Johnson Baby Powder: जॉनसन बेबी पाउडर से जान पर आफत
जॉनसन एण्ड जॉनसन के बेबी पाउडर से कैंसर होने की बात पहले ही साबित हो गयी थी, अब कंपनी भी अमेरिका में 72 हजार करोड़ रुपए का मुआवजा देने के लिए तैयार हो गयी है। लेकिन भारत में इन बातों को लेकर कितनी जागरुकता है?

बेबी केयर प्रोडक्ट ब्रांड जॉनसन एंड जॉनसन पर अमेरिका के कोर्ट ने 8.9 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया था। यह जुर्माना जानबूझकर कैंसर केमिकल युक्त पाउडर बेचने के आरोप में लगाया गया था। आरोप सिद्ध होने के बाद कहीं किसी भी स्तर पर जॉनसन एंड जॉनसन को उच्च न्यायालय में भी राहत नहीं मिली और अब कम्पनी यह भुगतान करने के लिए तैयार है।
अमेरिका की सैंट लुइस कोर्ट ने जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी के बेबी पाउडर में कैंसर फैलाने वाला केमिकल 'एसबेस्टस' मिलने के बाद 6 साल पहले सेंट लुईस कोर्ट ने उस पर 4.7 अरब डॉलर (करीब 34 हजार करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाया था। यह राशि उन 22 महिलाओं और उनके परिवारों को दी जानी थी जिन्होंने पाउडर की वजह से कैंसर होने की शिकायत की थी। उसके बाद कम्पनी ने वहां के उच्च न्यायालय में अपील की थी, जहां बड़ी संख्या में अन्य ऐसे लोग सामने आए जिनमें इस उत्पाद के प्रयोग से कैंसर जैसा प्राणघातक रोग पनप गया। अब छह सालों बाद जॉनसन एंड जॉनसन कम्पनी को 35 हजार मामलों में लगभग लगभग ₹ 72 हज़ार करोड़ देने हैं। जिसके भुगतान के लिए अंततः वो तैयार हो गया है।
हमारे देश में भी बेबी केयर प्रोडक्ट्स का सबसे बड़ा ब्रांड जॉनसन एंड जॉनसन ही है। नवजात शिशुओं के जन्म के साथ ही इसके प्रोडक्ट्स घर में पहुंच जाते हैं। कई बार सुरक्षित माने जाने वाले इस बेबी पाउडर के बारे में सवाल भी उठाए गए। पर भारत में तब तक इसकी बिक्री पर कोई असर नहीं पड़ा, जब तक कि कम्पनी ने खुद ये उत्पादन बंद नहीं किया।
फार्मा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन पर यह आरोप था कि कंपनी को लंबे समय से पता था कि उसके बनाए बेबी पाउडर में हानिकारक केमिकल 'एसबेस्टस' मौजूद है। सन् 2018 में अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में पुष्ट सूत्रों के आधार पर ये दावा किया गया। बताया गया कि 1971 से लेकर 2000 तक कंपनी के बेबी पाउडर की टेस्टिंग में कई बार एसबेस्टस मिलाया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि जॉनसन एंड जॉनसन के अधिकारियों से लेकर प्रबंधकों, वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और वकीलों तक को इसकी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने यह बात छिपाए रखी।
अमेरिकी रेगुलेटर्स की योजना थी कि कॉस्मेटिक टैल्कम पाउडर में एसबेस्टस की मात्रा सीमित की जाए, लेकिन कंपनी ने रेगुलेटर्स पर ऐसा नहीं किए जाने का दबाव बनाया। परिणामस्वरूप इसमें हानिकारक पदार्थ की मात्रा कम नहीं हुई। इसके बाद, कैंसर की बढ़ती समस्या के कारण, विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य संस्थाओं ने यह कहा कि किसी भी तरह से एसबेस्टस का उपयोग करना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। एसबेस्टस के सीमित संपर्क में आने के बाद भी ये जहरीला केमिकल शरीर में रहकर सालों बाद कैंसर की समस्या उत्पन्न कर सकता है।
इस मामले में उस समय अमेरिका में कैंसर की शिकायत लेकर काफी लोग सामने आए थे। हालांकि जॉनसन एंड जॉनसन ने उस समय आरोपों को निराधार बताया था। कंपनी का कहना था कि यह उन सभी टेस्ट्स से ध्यान हटाने की कोशिश है जो दावा करते हैं कि हमारे पाउडर में कोई हानिकारक पदार्थ मौजूद नहीं है। कैलिफ़ोर्निया की एक महिला को अमेरिका के लॉस एंजिल्स की एक ज्यूरी ने 417 मिलियन डॉलर का मुआवजा दिलवाया था। इसी महिला ने जॉनसन एंड जॉनसन के विरुद्ध ऐसे मामले में सबसे पहला मुकदमा दायर किया था। अपने मुकदमें में उसने यह बताया था कि स्त्री सुलभ स्वच्छता के लिए उसने जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी प्रोडक्ट का इस्तमाल किया जिससे उसे गर्भाशय का कैंसर हो गया।
