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Zoji-la Tunnel: चीन की चुनौती को भारत का 'जोजिला' जवाब

इस समय जम्मू कश्मीर में हजारों करोड़ रूपये की लागत से अनेक सुरंगों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है जोजिला सुरंग जिसे 2026 तक पूरा करने के लिए तेजी से काम हो रहा है।

india Zoji-la Tunnel construction will create panic for china

Zoji-la Tunnel: जिस गति से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और अरूणाचल प्रदेश में वर्तमान सरकार मूलभूत ढांचे का निर्माण कर रही है वह अभूतपूर्व और अविश्वसनीय है। अविश्वसनीय इसलिए कि कोई विकसित और उन्नत तकनीकी दक्ष देश भी ऐसे दुरूह प्रोजेक्ट को प्रारम्भ करने से पहले सौ बार सोचेगा। ऐसा ही एक प्रोजेक्ट है ज़ोजिला सुरंग। समुद्र तल से 11,600 फुट ऊपर यह दर्रा दुरूहतम दर्रों में एक है।

ज़ोजिला दर्रा (पास) इतना दुरूह है कि कम से कम 5-6 महीने हिमपात और हिम जमाव के कारण इस पर आवागमन सम्भव ही नहीं होता। यह पास कश्मीर क्षेत्र को लद्दाख क्षेत्र से जोड़ता है। यह श्रीनगर से लगभग 100 किमी दूर करगिल जिले में स्थित है। लद्दाख को जोड़ने वाले मात्र दो ही पास (दर्रे) हैं, एक हिमाचल से होकर जाने वाला रोहतांग (Rohtang pass) पास और दूसरा कश्मीर से जाने वाला ज़ोजिला (Zoji La) पास। ये दोनों ही पास लद्दाख को भारत की मुख्य भूमि से पूरे वर्ष जोड़ कर रखने में सक्षम नहीं हैं।

अक्टूबर से अप्रैल तक सम्पूर्ण लद्दाख क्षेत्र शेष भारत भूमि से सड़क मार्ग से कटा रहता है। लद्दाख में चीन के साथ चल रहे टकराव और मूलभूत ढांचे की कमी को पूरा करने के लिए वर्तमान सरकार ने अभूतपूर्व कार्य किया है और कर रही है। इन दोनों दर्रों के नीचे पहाड़ को चीरकर पूरे वर्ष प्रयोग किए जाने वाला राजमार्ग (आल वेदर रोड) बनाया जा रहा है। रोहतांग के विकल्प के रूप में "अटल सुरंग" तैयार हो चुकी है। अब ज़ोजिला सुरंग की बारी है। इस सुरंग के निर्माण का उद्घाटन स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2018 में किया। यह सुरंग लगभग 14 किमी लम्बी है। यह दो-तरफा सुरंग मार्ग जो एशिया में अपने तरह का सबसे लम्बा है।

इस प्रोजेक्ट के महत्व को समझने के लिए इतना जान लेना ही काफी होगा कि इसे केन्द्रीय स्तर पर निरंतर निगरानी में बनाया जा रहा है। अप्रैल के महीने में जहां सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के साथ जोजिला का दौरा करके निर्माण कार्य का जायजा लिया था वहीं दो दिन पहले लद्दाख के उपराज्यपाल ब्रिगेडियर बीडी मिश्रा ने इस जगह का दौरा करके निर्माण कार्य का जायजा लिया। इस सुरंग का निर्माण कार्य सरकार के शिखर नेतृत्व की पहल पर हो रहा है। यही कारण है कि जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के उपराज्यपाल तथा केन्द्रीय राजमार्ग मंत्री स्वयं इसका समय समय पर निरीक्षण करते रहते हैं।

