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EWS and Income Tax: जिन्हें सरकार खुद EWS कहती है, उनसे इनकम टैक्स क्यों लेती है?

वित्तमंत्री द्वारा प्रस्तुत वर्तमान बजट में 7 लाख रूपये तक की आय पर टैक्स से छूट है। लेकिन इस छूट में एक बड़ा विरोधाभाष है। जब 8 लाख सालाना इन्कम वाले को सरकार खुद कमजोर वर्ग मानती है तो उनसे इनकम टैक्स क्यों लेती है?

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EWS and Income Tax: मोदी सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन की ओर से प्रस्तुत वर्तमान बजट में जिस एक बात की सर्वाधिक चर्चा हो रही है वह इन्कम टैक्स में मिली छूट है। लेकिन इनकम टैक्स के मामले में इस बजट में भी नाइंसाफियों को दूर नहीं किया जा सका है। एक तरफ सरकार ने आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों यानी ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था कर रखी है, यह कहते हुए कि उन्हें सहारे की ज़रूरत है, दूसरी तरफ वह इनके भी एक हिस्से पर बेदर्दी से टैक्स लगाए जा रही है।

सरकार ने खुद ही 8 लाख रुपये तक की आमदनी वाले लोगों को अन्य कुछ शर्तों के साथ आर्थिक रूप से कमज़ोर माना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ पुरानी टैक्स व्यवस्था में 5 लाख रुपये और नई टैक्स व्यवस्था में 7 लाख रुपये तक ही टैक्स से छूट मिली हुई है। इतना ही नहीं, पुरानी व्यवस्था में 5 लाख या नई व्यवस्था में 7 लाख से 1 रुपया भी ऊपर हो जाए, तो फिर टैक्स छूट क्रमशः ढाई लाख रुपये और 3 लाख रुपये तक ही मिल पाती है।

हालांकि पुरानी टैक्स व्यवस्था में कुछ खास तरह के निवेश पर कुछ टैक्स छूट भी दी जाती है, जो नई व्यवस्था में नहीं दी जाती है। लेकिन सरकार की ईडब्ल्यूएस की परिभाषा को देखते हुए ये दोनों ही टैक्स व्यवस्थाएं अतार्किक हैं। नई टैक्स व्यवस्था, जिसे वह क्रांतिकारी बता रही है, उसमें भी वह 8 लाख रुपये इनकम वाले आदमी से 35 हज़ार रुपये टैक्स वसूल लेगी। इसलिए सरकार को यह विरोधाभास दूर करना चाहिए। या तो वह ईडब्ल्यूएस की परिभाषा सुधारे, या फिर इस दायरे में आने वाले किसी भी व्यक्ति से उसे इनकम टैक्स नहीं लेना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते रहे हैं कि 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी कर देंगे। केंद्रीय बजट 2023-24 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने अपने भाषण में किसानों की आमदनी के बारे में तो स्पष्ट कुछ नहीं कहा, लेकिन ये जरूर बताया कि लगभग 9 वर्ष की मोदी सरकार में देश में प्रति व्यक्ति आय दोगुनी होकर 1.97 लाख रुपये गई है। हालांकि इन नौ वर्षों में महंगाई भी काफी बढ़ी है और रूपये का अवमूल्यन भी खूब हुआ है, फिर भी इस तरह के आंकड़े सुनने में तो अच्छे ही लगते हैं।

वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ के सदस्यों की संख्या मोदी सरकार के नौ वर्षों में दोगुनी होकर 27 करोड़ तक पहुंच गई है। इससे ऐसा लगता है कि इन वर्षों में सरकारी नहीं तो प्राइवेट सेक्टर में ही सही, रोज़गार के अवसर भी दोगुने हो गए हैं।

पिछले 9 साल की उपलब्धियों का बखान करते हुए वित्त मंत्री ने 2023-24 का बजट अगले 25 साल का सपना दिखाते हुए पेश किया। इसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर ज़ोर देने के साथ ही हरित और समावेशी विकास की बात की गई है। कैपिटल इन्वेस्टमेंट को 33 प्रतिशत बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो कि 2019-20 की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा है। 50 नये एयरपोर्ट, हेलीपोर्ट, वाटर एयरोड्रम इत्यादि का निर्माण किया जाएगा। बंदरगाहों, कोयला, इस्पात, उर्वरक और खाद्यान्न सेक्टर के लिए 75 हजार करोड़ के निवेश से लगभग 100 सड़क परियोजनाओं का निर्माण होगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के लिए बजट में 2 लाख 70 हज़ार करोड़ रुपये, जबकि रेल मंत्रालय का बजट 2 लाख 41 हजार करोड़ रुपये रखा गया है।

