Punjab Governor: पंजाब में भी राज्यपाल और मुख्यमंत्री में छिड़ी है जंग

इस समय देश के कम से कम चार राज्यों के राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों में जंग छिड़ी हुई है। कुछ महीने पहले तक महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों की अपने अपने राज्यपालों से जंग छिड़ी हुई थी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति से राज्यपालों को हटाने की मांग की थी। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जंग तू तू मैं मैं तक पहुंच गई थी। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान की भी मुख्यमंत्री पिनियारी विजयन के साथ तकरार हुई, लेकिन उसे अपन जंग की श्रेणी में नहीं रख सकते। वहां अभी युद्धविराम की स्थिति है।
जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति बन चुके हैं और उस नाते राज्यसभा के सभापति हैं, तो उनकी तार्किक शक्ति का स्वाद समूचा विपक्ष भी चख रहा है। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी इस्तीफा दे चुके हैं। अब तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन और तमिलनाडू के राज्यपाल रवि की अपने अपने मुख्यमंत्रियों से आए दिन किसी न किसी मुद्दे पर तकरार होती रहती है। इन दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी राष्ट्रपति से उन्हें हटाने की मांग की है।

इन दोनों राज्यपालों की अपने अपने मुख्यमंत्रियों से वैसी ही जंग चल रही है, जैसी दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और उपराज्यपाल वीके सक्सेना में चल रही है। केजरीवाल उपराज्यपाल वीके सक्सेना के खिलाफ हर मंच का इस्तेमाल कर रहे हैं, और उपराज्यपाल मुख्यमंत्री के खिलाफ हर नियम कायदे का इस्तेमाल कर रहे हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना और मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की तू तू मैं मैं विधानसभा से लेकर सड़कों तक और राजभवन से लेकर हाईकोर्ट, सुप्रीमकोर्ट तक चल रही है।
जगदीप धनखड़ और ममता बनर्जी की जंग की जगह अब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने ली है। पिछले दिनों अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा की बैठक बुला कर उप राज्यपाल से पूछा था कि उन्हें तो दिल्ली की तीन करोड़ जनता ने चुना है, तुम कौन हो। अब हू-ब-हू यही शब्द पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को कह दिए हैं। भगवंत मान ने एक चिठ्ठी के जवाब में राज्यपालों की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए लिखा है कि वह राज्यपाल के प्रति नहीं अपनी तीन करोड़ जनता के प्रति जवाबदेय हैं, जिन्होंने उन्हें चुना है।
बनवारी लाल पुरोहित मौजूदा राज्यपालों में सबसे पुराने हैं। 82 साल के बनवारी लाल पुरोहित की राज्यपाल के तौर पर नियुक्ति 2016 में हुई थी, राज्यपाल के तौर पर यह उनका सातवाँ साल है। मोदी सरकार में इतनी लंबी अवधि तक पद पर रहने वाले वह एकमात्र राज्यपाल हैं, जो असम और तमिलनाडु के राज्यपाल भी रह चुके हैं। पेशे से पत्रकार और अखबार मालिक नागपुर से कांग्रेस और भाजपा के सांसद रह चुके हैं। आजकल उनकी पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ खतो-खिताबत की जंग चल रही है।
ताज़ा घटना 13 फरवरी की है, जब बनवारी लाल पुरोहित ने सिंगापुर भेजे जा रहे प्रधानाध्यापकों की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चिठ्ठी लिखी। अब यह बात समझ से बाहर है कि आम आदमी पार्टी की सरकारें किस बात की ट्रेनिंग के लिए चुनिंदा अध्यापकों को विदेश भेज रही हैं। पहले दिल्ली के अध्यापकों को यूरोप भेजने का मामला सामने आया, अब पंजाब के प्रधानाध्यापकों को सिंगापुर भेजने का मामला सामने आ रहा है।
भाजपा के एक नेता का आरोप है कि दिल्ली हो या पंजाब, अध्यापकों को चुनाव ड्यूटी पर रहते हुए आम आदमी पार्टी की मदद करने हेतु सरकारी खर्चे पर विदेश यात्रा का तोहफा दिया जा रहा है। दिल्ली के उपराज्यपाल ने विदेश यात्रा की फाईल पर साईन नहीं किए तो केजरीवाल सड़क पर उतर आए थे, फिर विधानसभा की विशेष बैठक बुला कर भाषण में कहा कि वह निर्वाचित मुख्यमंत्री हैं, उपराज्यपाल कौन होता है। अब भगवंत मान ने भी राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को केजरीवाल जैसी भाषा में जवाब दिया है।
