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महिला सशक्तिकरण के लिए रूढ़िवादी बंधनों से मुक्ति जरूरी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए समर्पित गैर लाभकारी संगठन उद्योगवर्धिनी के 21 वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में गत दिवस पुणे में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए देश की प्रगति में महिलाओं के योगदान के महत्व को रेखांकित किया है।

संघ प्रमुख ने उक्त समारोह में जो विचार व्यक्त किए उसके पीछे उनका यही आशय था कि समाज में महिलाओं को परंपरागत रुढ़िवादी बंधनों से मुक्त कर उन्हें अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने की स्वतंत्रता समाज की ओर से दी जानी चाहिए। संघ प्रमुख ने महिला सशक्तिकरण को केवल समाज ही नहीं बल्कि देश की उन्नति के लिए अनिवार्य बताया।

mohan bhagwat

संघ प्रमुख ने कहा कि अगर आप वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण के समर्थक हैं तो आपको उन्हें पुराने रीति रिवाजों की बेड़ियों से मुक्त करना होगा और उन्हें स्वतंत्र रूप से फलने फूलने का अवसर प्रदान करना होगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं में ऐसे बहुत से गुण होते हैं जो पुरुषों में नहीं होते और उनके पास वह सब कुछ करने की सामर्थ्य मौजूद है जो पुरुष कर सकते हैं। भागवत ने अपनी इस बात पर विशेष जोर दिया कि पुरषों को यह अहंकार नहीं पालना चाहिए कि उनके प्रयासों से ही महिलाओं का उत्थान सुनिश्चित हो सकता है। संघ प्रमुख ने कहा कि पुरुष जीवन भर काम करता है और महिला भी जीवन भर काम करती है लेकिन उससे भी आगे जाकर वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती है। एक महिला जब योगदान करती है तो पूरे परिवार का उत्थान होता है।मां के स्नेह में ही बच्चों के मन और संस्कार विकसित होते हैं।

भागवत ने कहा कि ईश्वर ने महिलाओं को एक अतिरिक्त विशेषता दी है जिससे वे वह सब कर सकती हैं जो पुरुष नहीं कर पाते। इसके साथ ही महिलाओं को पुरुषों के समान सब गुण दिए हैं इसलिए वे पुरुषों की बराबरी से सारे काम कर सकती हैं। मोहन भागवत ने महिलाओं को समाज में पर्याप्त सम्मान और स्वतंत्रता और अवसर प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा महिलाओं की उन्नति से संपूर्ण समाज और राष्ट्र के उत्थान का मार्ग प्रशस्त हो सकता है । उल्लेखनीय है कि संघ प्रमुख अतीत में अनेक अवसरों पर दिए गए अपने व्याख्यानों में राष्ट्र की प्रगति में मातृशक्ति के योगदान को रेखांकित करते हुए इस बात को रेखांकित कर चुके हैं कि कोई भी राष्ट्र महिलाओं की समान भागीदारी के बिना उन्नति नहीं कर सकता।

भागवत ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि हमारी परंपरा में मातृशक्ति को जो महत्व प्रदान किया गया है उसे सभी को न केवल स्वीकार करना होगा बल्कि उसके अनूरूप आचरण भी करना होगा।हम भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए पुरुषों के बराबर ही महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित करनी होगी। संघ प्रमुख ने महिलाओं के आर्थिक सामाजिक उन्नयन के लिए समर्पित भाव से कार्यरत उद्योगवर्धिनी द्वारा महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की ।

(लेखक राजनैतिक विश्लेषक हैं)

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