चीन की तरफ से लगातार आ रही चुनौतियों के मद्देनज़र सरकार चौकस और गंभीर दिखाई देती है। इस साल के रक्षा बजट में 69 हज़ार करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी करते हुए 5 लाख 94 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है। 2013-14 में यह केवल 2 लाख 3 हज़ार करोड़ रुपये था। यानी मोदी सरकार के नौ साल में रक्षा बजट भी लगभग तीन गुना बढ़ गया है। हालांकि चीन के रक्षा बजट की तुलना में अभी भी यह एक तिहाई ही ठहरता है। लेकिन कुल 45 लाख करोड़ रुपये के बजट में लगभग 6 लाख करोड़ रुपये देश की रक्षा के नाम कर देना बजटीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण परिघटना है।

इसी तरह कृषि क्षेत्र को बूस्टर डोज़ देने के लिए कृषि ऋण के लक्ष्य को 20 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने की बात की गई है। इसमें पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन क्षेत्र भी शामिल हैं। देश की 63 हजार प्राथमिक कृषि ऋण सोसाइटी यानी पैक्स का कंप्यूटरीकरण किया जाएगा। युवा उद्यमी गांवों में एग्री-स्टार्ट अप खोल सकें, इसके लिए एक एग्रीकल्चर एक्सीलरेटर फंड बनाया जाएगा। मोटे अनाजों यानी मिलेट, जैसे कि ज्वार, बाजरा, रागी, कुट्टू, रामदाना, कंगनी, कुटकी, कोदो, चीना और सामा इत्यादि को "श्री अन्न" का नाम दिया गया है। भारत विश्व में इनका सबसे बड़ा उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। दुनिया में इनकी बढ़ती मांग को देखते हुए हैदराबाद स्थित भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान को वैश्विक स्तर पर कार्य करने में सक्षम बनाने के लिए एक उत्कृष्टता केंद्र के रूप में बढ़ावा दिया जाएगा।

स्वास्थ्य, शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट के लिए भी कुछ सराहनीय कदम उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य के लिए 89 हजार करोड़ रुपये, जबकि शिक्षा के लिए 1 लाख 12 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। 2014 से अब तक देश भर में खोले गये 157 मेडिकल कॉलेजों में अब नर्सिंग कॉलेज भी स्थापित किये जाएंगे। 3.5 लाख जनजातीय छात्रों के लिए चलाए जा रहे 740 एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों में अगले तीन वर्षों में 38 हज़ार शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। स्किल डेवलपमेंट के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 लॉन्च की जाएगी।

डिजिटल इंडिया मिशन को आगे बढ़ाने के लिए कई नई घोषणाएं की गई हैं। बच्चों और किशोरों के लिए अलग-अलग इलाकों, भाषाओं, विषयों और स्तरों में गुणवत्तापूर्ण पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी खोली जाएगी। इसके साथ ही राज्यों को पंचायतों और वार्ड स्तरों तक प्रत्यक्ष पुस्तकालय स्थापित करने और राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी तक पहुंच बनाने के लिए सक्षम किया जाएगा। एक लाख प्राचीन पुरालेखों का डिजिटलीकरण करते हुए एक डिजिटल पुरालेख संग्रहालय भी बनाया जाएगा। अदालतों के डिजिटलीकरण के लिए ई-कोर्ट फेज-3 की शुरुआत की जाएगी। देश के तीन शैक्षणिक संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस केंद्रों की स्थापना की जाएगी।

गरीबों, महिलाओं, किसानों, अन्य पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों की दृष्टि से भी बजट में काफी कुछ है। 80 करोड़ लोगों को इस साल भी खाद्यान्न मुफ्त दिये जाएंगे। इस पर आने वाले लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के खर्च की पूरी ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार ही वहन कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना का बजट 66 प्रतिशत बढ़ाकर 79 हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है। जल जीवन मिशन के बजट को 60 हजार करोड़ से बढ़ाकर 70 हज़ार करोड़ रुपये कर दिया गया है। अब तक लगभग 9 करोड़ ग्रामीण घरों को पेयजल कनेक्शन दिया जा चुका है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए काम कर रहे 81 लाख स्वयं सहायता समूहों को बड़े उत्पादन उद्यमों और समूहों से जोड़कर कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर उत्पादों की बेहतर डिजाइन, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और मार्केटिंग तक में सहायता दी जाएगी। पीएम विश्वकर्मा कौशल सम्मान के ज़रिए अनुसूचित जातियों, जनजातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों और कमज़ोर वर्गों के लोगों को फायदा पहुंचाने की बात की गई है।

कुल मिलाकर बजट में हर वर्ग तक सरकारी योजनाओं के जरिए पहुंचने की बात स्पष्ट रूप से दिखती है। हालांकि आयकर और ईडब्लूएस के विरोधाभाष को भविष्य के बजटीय प्रावधानों में मिटाने की जरूरत है।

यह भी पढ़ें: Budget 2023-24: भविष्य की चिंता में वर्तमान की अनदेखी तो नहीं?

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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