बनवारी लाल पुरोहित ने 13 फरवरी को मुख्यमंत्री को लिखी चिठ्ठी में विदेश भेजे जाने वाले प्रधानाध्यापकों की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाया था, जिसमें उन्होंने पूछा था कि क्या अखबारों में विज्ञापन देकर उनका चयन हुआ है, उन्होंने यह भी पूछा था कि पहला बैच वापस लौट आया है, तो उन्हें बताया जाए कि उस पर सरकारी खजाने से कितना खर्च हुआ।
इसी चिठ्ठी में उन्होंने गुरिंद्रजीत सिंह जान्वड़ा को एक कॉरपोरेशन का चेयरमैन बनाने पर भी सवाल उठाया था। राज्यपाल ने लिखा था कि वह किडनेपिंग और जमीनों पर अवैध कब्जे करने का आरोपी है। इस चिठ्ठी के साथ राज्यपाल ने पिछले वे सभी मुददे भी उठाए थे, जिनका मुख्यमंत्री ने कोई जवाब नहीं भेजा था, जैसे एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में यूजीसी की गाईड लाईन को नजरअंदाज कर वायस चांसलर की अवैध नियुक्ति और अनुसूचित जाति के स्टूडेंट्स तक स्कालरशिप समय पर नहीं पहुंचने के कारण उनका परीक्षा में नहीं बैठ सकना आदि।
इस चिठ्ठी को क्योंकि राज्यपाल ने मीडिया को जारी कर दिया था, इसलिए अगले ही दिन राज्यपाल को भेजे जवाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दो टूक कहा उन्होंने जितने भी मुद्दे उठाए हैं, वे सभी राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र के मुद्दे हैं। उन्होंने यह भी लिखा कि तीन करोड़ पंजाबियों ने उन्हें चुना है और भारत के संविधान के मुताबिक़ वह जनता के प्रति जवाबदेह हैं। भाव यह था कि वह राज्यपाल को जवाबदेह नहीं है। हालांकि राज्यपाल ने 13 फरवरी को भेजी चिठ्ठी में मुख्यमंत्री के एक पुराने पत्र का हवाला दिया था, जिसमें उन्होंने करीब करीब ऐसी ही भाषा का इस्तेमाल किया था।
राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने लिखा था- "आपने मुझे लिखे एक पत्र में कहा था कि पंजाब की जनता के भारी जनादेश के कारण आप मुख्यमंत्री हैं, इस बात पर मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूँ, लेकिन आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि राज्य की जनता ने आपको संविधान के अनुसार प्रशासन चलाने के लिए चुना है, न कि अपनी सनक और कल्पना के अनुसार। भारत के संविधान की धारा 167 के अनुसार आप मेरे द्वारा पूछे गए पूरे विवरण और जानकारी देने के लिए बाध्य हैं, लेकिन आपने मेरे पहले के पत्रों में पूछे प्रश्नों पर कभी भी जवाब देने की परवाह नहीं की और मेरे सभी प्रश्नों को अवमानना के साथ व्यवहार किया। सम्बन्ध मधुर रखने के लिए मैंने इन पत्रों को प्रेस को नहीं दिया था, क्योंकि सोचा था कि आप संविधान के आदेश को पूरा करेंगे, लेकिन अब मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि आपने मेरे पत्रों को अनदेखा करने का फैसला किया है और मैं इन पत्रों को प्रेस/मीडिया को जारी करने के लिए मजबूर हूं। "
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस चिठ्ठी का जवाब तुरंत दिया, लेकिन इस पत्र में संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार पूछे गए सवालों के जवाब में कहा कि उन्होंने जितने भी सवाल पूछे हैं, वे सभी राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र के मुद्दे हैं, उन्हें तीन करोड़ जनता ने चुना है और संविधान के मुताबिक़ वह और उनकी सरकार अपनी तीन करोड़ जनता को जवाबदेय है।
लेकिन आगे उन्होंने दूसरे और अंतिम पैराग्राफ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पर सवाल दाग दिया, उन्होंने लिखा कि आप ने मुझ से सिंगापुर भेजे गए प्रिंसिपलों की चयन प्रक्रिया के बारे में पूछा है, लेकिन पंजाब की जनता पूछना चाहती है कि संविधान में स्पष्ट योग्यता तय न होने के बावजूद केंद्र सरकार विभिन्न राज्यों के राज्यपालों का चयन किस आधार पर करती है। कृपया इस बारे में बता कर पंजाबियों की जानकारी बढ़ाई जाए। जहां केंद्र सरकार हाईकोर्टों और सुप्रीमकोर्ट के जजों की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाकर सुप्रीमकोर्ट कॉलेजियम से जंग छेड़े हुए है, वहीं भगवंत मान ने राज्यपालों की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाकर कोलेजियम को अपने बचाव और केंद्र सरकार पर हमलावर होने का मुद्दा दे दिया है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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