गर्भाशय कैंसर के लक्षण ऐसे हैं कि इस रोग का पता बहुत समय बाद चल पाता है। इस कैंसर के लक्षण स्तन कैंसर की तरह बाहर नहीं दिखाई देते हैं। लोग इस बारे में अधिक जागरूक नहीं हैं। यही कारण है कि इस कैंसर को "साइलेंट किलर" कहते हैं। अतः कई लोग ऐसा मानते हैं कि जॉनसन एंड जॉनसन ने लोगों के साथ धोखा किया। कंपनी अपने उत्पाद पर ऐसा कोई भी निर्देश नहीं लिखती, जबकि उन्हें पता है कि बेबी पाउडर को बच्चों से ज़्यादा महिलाएं अपने अंगों की डस्टिंग के लिए इस्तमाल करती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बच्चो के लिए बनने वाले उत्पाद को सबसे सौम्य और सुरक्षित माना जाता है।
अमेरिकन कैंसर सोसाइटी को एस्बेस्टस वाले टेल्कम पाउडर के प्रयोग का ख़तरा पता था। इसलिए उन्होंने पन्द्रह वर्ष पहले ही एफडीए को यह निर्देश दिया कि एस्बेस्टस वाले सारे पाउडर को बैन किया जाय। हालांकि, सच्चाई यह है कि कई कंपनियां अभी भी उस स्टैण्डर्ड तक नहीं पहुंच पा रहीं जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर असर ना पड़े। परन्तु सवाल यह है कि क्या जॉनसन एंड जॉनसन जैसी प्रतिष्ठित कम्पनियां भी अपने लाभ के लिए लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रही हैं? इस सवाल के जवाब में कंपनी का कहना था कि बेबी पाउडर को लेकर उन्होंने पशुओं पर किये गए शोध में कभी ट्यूमर की ग्रोथ नहीं पाई। हालांकि, यह तय है कि जिस बेबी पाउडर से गर्भाशय का कैंसर हुआ उसमें इस पाउडर के कण भी मौजूद थे।
जॉनसन एंड जॉनसन ने अमेरिकी उच्च न्यायालय में इस ऑर्डर के विरुद्ध अपील की थी, जो कि अब निरस्त हो गई है। इस मामले के इतने वर्षों तक चलते रहने के दौरान भी भारत सहित कई देशों में कंपनी द्वारा इस पाउडर को बच्चों के लिए प्रयोग किए जाने की वकालत करता रहा है। कम से कम अब लोगों को विशेषकर महिलाओं को यह समझना चाहिए कि अपनी व्यक्तिगत अंगों की स्वच्छता के लिए बेबी पाउडर या दूसरे टैल्कम पाउडर का प्रयोग बिल्कुल नहीं करें। उसकी जगह संवेदनशील स्थानों के लिए ही बने उत्पाद का प्रयोग कर सकती हैं जिससे उनके गर्भाशय पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
यह केवल निजी अंगों के लिए प्रयोग किए जाने वाले उत्पादों की ही बात नहीं है। शरीर में भोजन के अतिरिक्त त्वचा के माध्यम से भी बहुत सारी चीज़ें अवशोषित होती हैं। ऐसे में सौंदर्य प्रसाधन के अन्य उत्पादों को लेकर भी सतर्कता होनी चाहिए। बाजार में तमाम मेकअप प्रोडक्ट्स की भरमार है। बाजार ने ही लड़कियों - महिलाओं में यह विचार भरने का काम किया है कि मेकअप से ही आत्मविश्वास आता है। ऐसे में बड़े शहरों से लेकर गांवों तक मेकअप प्रोडक्ट की बिक्री हो रही है। ब्यूटी केयर का बाजार करीब 28 बिलियन डॉलर का है, जिसमें पर्सनल केयर एक बहुत बड़ी रेंज है। ऐसे में कम्पनियां अपने उपभोक्ता बढ़ाने के लिए मार्केटिंग में हर तरह की स्ट्रैटिजी अपनाती हैं।
अमेरिकी नागरिक संगठनों और प्रशासन की जागरुकता के कारण फिलहाल जॉनसन एण्ड जॉनसन ने न केवल उत्पाद बंद कर दिया बल्कि हर्जाना भरने को भी तैयार हो गयी। लेकिन भारत में स्थिति दयनीय है। सुन्दरता वाले इस सेगमेन्ट में उत्पाद की गुणवत्ता के कड़े मानक सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। उपभोक्ताओं को भी चाहिए कि सिर्फ प्रचार पर विश्वास करने की बजाय प्रोडक्ट की सही जानकारी लेकर ही इस्तेमाल करें।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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