Congress: कांग्रेस की निगाह इन चार राज्यों पर

Congress: "इंडिया" गठबंधन के घटक दलों ने अपनी अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है| कांग्रेस के रणनीतिकार लोकसभा सीटों के बंटवारे का ऐसा फार्मूला बना रहे हैं ताकि उन्हें सब से ज्यादा फायदा हो| कांग्रेस का अपना लक्ष्य कम से कम 150 सीटों को जीतना है, ताकि अगर गठबंधन की सरकार बनने का चांस बने तो उसका प्रधानमंत्री बन सके| जैसे 2004 में 145 सीटें जीत कर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने थे, हालांकि उस समय भाजपा की सीटें सिर्फ 138 रह गई थी| कांग्रेस को 150 सीटें जीतने के लिए भी मौजूदा सीटों के अलावा 90 सीटें और चाहिए| तो वह इतनी सीटें कहां से लाएगी| निश्चय ही ये सीटें उसे भाजपा से जीतनी पड़ेगी। अगर वह भाजपा से इतनी सीटें जीतती है, तभी वह भाजपा की सौ सीटें घटा सकेगी|

कांग्रेस के पास भाजपा से सीटें छीनने का स्कोप गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक से है| इन नौ राज्यों की 152 सीटों पर कांग्रेस का भाजपा से सीधा मुकाबला है| इन 152 सीटों में से कांग्रेस पिछली बार सिर्फ पांच सीटें जीतीं थीं| इन सभी 9 राज्यों में कोई अन्य पार्टी कांग्रेस की मदद नहीं कर सकती, क्योंकि गठबंधन की किसी पार्टी का इन नौ राज्यों में कोई प्रभाव नहीं है|

india alliance Congress political strategy for these four states for 2024 elections

इन सभी राज्यों में नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत वोट बैंक में गिरावट के कोई संकेत नहीं हैं| हां, भाजपा सांसदों की लोकप्रियता में गिरावट जरुर होगी, लेकिन उसका इलाज मोदी उम्मीदवार बदल कर करने में माहिर हैं| मोदी वैज्ञानिक तरीके से तीन तीन बार सर्वेक्षण करवा कर उम्मीदवार तय करवाते हैं। इसलिए इन दस राज्यों के साथ साथ यूपी से भी पिछले दो चुनावों में कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ हुआ|

कांग्रेस को भी पता है कि गठबंधन सहयोगियों का इन नौ राज्यों में कोई असर नहीं, इसलिए गठबंधन का उसे इन राज्यों में कोई फायदा नहीं होने वाला| कांग्रेस उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और महाराष्ट्र में गठबंधन के सहयोगियों के सहारे ज्यादा सीटें हासिल करना चाहती है| इन चारों राज्यों में गठबंधन के सहारे वह अपनी सीटें बढ़ा सकती है| इन चारों राज्यों की 210 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस पिछली बार सिर्फ 5 सीटें जीती थी| भाजपा अकेले 121 और गठबंधन के साथ एनडीए 164 सीटें जीता था|

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उत्तर प्रदेश में पिछली बार सिर्फ सोनिया गांधी चुनाव जीती थी, क्योंकि समाजवादी पार्टी और बसपा ने उनके सामने कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं किया था| इन दोनों दलों ने अमेठी में भी उम्मीदवार खड़ा नहीं किया था, फिर भी राहुल गांधी चुनाव हार गए थे| कांग्रेस ने इसीलिए समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल को इंडिया गठबंधन में रखा है, ताकि वह इन दोनों दलों की पीठ पर सवार होकर कुछ सीटें निकाल सकें|

कांग्रेस यूपी में दो दर्जन सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है| वह समाजवादी पार्टी से 30 सीटों की डिमांड रखेगी, अखिलेश यादव की मुश्किलों में थोड़ा इजाफा तो होगा, लेकिन वह 24-25 सीटें देने को तैयार हो जाएंगे| क्योंकि कर्नाटक विधानसभा चुनाव नतीजों ने यह संकेत दिया है कि मुस्लिम वोट बैंक कांग्रेस की तरफ लौट रहा है, और गठबंधन में उसे भी फायदा होगा| कर्नाटक और हिमाचल विधानसभा चुनाव जीतने के बाद यूपी के कांग्रेस नेताओं में आत्मविश्वास का संचार हुआ है| पार्टी को लगता है कि वह 2009 का प्रदर्शन दोहरा सकती है, जब उसने यूपी से लोकसभा की 21 सीटें जीतीं थीं| हालांकि 2004 में 9, 1999 में 10 और 1998 में शून्य सीट मिली थी|

