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Hindutva vs Secularism: 21वीं सदी में हिंदू आस्था के प्रति बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता

दुनिया भर के हिन्दुओं के लिए यह गर्व की बात है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री आवास में लक्ष्मी, गणेश, भगवान राम और कृष्ण की मूर्तियाँ विराजमान हो गई।

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देश दुनिया की दो घटनाओं ने हिंदुत्व को केंद्रबिंदु बना दिया है। एक घटना ब्रिटेन की है, जहां सनातनी हिन्दू ऋषि सुनक प्रधानमंत्री चुने गए है, और उन्होंने हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार पूजा अर्चना के बाद प्रधानमंत्री आवास में गृह प्रवेश किया। दीपावली वाले दिन शुभ घड़ी में जब वह ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चुने गए थे, तो भारत में स्वाभाविक रूप से दीपमाला की जा रही थी। दुनिया भर के हिन्दुओं के लिए यह गर्व की बात है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री आवास में लक्ष्मी, गणेश, भगवान राम और कृष्ण की मूर्तियाँ विराजमान हो गई।

ऋषि सुनक ने जब प्रधानमंत्री ने नाते पहला भाषण दिया तो उनकी कलाई पर कलावा बंधा हुआ था। ब्रिटेन में अल्पसंख्यक हिन्दू के प्रधानमंत्री बनने पर जो कल तक भारत में भी अल्पसंख्यक के प्रधानमंत्री बनने का राग अलाप रहे थे, पता नहीं हिंदुत्व के इस विस्तार को वे किस तरह देखते हैं। भारत के मुसलमानों की प्रतिक्रिया को हम महबूबा मुफ्ती की प्रतिक्रिया में देख सकते हैं, जिन्होंने कहा कि भारत सीएए और एनआरसी में ही उलझा हुआ है। अगर महबूबा मुफ्ती को यह नहीं पता था कि ब्रिटेन में पहले से ही एनआरसी लागू है तो उन्हें फारुक अब्दुल्ला से पूछ लेना चाहिए था, जिन्होंने ब्रिटिश नागरिक से शादी की थी और जो छुट्टियां मनाने लंदन जाते रहते हैं।

rishi sunak

सच यह है कि 2047 तक भारत में लोकतंत्र का खात्मा करके शरिया लागू करने का सपने देख रहे कट्टरपंथी इस घटनाक्रम से खुश नहीं हैं। लेकिन पाकिस्तानी मीडिया बड़े गर्व से कह रहा है कि पाकिस्तान मूल का हिन्दू ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बना। हालांकि सारी दुनिया जानती है कि 1935 में जब ऋषि सुनक के दादा रामदास पहले नैरौबी और बाद में ब्रिटेन शिफ्ट हुए थे, तब पाकिस्तान नाम का कोई देश इस दुनिया में था ही नहीं। अलबत्ता ऋषि सुनक के दादा अगर 1935 में नैरोबी न जाते, तो 1947 में रिफ्यूजी बन कर भारत आते, या बंटवारे के दंगों में मारे जाते, जैसे लाखों हिन्दू मारे गए थे।

पाकिस्तान का मीडिया बेशर्मी से यह भी कह रहा है कि पाकिस्तान मूल के ऋषि सुनक को अब कोहिनूर हीरा पाकिस्तान को लौटाना चाहिए, क्योंकि आख़िरी समय कोहिनूर लाहौर से चोरी हुआ था। हालांकि कोहिनूर आंध्र प्रदेश की गोलकुंडा की पहाड़ियों से निकला था, और मुगलों ने उसे काकतीय वंश के राजा प्रतापरुद्र से वारंगल युद्ध के बाद लूटा था। लूट के माल को वे अपना बता रहे हैं।

खैर दूसरी घटना ज्यादा महत्वपूर्ण है, जिस ने ऋषि सुनक के प्रधानमंत्री बनने से भी ज्यादा बवाल मचा दिया है। लेकिन यह घटना भी हिंदुत्व के उदय की ओर इशारा करती है। अभी हाल ही में जिन केजरीवाल के एक मंत्री राजेन्द्र पाल ने दर्जनों लोगों को हिन्दू देवी देवताओं के अपमान की शपथ दिलाई थी, उन्हीं केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि भारतीय करंसी पर महात्मा गांधी के साथ साथ गणेश और लक्ष्मी की फोटो भी लगाई जाए।
सब जानते हैं कि केजरीवाल ने हिमाचल और गुजरात विधानसभा चुनावों में हिंदू विरोधी छवि बनने के कारण हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए यह बयान दिया है। लेकिन हिन्दुओं के लिए यह अच्छी बात हुई है कि भाजपा के अलावा कोई अन्य राजनीतिक दल भी हिंदुत्व में आस्था प्रकट करने लगा है।
केजरीवाल ने अपने कमरे में महात्मा गांधी, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की तस्वीर नहीं लगाई, उन्होंने डा.अम्बेडकर और भगत सिंह की तस्वीरें लगाई हैं। वह गांधी की समाधि पर जाते हैं, लेकिन अपने दफ्तर में गांधी की तस्वीर नहीं लगाते।

