Jalandhar By-election: 'आप' के लिए अवसर, तो कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना जालंधर
आम आदमी पार्टी की भले ही दो राज्यों दिल्ली और पंजाब में सरकार हो लेकिन लोकसभा में उनका एक भी सांसद नहीं है। ऐसे में आम आदमी पार्टी जालंधर सीट जीतकर लोकसभा में अपना खाता खोलना चाहती है।

Jalandhar By-election: कर्नाटक में हो रहे विधानसभा चुनाव के साथ पंजाब की जालंधर लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव हो रहा है। गौरतलब है कि इसी साल जनवरी में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान 76 साल की उम्र में जालंधर से कांग्रेस के सांसद संतोख सिंह चौधरी का निधन हो गया था। कांग्रेस ने जालंधर लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए संतोख सिंह चौधरी की पत्नी करमजीत कौर को टिकट दिया है। आम आदमी पार्टी ने दलित नेता सुशील कुमार रिंकू को टिकट दिया है। आप पार्टी और उसके मुख्यमंत्री भंगवत सिंह मान दोनों ही 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में मिली शानदार जीत को बरकरार रखना चाहते है, इस कारण आप पार्टी के लिए जालंधर सीट जीतना बेहद जरूरी है।
गौरतलब है कि भगवंत मान के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके द्वारा खाली की गई लोकसभा सीट संगरूर से भिंडरवाले समर्थक सिमरनजीत सिंह मान की जीत ने आप पार्टी को तगड़ा झटका दिया था।
जालंधर दलितों के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र है। यहां से दो बार के लोकसभा सांसद चौधरी संतोख सिंह के जनवरी में निधन के कारण उपचुनाव हो रहा है। देखा जाए तो जालंधर परंपरागत रूप से कांग्रेस का गढ़ रहा है और इस निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस सिर्फ चार बार हारी है। कांग्रेस को दो बार अकाली दल के हाथों और दो बार जनता दल से हार का सामना करना पड़ा है। इस लोकसभा क्षेत्र में नौ विधानसभा क्षेत्र आते हैं जिनमें कांग्रेस के पांच और आप के चार विधायक हैं।
आप पार्टी की भले ही प्रदेश में सरकार हो लेकिन जालंधर में उसके पास एक भी भरोसेमंद उम्मीदवार नहीं था जो कांग्रेस को चुनौती दे सके। इस कारण आप पार्टी ने 2022 में कांग्रेस के टिकट पर जालंधर पश्चिम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले रिंकू को पार्टी में शामिल कर अपना उम्मीदवार बनाया है।
इस बार जालंधर की जंग किसी भी दल के लिए आसान नहीं है क्योकि जालंधर में इस बार पंच-कोणीय लड़ाई हो रही है। अकाली दल ने जहां बंगा से अपने विधायक सुखविंदर कुमार को मैदान में उतारा है, वहीं भाजपा ने अकाली दल से आए इंदर इकबाल अटवाल पर दांव लगाया है। पिछले साल जून में संगरूर लोकसभा उपचुनाव में जीत के बाद सिमरनजीत सिंह मान के अकाली दल (अमृतसर) को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने अपने विश्वासपात्र गुरजंट सिंह कद्दू को प्रत्याशी बनाया है।
जालंधर क्षेत्र में दलितों की बड़ी आबादी है। यहां 2022 के चुनाव में 16,69,098 वोटरों में 42.7 फीसद दलित थे। ऐसे में यहां की चुनावी लड़ाई की दिशा दलित वोटर ही तय करते हैं। दलित भावनाओं को भुनाने के लिए कांग्रेस ने राज्य के एकमात्र दलित मुख्यमंत्री रहे चरणजीत चन्नी को प्रचार अभियान की कमान सौपी है। चन्नी रामदसिया सिख हैं और उन्हें इस समुदाय के डेरों का करीबी माना जाता है।
भाजपा प्रत्याशी अटवाल मजहबी सिख हैं। उनके पिता चरणजीत सिंह अटवाल 2019 में अकाली-भाजपा के संयुक्त उम्मीदवार थे और कांग्रेस के चौधरी से करीब 19,000 मतों से हार गए थे। वाल्मीकि मजहबी सिखों ने अतीत में जालंधर में रामदासी/रविदासी/आदि धर्मी समुदाय को चुनौती दी, और आप, शिरोमणि अकाली दल (शिअद), कांग्रेस और शिअद (अमृतसर) के उम्मीदवार इसी समुदाय से हैं। अटवाल अपने पिता की विरासत को हासिल करते हुए वाल्मीकि/मजहबी सिखों की चुनौती आगे बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि परंपरागत रूप से भाजपा के पास ग्रामीण पंजाब में काडर नहीं है। इसलिए उसने दलबदल जैसे साधनों का सहारा लिया है। अटवाल भी चुनाव से कुछ दिन पूर्व अकाली दल से भाजपा में आए थे।
पंजाब की ग्रामीण आबादी ने 2020 में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के लिए भाजपा को अभी तक माफ नहीं किया है। ऐसे में यहां भाजपा उम्मीदवार को ग्रामीण क्षेत्रों से वोट लेना मुश्किल काम होगा। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने जालंधर लोकसभा उपचुनाव के लिए बंगा से विधायक डॉ. सुखविंदर कुमार सुखी को अकाली दल-बसपा का उम्मीदवार बनाया है। सुखविंदर कुमार सुखी 2017 और 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर चुके हैं। अमृतपाल प्रकरण के कारण आप पार्टी ने पंथिक वोटरों की सहानुभूति खो दी है, जिन्हें आकर्षित करने की कोशिश सुखबीर बादल का शिरोमणि अकाली दल कर रहा है। अकाली दल के अलावा सिमरनजीत मान भी अपने उम्मीदवार के लिए पंथिक वोट की उम्मीद कर रहे है।
अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद भाजपा पंजाब में अपने पैर जमाने की भरसक कोशिश कर रही है। जालंधर सीट पर भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा ने हरियाणा के 7 सांसदों और कई विधायकों को जालंधर कैम्प करने के लिए कहा है। हरियाणा से सिरसा की सांसद सुनीता दुग्गल, रतिया विधायक लक्ष्मण नापा, पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवार, राज्यसभा सांसद कृष्ण पाल पंवार, पानीपत मेयर अवनीत कौर, हांसी विधायक विनोद भयाणा जालंधर में लगातार पार्टी का प्रचार कर रहे है। सांसद सुनीता दुग्गल ने जालंधर में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान नूरमहल में भी माथा टेका। पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर ने प्रसिद्ध पीर मुराद शाह की दरगाह पर जाकर आशीर्वाद लिया, वही हरियाणा के राज्यसभा सांसद कृष्ण पाल पंवार ने डेरा सचखंड बल्ला के मौजूदा गद्दीनशीन संत निरंजन दास महाराज के दर्शन किए। डेरा सचखंड बल्ला की जालंधर क्षेत्र में काफी मान्यता है।
फिलहाल सभी दल अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं और जमीनी स्तर पर पसीना बहा रहे हैं लेकिन जमीनी स्तर से आ रही खबरों की माने तो मुख्य मुकाबला कांग्रेस और आप पार्टी में ही है। चुनाव में अपनी ताकत आजमा रहे कांग्रेस, आप पार्टी, भाजपा, अकाली दल और मान की पार्टी में से कौन बाजी मारता है, यह 13 मई को मतगणना के दिन ही पता चलेगा।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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