Election Campaign: चुनाव प्रचार करें लेकिन जबान संभाल के

पहले भी विवादित बयानों ने चुनाव में हार-जीत तय करने में बड़ी भूमिका निभाई है। पिछले 16 सालों में 4 चुनावों में विवादित टिप्पणी ने जीत-हार तय करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

concern on political leaders language during Election Campaign

Election Campaign: चुनावों में जुबान फिसलना कई बार बहुत महंगा पड़ता है| सोनिया गांधी का कर्नाटक की संप्रभुत्ता वाले बयान का चुनावों पर कितना असर पड़ेगा, यह अभी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह आम वोटर के समझ में आने वाली बात नहीं है| लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मैसूर में दिए अपने भाषण में जनता को समझाने की कोशिश की कि इसका मतलब क्या है|

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मोदी ने जनता को बताया कि संप्रभुत्ता देश की होती है, राज्य की नहीं| कर्नाटक भारत का एक राज्य है और जब भारत आज़ाद हुआ तो उसे संप्रभू राज्य कहा गया गया| कांग्रेस देश के टुकड़े करना चाहती है, वह देश के राज्यों को भारत से अलग करना चाहती है| भाजपा ने चुनाव आयोग में भी सोनिया गांधी के बयान की शिकायत कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है| वैसे कहा जा सकता था कि यह मात्र जुबान का फिसलना था, या भाषा को समझने में गलती कही जा सकती थी। यह भी कहा जा सकता था कि सोनिया गांधी का मतलब कर्नाटक के स्वाभिमान की रक्षा करने से था| लेकिन कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हेंडल पर सोनिया गांधी के भाषण के इस अंश को प्रमुखता से पेश किया गया है|

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भाजपा ने चुनाव प्रचार के आख़िरी दिन बाकी सारी बातों को किनारे करके सोनिया गांधी के संप्रभुता वाले भाषण को पकड़ लिया, और मोदी से लेकर जेपी नड्डा तक ने इसी मुद्दे पर भाषण दिए| नड्डा ने राहुल गांधी को मानसिक दिवालियापन का शिकार बताया और कहा कि कर्नाटक की संप्रभुता की बात कोई कैसे कर सकता है| उन्होंने कहा कि क्योंकि गांधी परिवार टुकड़े टुकड़े सोच का शिकार हैं, इसलिए सोनिया गांधी ने ऐसी बात कही|

इसी मुद्दे पर शिकायत करने चुनाव आयोग पहुंची भाजपा की टीम में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव भी थे, उन्होंने सोनिया गांधी की तो शिकायत की ही| कांग्रेस के मेनिफेस्टो को भी टुकड़े-टुकड़े गैंग का एजेंडा करार देते हुए कहा कि सोनिया गांधी ने संप्रभुता शब्द का इस्तेमाल जानबूझकर किया है| केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक भाजपा की नेता शोभा करंदलाजे ने सोनिया गांधी पर देश की संप्रभुता को खतरे में डालने का आरोप लगाया है| सोनिया गांधी ने यह भाषण 6 मई को हुबली धारवाड़ में दिया था, जहां वह भाजपा से कांग्रेस में गए जगदीश शेट्टार के पक्ष में रैली को संबोधित कर रही थी|

इससे पहले भाजपा ने कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र में बजरंग दल को बैन करने की बात को घुमा कर बजरंग बली से साथ जोड़ दिया था| इस मुद्दे पर कांग्रेस की हालत इतनी पतली हो गई थी कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी. के. शिवकुमार ने कांग्रेस के सत्ता में आने पर प्रदेश में 80 हनुमान मन्दिर बनाने की बात कहनी शुरू कर दी थी| बजरंग दल ने कांग्रेस पर सौ करोड़ की मानहानि का नोटिस देकर उसे बचाव मुद्रा में ला दिया|

चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले के सभी सर्वेक्षण कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलने की भविष्यवाणी कर रहे थे, लेकिन प्रचार खत्म होने से 24 घंटे पहले के सर्वेक्षणों ने कांग्रेस और भाजपा में कड़े मुकाबले की भविष्यवाणी की है| क्योंकि बजरंग बली वाले मुद्दे और उससे पहले मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जहरीला सांप कहने से हवा का रूख बदल गया| हावेरी में एक जनसभा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जहरीला सांप बता दिया था| खड़गे के बयान को भी भाजपा ने तुरंत लपका और इसे प्रधानमंत्री का अपमान बता दिया, प्रधानमंत्री ने खुद भी इस मुद्दे को जमकर भुनाया|

