Home Loan Subsidy: अब पूरा हो सकता है किरायेदारों का अपने घर का सपना
Home Loan Subsidy: इस साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लालकिले से प्रधानमंत्री मोदी ने शहरों में किराए पर रहने वालों के लिए एक बड़ी घोषणा की थी। इस घोषणा में घर बनाने या लेने वालों के लिए बैंक से लिए गए लोन पर ब्याज राहत की बात थी। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने तब कहा था कि शहरों में घर खरीदने वालों के लिए यह स्कीम सितंबर के अंत तक अंतिम रूप में आ जाएगी।
अब सितम्बर ख़त्म होने को है और जैसी खबरें आ रही हैं उसके अनुसार केंद्र सरकार शहरों में झुग्गी-झोपड़ी और किराए पर रहने वाले लोगों के घर का सपना पूरा करने के लिए जल्द ही होम लोन सब्सिडी योजना ला रही है। आसन्न चुनावों को देखते हुए अगले कुछ ही महीनों में यह योजना शुरू हो सकती है। ख़बरों के अनुसार 50 लाख रूपये तक का घर खरीदने वाले इस योजना का पात्र होंगे। इस योजना के तहत 9 लाख रुपए तक की सब्सिडी सरकार देगी जिसके कारण लोन एमाउंट पर सालाना 3 से 6.5 फीसदी का ब्याज लागू होगा। यह लोन अधिकतम 20 साल के लिए होगा। जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा है इस योजना में दी जाने वाली सब्सिडी सीधे लाभार्थी के खाते में जाएगी।

भारत में इस समय रियल एस्टेट सेक्टर 265 बिलियन डॉलर का है। हालांकि अभी इसका विकास नकारात्मक है लेकिन इंडस्ट्री के विश्लेषकों का अनुमान है कि 2028 तक यह सेक्टर बढ़कर 828 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। ऐसे में सरकार की ओर से ऋण पर सब्सिडी जैसी योजना को लागू किया जाता है तो बड़ी संख्या में लोग किराये के घर से अपने घर की ओर जाएंगे जिसका व्यापार पर सकारात्मक असर होगा।
कोरोना से पूर्व रियल एस्टेट सेक्टर अपने नगदी प्रवाह और मंदी की मार झेल रहा था और इस कोरोना काल में तो जैसे उनकी कमर टूट गई। असल में कोरोना काल रियल एस्टेट उद्यमियों और सरकार के लिए भी चिंतन का एक अवसर लेकर आया था। इस काल में दो तरह की घटनाएं हुईं। एक जिसके पास अकूत पैसा था वह सस्ते दामों में बहुत ज्यादा मोलभाव कर सम्पत्तियां खरीद रहा था और दूसरा वर्ग कोरोना की आशंका के कारण किराये के घर से निकल अपने खुद के घर में जाने की सोचने लगा ताकि भविष्य की चिंता के बीच कम से कम उसका अपना एक घर तो हो और खुद के आशियाने के लिए उसे किराया न देना पड़े। इस तरह के खरीददार वर्ग के लिए हाउसिंग की मांग का निर्माण हुआ। बीते कोरोना काल में ये दोनों अवसर पैदा हुए।
केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तावित योजना एक सही नीति है। यदि मकान की किश्त और किराया किसी के लिए एक समान बैठेगा तो वह किराये के घर में भला क्यों रहेगा? सरकारी नीतियों और रिज़र्व बैंक के क्रियान्वयन से ऐसा कर दिया जाये तो न केवल मकान खरीदने का सपना संजोये लोगों के लिए एक सपना पूरा करने का मौका मिलेगा बल्कि रियल एस्टेट कारोबार को भी संजीवनी मिलेगी।
मान लीजिये मुंबई या दिल्ली के किसी इलाके में कोई किराये पर रहता है और बीस हजार रूपया किराया देता है। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति को हर महीने तीस चालीस हजार की किश्त देकर फ्लैट खरीदना हो तो शायद वह 20 हजार का किराया देकर रहना पसंद करेगा। लेकिन यदि उसे यह विकल्प मिल जाए कि बीस या पच्चीस हजार की मासिक किश्त में वह फ्लैट खरीद सकता है तो वह खुशी खुशी खरीद लेगा। जिस तरह से किराये की सालाना बढ़ोत्तरी होती है वैसे किश्त की भी बढ़ोत्तरी हो तो भी बड़ी संख्या में लोगों को स्वीकार्य होगा क्योंकि अब वह जो भी भुगतान कर रहा है अपने घर के लिए कर रहा है।
अब अगला सवाल होगा कि घर की किश्त किराये के बराबर कैसे होगी तो उसका फार्मूला यह हो सकता है कि होम लोन प्रदाताओं को प्रगतिशील किश्त प्रणाली की अनुमति रिज़र्व बैंक से लेनी पड़ेगी। इसे आप लोन बैलूनिंग स्कीम जैसा समझ सकते हैं जो ऋण मार्किट में प्रचलन में भी है। इसमें लोन लेने वाला शुरू में न्यूनतम किश्त देता है और कुछ सालों के बाद बढ़ी हुई किश्त देता है जब उसकी आय सुधर जाती है। गाड़ियों की खरीद में ऐसी ऋण प्रणाली इस्तेमाल में है। होम लोन में इससे प्रेरणा लेकर किराये के बराबर किश्त कर सकते हैं।
इसके लिए ऋण की अवधि को थोड़ा बढ़ाना पड़ेगा लेकिन जब किसी को यह पता हो कि वह जो किश्त भर रहा है उसके बाद वह उसके पूरा होने के बाद उसका अपना मकान होगा तो उसके लिए किराया देने की जगह किश्त भरना अधिक सुविधाजनक होगा। किसी अनहोनी की दशा में तो आज के सभी होम लोन पर बीमा होता है तो बीमा कम्पनी पूरी राशि दे देती है और परिवार वालों के पास खुद का घर बच जाएगा।
इसीलिए इस विषय पर चिंतन करने वाले नीति निर्माताओं को किराये के बराबर ही किश्त रखने की प्रस्तावित योजना लानी चाहिए। इससे सबको घर का सपना तो साकार होगा ही, रियल एस्टेट को कर्ज मुक्त बूस्टर डोज मिलेगा। साथ ही भवन निर्माण के जो सहायक उद्योग हैं सबको संजीवनी मिलेगी। किराये के बराबर ही होम लोन की किश्त होने से बड़ा बोझ नहीं पड़ेगा और उनकी बचत बढ़ेगी जिसे वह विनियोग कर भविष्य की प्लानिंग कर सकते हैं। उम्मीद है इससे मध्य वर्ग के खुद के घर का सपना पूरा होगा।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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