जम्मू-कश्मीर में 25,000 करोड़ रुपये की लागत से 19 सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। इसके तहत ज़ोजिला में 6800 करोड़ रुपये की लागत से 13.14 किलोमीटर लंबी टनल व अप्रोच रोड का निर्माण कार्य प्रगति पर है। यह 7.57 मीटर ऊंची घोड़े की नाल के आकार की सिंगल-ट्यूब, 2-लेन सुरंग है, जो कश्मीर में गांदरबल और लद्दाख के कारगिल जिले के द्रास शहर के बीच हिमालय में जोजिला दर्रे के नीचे से गुजरेगी। परियोजना में एक स्मार्ट टनल (SCADA) प्रणाली शामिल है, जिसका निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड का उपयोग करके किया गया है। यह सीसीटीवी, रेडियो कंट्रोल, निर्बाध बिजली आपूर्ति, वेंटिलेशन जैसी सुविधाओं से लैस है। इस परियोजना में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से भारत सरकार के 5000 करोड़ रुपए से अधिक की बचत हुई है।

ज़ोजिला टनल प्रोजेक्ट के अंतर्गत 13,153 मीटर की मुख्य ज़ोजिला टनल, कुल लंबाई 810 मीटर की 4 पुलिया, 4 नीलग्रार टनल, कुल लंबाई 4,821 मीटर, 8 कट एंड कवर कुल लंबाई 2,350 मीटर और तीन 500 मीटर, 391 मीटर और 220 मीटर ऊर्ध्वाधर वेंटिलेशन शाफ्ट प्रस्तावित हैं। अभी तक ज़ोजिला टनल का 28 फीसदी काम पूरा हो चुका है।

इस टनल के बनने से लद्दाख के लिए हर मौसम में कनेक्टिविटी हो जाएगी। वर्तमान में ज़ोजिला दर्रे को पार करने में औसत यात्रा समय कभी-कभी तीन घंटे लगते हैं, इस सुरंग के पूरा होने के बाद यात्रा का समय घटकर 20 मिनट रह जाएगा। यात्रा के समय में कमी से अंततः ईंधन की बचत के अलावा निम्नलिखित फायदे होंगे।

एक, पूरे वर्ष वाहनों का आवागमन अबाधित रूप से चलता रहेगा। सेना के रसद और उपस्कर पूरे वर्ष पूर्ति किये जा सकेंगे। आयुध, अम्युनिशन, युद्धक सामग्री की अबाध पूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। युद्ध की स्थिति में यह सुरंग रणनीति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी। दुर्घटनाएं कम होंगी। लद्दाख में तैनात लगभग 60000 हजार सैन्य बल को ताजे फल, भोजन, मीट, सब्जियां इत्यादि उपलब्ध हो सकेगी। अभी लगभग आठ महीने की आवश्यक सामग्री संग्रहीत करके रखनी होती है। इस टनल के बन जाने से सेना का मनोबल और आत्मविश्वास बहुत ऊंचा रहेगा। अतः ऐसा ढांचागत निर्माण जहां चीन की ढांचागत श्रेष्ठता को समाप्त करेगा वहीं भारतीयों का मनोबल ऊंचा होगा।

ज़ोजिला दर्रे के पास का इलाका बेहद दुर्गम है, यहाँ हर साल कई घातक दुर्घटनाएँ होती हैं। ज़ोजिला टनल का काम पूरा होने के बाद हादसों की संभावना जीरो हो जाएगी। यह सुरंग कश्मीर घाटी और लद्दाख के बीच साल भर संपर्क प्रदान करेगी, जो लद्दाख के विकास, पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय सामानों की मुक्त आवाजाही और आपात स्थिति में भारतीय सशस्त्र बलों की आवाजाही के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

मोदी सरकार की यह पहल वास्तविक नियंत्रण रेखा के निकट चीन द्वारा किए जा रहे अभूतपूर्व ढांचागत विकास का एक उपयुक्त उत्तर है। यह पूर्व सरकारों की नीति से बिल्कुल विपरीत इस बात का प्रमाण है कि भारत चीन के समक्ष बिल्कुल झुकेगा नहीं और ईंट का जवाब पत्थर से देने के लिए तैयार है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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