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      पहले भी विवादित बयानों ने चुनाव में हार-जीत तय करने में बड़ी भूमिका निभाई है| गलतबयानी की वजह से अटल बिहारी वाजपेयी भी 1962 का चुनाव हार गए थे| बहुत पुरानी बातें न भी करें तो पिछले 16 सालों में 4 चुनाव में विवादित टिप्पणी ने जीत-हार तय करने में बड़ी भूमिका निभाई है| गुजरात में 2007 में चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने भाषण में मौत का सौदागर शब्द का प्रयोग किया था| सोनिया के इस बयान को भाजपा ने गुजरात की अस्मिता से जोड़ा और मुद्दा बना दिया| सोनिया गांधी ने यह बयान गुजरात दंगे के संदर्भ में दिया था| मोदी के खिलाफ मौत का सौदागर वाला यह बयान गुजरात चुनाव में कांग्रेस को भारी पड़ा| कांग्रेस 59 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा को रिकॉर्ड 117 सीटें मिल गईं थी| चुनाव में जीत के बाद नरेंद्र मोदी तीसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने|

      2014 में गोवा अधिवेशन के बाद जब भाजपा ने नरेंद्र मोदी को पीएम का दावेदार घोषित कर दिया था, तो सोनिया गांधी के करीबी मणिशंकर अय्यर ने कहा कि मोदी का दिल्ली में कोई काम नहीं है, अगर वह चाय बेचने आना चाहते हैं तो बेशक आ जाएं| भाजपा ने अय्यर के इस बयान को चाय वालों की बेईज्जती से जोड़ दिया और 2014 के चुनाव में भाजपा ने चाय पर चर्चा और चाय वाला पीएम जैसे कैंपेन की शुरुआत की| अय्यर के बयान ने कांग्रेस को लोकसभा में 44 सीटों पर पहुंचा दिया, जबकि भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार में आ गई| इसी तरह जब नरेंद्र मोदी ने बिहार विधानसभा चुनावों में नीतीश कुमार के डीएनए पर सवाल उठा दिया था| नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जेडीयू ने डीएनए के बयान को लेकर एक जोरदार अभियान चलाया| अभियान में बिहार के लोगों से नाखून और केस काटकर उसे जमाकर दिल्ली भेजने की बात कही गई| मोदी के इस एक बयान से भाजपा के बढ़ते कदमों को बिहार में ब्रेक लग गए थे| जदयू, राजद और कांग्रेस को 175 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत मिल गया था| जबकि भाजपा गठबंधन 60 से भी कम सीटों पर सिमट गया था|

      साल 2017 में गुजरात का चुनाव भाजपा के लिए बहुत मुश्किल हो गया था, क्योंकि कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति छोड़ कर राहुल गांधी को मन्दिर मन्दिर घुमाना शुरू कर दिया था| पहली बार कांग्रेस गुजरात में मजबूती से लड़ रही थी| पाटीदार आंदोलन की वजह से भी भाजपा का समीकरण गड़बड़ाया हुआ था| इसी बीच मणिशंकर अय्यर ने मोदी को नीच आदमी कह कर भाजपा को मुद्दा थमा दिया| अय्यर के बयान को भाजपा ने ओबीसी के अपमान से जोड़ दिया और अय्यर का यह बयान कांग्रेस के लिए भारी पड़ गया| इसी तरह 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी का खून के सौदागर और चौकीदार चोर वाला बयान भी कांग्रेस को बहुत महंगा पड़ा|

      जहरीला सांप, नालायक बेटा, कर्नाटक की संप्रभुता जैसी गलतियों के बावजूद कांग्रेस इस बार कर्नाटक विधानसभा का चुनाव ठीक उसी तरह लड़ रही है, जैसे 2017 में गुजरात विधानसभा का चुनाव लड़ा था, वह कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती| सोनिया गांधी पांच साल बाद किसी विधानसभा में चुनाव प्रचार करने बाहर निकली हैं| राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी पूरा जोर लगा दिया है| राहुल गांधी ने पहली बार प्रचार के नए तरीके अपनाए हैं| चुनाव प्रचार खत्म हो जाने के बाद 8 मई को भी वह कर्नाटक में डटे रहे, इतना ही नहीं बल्कि बेंगलूरू की लोकल बस पर चढ़ कर यात्रियों से बात करना, बस यात्रियों के साथ फोटो खिंचवाने, डिलीवरी ब्वायज के साथ खाना खाने जैसे जनता से सीधे जुड़ने के नए तरीके इस्तेमाल किए हैं| इससे लग रहा है कि कांग्रेस ने इस बार मोदी के जोरदार प्रचार की काट के नए तरीके खोज लिए हैं।

      (इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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