क्योंकि गुजरात विधानसभा के चुनाव नजदीक हैं, इसलिए वह यह तो कह नहीं सकते थे कि गांधी की जगह लक्ष्मी और गणेश की फोटो लगाई जाए, इसलिए उन्होंने कहा कि गांधी के साथ लक्ष्मी और गणेश की तस्वीर लगाई जाए। हालांकि हिन्दू इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे कि गांधी को देवी देवताओं के बराबर रखा जाए। इसलिए यह नया विवाद पैदा करने वाली बात है।

लेकिन विवाद तो पैदा हो ही गया जब मुस्लिम नेताओं ने भारतीय करंसी पर लक्ष्मी और गणेश की तस्वीर लगाए जाने पर एतराज शुरू कर दिया। केजरीवाल ने यह नहीं सोचा कि जिन कट्टरपंथियों को वन्दे मातरम और जन गन मन पर भी एतराज है, वे लक्ष्मी और गणेश कैसे बर्दाश्त करेंगे।
हालांकि नरेंद्र मोदी फिलहाल इस आईडिया पर विचार नहीं करेंगे। उनको विचार करना होता, तो नोटबंदी के समय ही दो हजार और पांच सौ के नए नोटों पर सुभाष चन्द्र बोस की फोटो लगवा देते। वह अच्छा मौक़ा था।

केजरीवाल का सुझाव गलत नहीं है, आखिर 85 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया ने भी अपनी करंसी पर गणेश जी की तस्वीर लगाई थी। उस का एक अलग इतिहास है कि जब 1997 में दुनिया भर आर्थिक मंदी के समय इंडोनेशिया की करंसी भी डूब रही थी, तब किसी ने गणेश की फोटो लगाने का सुझाव दिया था और 1998 में 20 हजार रूपए का एक नोट निकाला गया, जिस पर गणेश जी का फोटो था। गणेश की फोटो लगाने के बाद इंडोनेशिया की आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी सुधार हुआ। भगवान विष्णु का वाहन माने जाने वाले गरुड के नाम पर इंडोनेशिया की विमान सेवा है। हनुमान जी इंडोनेशिया की मिलिट्री इंटेलिजेंस के मैस्कॉट हैं।

केजरीवाल के सुझाव पर भारत के मुसलमानों की आपत्ति स्वाभाविक थी। पहला बयान उस कश्मीर से आया है, जहां से 199 में कश्मीरी पंडितों को निकाल दिया गया था। कांग्रेस के नेता सलमान सोज ने कड़ी आपत्ति दायर की है। वह पहले अब्दुल्ला परिवार की नेशनल कांफ्रेंस में थे। 1998 में जब नेशनल कांफ्रेंस पार्टी की व्हिप को दरकिनार करके अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के मंत्री सैफुद्दीन सोज ने अपनी ही सरकार के विरोध में वोट करके एक मात्र वोट से सरकार गिरा दी थी, उसके बाद उन्होंने नेशनल कांफ्रेंस छोड़ कर कांग्रेस ज्वाईन कर ली थी।

सिर्फ कांग्रेस के मुस्लिम नेता ही नहीं, शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित ने भी करेंसी पर हिंदू देवी देवताओं की फोटो लगाने के सुझाव पर कड़ी आपत्ति की है। उन्होंने केजरीवाल को भाजपा और आरएसएस की बी टीम करार देते हुए कहा कि उसे वोट के सिवा कुछ दिखता नहीं। कम्युनिस्ट पार्टियों, समाजवादी पार्टी और बाकी सेक्यूलर दलों के बयान भी बस आते ही होंगे। कह नहीं सकते कि केजरीवाल कितने दिन अपने बयान पर टिके रहते हैं, लेकिन 21वीं सदी हिंदुत्व की सदी होने जा रही है, उसके संकेत ब्रिटेन से मिलने शुरू हो गए हैं।

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