मोदी युग की शुरुआत के बाद कांग्रेस यूपी में 2014 में दो और 2019 में एक सीट ही जीती है| चुनावी तैयारियों को लेकर प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी ने एक बैठक के दौरान कहा था कि कांग्रेस 2009 में किए गए प्रदर्शन से भी ज्यादा सीटें जीतेगी| हालांकि यह तय है कि गठबंधन को बनाए रखने के लिए कांग्रेस उतनी ही सीटों पर संतोष कर लेगी, जितनी अखिलेश यादव समझौते में देंगे। लेकिन कांग्रेस के कई बड़े नेता कह रहे हैं कि गठबंधन में उन्हें कम से कम 24 सीटें नहीं मिली तो वह अकेले दम पर सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगी|

यूपी की 12 लोकसभा सीटों पर राष्ट्रीय लोक दल का दावा है, जिसका पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रभाव है। हालांकि सपा, बसपा, रालोद गठबंधन होने के बावजूद 2019 में रालोद एक भी सीट नहीं जीत पाया था| जिन 12 सीटों पर आरएलडी चुनाव लड़ना चाहती है, उनमें कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, नगीना, अमरोहा, मेरठ, बुलंदशहर, अलीगढ़, हाथरस, फतेहपुर सीकरी, मथुरा और बागपत शामिल हैं| यूपी की 80 सीटों में यदि कांग्रेस 24 और रालोद 12 सीटों की डिमांड करती है तो सपा के लिए सिर्फ 44 सीटें ही बचेंगी| इसके अलावा गठबंधन के अन्य सहयोगी भी इक्का-दुक्का सीटों के लिए दबाव बनाएंगे ही|

दूसरा बड़ा राज्य बिहार है, जहां कांग्रेस राजद और जेडीयू के साथ गठबंधन में एक तिहाई, यानि 13 सीटों की मांग कर रही है, जबकि पिछली बार वह एक ही सीट जीती थी| कांग्रेस को उम्मीद है कि इस बार का गठबंधन उसे बिहार से ज्यादा सीटें दिला सकता है|

तीसरा बड़ा राज्य महाराष्ट्र है, जहां पिछले चुनाव में तो वह राष्ट्रवादी कांग्रेस के साथ गठबंधन के बावजूद सिर्फ एक सीट जीत पाई थी, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस 4 सीटें जीत गई थी| बाकी सारी सीटें भाजपा, शिवसेना ने जीती थीं| इस बार राष्ट्रवादी कांग्रेस के टूटने से इंडिया गठबंधन को नुकसान होगा, लेकिन उद्धव ठाकरे की ताकत इंडिया गठबंधन के साथ जुड़ी है| हालांकि तिहरे गठबंधन में कांग्रेस को समझौते में पिछली बार से कम सीटें लड़ने को मिलेंगी, लेकिन कांग्रेस को उम्मीद है कि वह कम से कम पांच छह सीटें महाराष्ट्र से जीत सकती है|

कांग्रेस को सबसे ज्यादा उम्मीद कर्नाटक से है, जहां भाजपा के साथ सीधे मुकाबले में वह आधी सीटें जीतने की उम्मीद पाले हुए है| पिछले लोकसभा चुनाव के समय भाजपा 28 में से 25 लोकसभा सीटें जीत गई थी, जबकि कांग्रेस और जेडीएस एक-एक सीट जीती थीं| लेकिन अगर भाजपा और जेडीएस का गठबंधन हो जाता है, तो कांग्रेस के लिए कर्नाटक में अपना लक्ष्य हासिल करना बहुत मुश्किल होगा|

कांग्रेस को आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उड़ीसा से कोई ज्यादा उम्मीद नहीं है| पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस जो 52 सीटें जीतीं थीं, उनमें से सर्वाधिक 15 केरल से थीं, आठ आठ पंजाब और तमिलनाडु से थीं| तमिलनाडु में वह पिछली बार भी द्रमुक के साथ गठबंधन में थी, और इस बार भी गठबंधन में है| पंजाब में इस बार उसे आम आदमी पार्टी से गठबंधन करना पड़ा तो उसे केजरीवाल 13 लोकसभा सीटों में से पांच से ज्यादा सीटें नहीं देने वाले, जबकि मौजूदा लोकसभा में ही उसके सात सांसद हैं|

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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