CBI and ED: भ्रष्ट नेता की पार्टी देख कर जांच करने का संदेश गलत
भ्रष्टाचार का समर्थन कोई नहीं कर सकता, लेकिन देश में धारणा यह बनाई जा रही है कि विपक्ष के तो सारे नेता चोर हैं, लेकिन भाजपा के सारे नेता साधु संत हैं।

सीबीआई और ईडी ने विरोधी दलों के नेताओं पर कहर बरपा रखा है| कुछ मामलों में सीबीआई की जांच का तरीका पहली नजर में राजनीति से प्रेरित लगता है| इसी लिए सुप्रीमकोर्ट ने एक बार सीबीआई को एक ऐसा तोता कहा था, जो अपने मालिक की भाषा बोलता है| भ्रष्टाचार का समर्थन कोई नहीं कर सकता, लेकिन देश में धारणा यह बनाई जा रही है कि विपक्ष के तो सारे नेता चोर हैं, लेकिन भाजपा के सारे नेता साधु संत हैं| विपक्ष के नेता लगातार इस तरह के उदाहरण दे रहे हैं कि जिन नेताओं पर भाजपा के लोग भ्रष्ट होने का आरोप लगाया करते थे, वे सभी भ्रष्ट नेता भाजपा में शामिल होने के बाद पवित्र हो गए| इनमें ताज़ा नाम कोनार्ड संगमा का जुड़ा है|
मेघालय विधानसभा चुनावों से पहले संगमा का भाजपा से गठबंधन टूट गया था, तो भाजपा ने कोनार्ड संगमा पर अनेक आरोप लगाए थे| चुनाव घोषणा पत्र में वादा किया गया था कि भाजपा की सरकार बनने पर कोनार्ड संगमा के खिलाफ जांच बिठाई जाएगी| चुनाव नतीजों में 60 के सदन में भाजपा को सिर्फ 2 सीटें मिलीं तो भाजपा ने ही दौड़भाग करके कोनार्ड संगमा की सरकार फिर से बनवा दी|
विपक्ष की चार पार्टियां आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राजद और भारत राष्ट्र समिति इस समय केन्द्रीय जांच एजेंसियों सीबीआई और ईडी के निशाने पर हैं| आम आदमी पार्टी और भारत राष्ट्र समिति, दोनों दलों के नेता दिल्ली के शराब घोटाले की जांच में फंसे हुए हैं| जैसे दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दावा किया था कि सीबीआई फलां दिन मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार कर लेगी, उसी तरह तेलंगाना के मुख्यमंत्री चन्द्रशेखर राव ने दावा किया कि सीबीआई 11 मार्च को उनकी बेटी कविता को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लेगी| कविता जब दिल्ली के शराब घोटाले में पूछताछ के लिए राजधानी में ईडी के सामने पेश हुई, तो हैदराबाद में पोस्टर के जरिए भाजपा पर निशाना साधा गया| पोस्टर में ऐसे नेताओं को दिखाया गया था, जो पहले दूसरी पार्टी में थे और भाजपा में शामिल होने के बाद उनके खिलाफ मामले की जांच थम गई|
इन चारों राजनीतिक दलों के कई नेताओं के घरों व दफ्तरों पर छापेमारी की गई है| कई नेता गिरफ्तार किए जा चुके हैं और कई और जल्दी ही गिरफ्तार होने वाले हैं| नौकरी के बदले जमीन मामले में लालू यादव के परिवार के हर सदस्य से पूछताछ हो रही है| यह मामला उस समय का है जब लालू यादव यूपीए सरकार में रेल मंत्री हुआ करते थे| 2006-07 में एक कंपनी एके इंफोसिस्टम ने 6-7 जमीनें रजिस्ट्री कराईं थीं| उस समय रजिस्ट्री में लगभग 2 करोड़ की कीमत जमीनों की दिखाई गई थी, जबकि मार्केट वैल्यू लगभग 10 करोड़ थी|

बाद में इस कंपनी में राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने एंट्री कर ली थी| इस समय इस कंपनी के आधे शेयर राबड़ी देवी के पास हैं और आधे तेजस्वी यादव के पास हैं| अब तक 10 लोग ऐसे चिन्हित हो चुके हैं, जिन्हें रेलवे के ग्रुप डी की उस समय नौकरी मिली और इसके बदले उन्होंने अपनी जमीन की रजिस्ट्री लालू परिवार के सदस्यों के नाम की थी| जांच के दायरे में अब सीबीआई ने लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव की गर्भवती पत्नी राजश्री को भी शामिल कर लिया है, जबकि तेजस्वी यादव की शादी 2021 में हुई है|
10 मार्च को दिल्ली समेत कई जगहों पर लालू प्रसाद की तीन बेटियों चंदा, हेमा और रागिनी के अलावा बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के घर पर भी ईडी ने छापेमारी की| उसी समय तेजस्वी के दिल्ली वाले घर पर मौजूद लालू के परिवार के सभी सदस्यों से करीब 12 घंटे तक पूछताछ की गई| लंबी पूछताछ की वजह से तेजस्वी यादव की गर्भवती पत्नी को ब्लड प्रेशर की दिक्कत हो गईं और वह बेहोश हो गईं| इसके बाद उन्हें दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया|
लालू यादव की बेटी रोहिणी ने ईडी पर उनकी गर्भवती भाभी को परेशान करने के आरोप लगाए हैं| ईडी के अधिकारी जब तेजस्वी के घर पर पूछताछ कर रहे थे, रोहिणी आचार्य ने उसी समय ट्विट किया था, जिसमें उन्होंने लिखा कि "हम इस अन्याय को याद रखेंगे| सब कुछ याद रखा जाएगा| मेरी बहनों के 4 से 8 साल के छोटे बच्चों ने क्या अपराध किया है? मेरी गर्भवती भाभी ने क्या अपराध किया है? सभी को क्यों प्रताड़ित किया जा रहा है? सभी को आज सुबह से प्रताड़ित किया जा रहा है| एकमात्र इन लोगों का अपराध यह है कि लालू-राबड़ी परिवार फासीवादियों और दंगाइयों के सामने कभी नहीं झुका| इसका जवाब समय आने पर मिलेगा| अब यह सब असहनीय होता जा रहा है|"
लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने कई जायज सवाल उठाए हैं| लेकिन अहम सवाल यह है कि सीबीआई और ईडी क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर विरोधी दलों के नेताओं के खिलाफ धुंआधार लगी हुई है या अपने आप ही मालिक का तोता बनी हुई है| लाल कृष्ण आडवानी का एक कथन याद आता है, जब उन्होंने आपातकाल में कुछ मीडिया घरानों की भूमिका के बारे में कहा था कि "मीडिया तो रेंगने लगी जबकि उन्हें सिर्फ झुकने को कहा गया था|"
अगर सीबीआई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर ही विरोधी दलों के नेताओं के भ्रष्टाचार को सबूतों के साथ उजागर करने और उन्हें क़ानून के सामने पेश करने के लिए यह सब काम कर रही है, तो क्या इन जांच एजेंसियों को यह भी कहा गया होगा कि वे भ्रष्ट नेताओं के उन पारिवारिक सदस्यों को घेरे में ले आएं, जिनका कोई सीधा वास्ता नहीं, जैसे तेजस्वी यादव की पत्नी| भारतीय जनता पार्टी को इसका कोई चुनावी फायदा नहीं होगा| दिल्ली के एमसीडी चुनाव में यह देखा जा चुका है| भ्रष्टाचार के केसों की जांच होनी चाहिए, लेकिन यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि भ्रष्ट नेता का राजनीतिक दल देख कर ही जांच हो रही है|












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