं-वो मेरी मौत चाहता है -
Petrol-Diesel Shortage: क्या भारत में पेट्रोल-डीजल समेत ईंधन की कमी है? IndianOil ने बताया चौंकाने वाला सच -
कौन हैं ये असम की नेता? जिनके नाम पर हैं 37 बैंक अकाउंट, 32 गाड़ियां, कुल संपत्ति की कीमत कर देगी हैरान -
Iran Vs America: ईरान ने ठुकराया पाकिस्तान का ऑफर, भारत का नाम लेकर दिखाया ऐसा आईना, शहबाज की हुई फजीहत -
LPG Crisis: एलपीजी संकट के बीच सरकार का सख्त फैसला, होटल-रेस्टोरेंट पर नया नियम लागू -
Trump Florida defeat: ईरान से जंग ट्रंप को पड़ी भारी, जिस सीट पर खुद वोट डाला, वहीं मिली सबसे करारी हार -
Who is Aryaman Birla Wife: RCB के नए चेयरमैन आर्यमन बिड़ला की पत्नी कौन है? Virat Kohli की टीम के बने बॉस












Click it and Unblock the Notifications