Budget 2023-24: सप्तर्षि सिद्धांत से बना मनभावन बजट
वित्तमंत्री ने अपने बजट भाषण में निर्धारित सात लक्ष्यों को पाने के लिए सप्तर्षि सिद्धांत की घोषणा की है। सात सिद्धांतों को ध्यान में रखकर बनाया गया यह बजट निश्चित रूप से जनता के लिए मनभावन बजट साबित होगा।

जैसा वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने बजट से पहले इशारा किया था वैसा ही कुछ बजट में देखने को भी मिला। 7 लाख तक की आय वालों को अब जीरो इनकम टैक्स लगेगा। हालांकि यह नई टैक्स रेजिम के लिए है फिर भी इस स्लैब में देश के निम्न मध्य वर्ग की एक बड़ी आबादी आ जायेगी जिसकी सालाना आय 7 लाख तक है तथा निवेश कम है, या बिल्कुल नहीं है। उच्च मध्य वर्ग को उतनी बड़ी राहत नहीं है सिवाय सेस को छोड़ कर। यदि कुल आर्थिक प्रभाव की बात करें तो यह काफी अच्छा बजट माना जायेगा और देश की वित्तीय क्षमता के निर्माण के साथ उसे मजबूत करेगा।
निम्न मध्य वर्ग के लिए सबसे बड़ा बूस्टर डोज पीएम विश्वकर्मा कौशल सम्मान की घोषणा रहा। उत्तर प्रदेश सरकार के विश्वकर्मा श्रम सम्मान की तर्ज पर पीएम विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना शुरू करना भी निम्न मध्य वर्ग को आर्थिक मजबूती प्रदान करेगा। इनके कौशल के साथ उनकी आर्थिक परिस्थिति में निखार तो आएगा ही, यह नीचे से ऊपर की तरफ विकास का प्रवाह ले जाएगा।
माइक्रो लेवल पर इनसे जुड़े दुकानदारों जैसे कि मेटल, हार्डवेयर, टेक्सटाइल, बिल्डिंग मैटेरियल आदि में जब बिक्री बढ़ेगी तो स्टील उद्योग, टेक्सटाइल उद्योग, सीमेंट उद्योग समेत कई उद्योगों की बिक्री और मांग बढ़ेगी। सभ्यता के शुरू से जो इस पृथ्वी का पहला उद्योग है उसे रेखांकित करना मतलब कि सनातन अर्थव्यवस्था को मजबूत करना हुआ। माइक्रो स्तर के विकास का अगला बड़ा प्रावधान रहा 81 लाख महिलाओं के सेल्फ ग्रुप को अपग्रेड कर, एक बड़े सूत्र में जोड़ बड़ी आपूर्ति के लिए सक्षम बनाना।
इस बजट का सार वित्त मंत्री ने सनातन अर्थशास्त्र के अन्तर्निहित उद्देश्यों में निहित सप्तर्षि सिद्धांतों के माध्यम से दिया। बकौल वित्त मंत्री अमृत काल का यह सप्तर्षि सूत्र आपस में पूरक भी है। ये सप्तर्षि हैं समावेशी विकास, अंतिम छोर तक पहुंचना, बुनियादी ढांचा और निवेश, क्षमता को उभारना, हरित विकास, युवा शक्ति और वित्तीय क्षेत्र। वित्त मंत्री की योजना इन सप्तर्षि सिद्धांतों के माध्यम से देश की क्षमता निर्माण के साथ देश की संभावनाओं का दोहन करना भी है।
निम्न और निम्न मध्यम वर्ग की अगली कड़ी में सरकार ने कृषि पर इस बार तकनीकी और युवाओं को जोड़ने के लिए एग्रो स्टार्ट अप और कृषि अक्सेलरेशन फंड की स्थापना कर एक अच्छा प्रयास किया है। इससे युवा भी जुड़ेगा, उसे रोजगार तो मिलेगा ही, उसके ज्ञान और कौशल का लाभ किसानों को भी मिलेगा जिससे वह अछूते रह जाते हैं।
आयुर्वेद और योग के बाद मोटे अनाज के क्षेत्र में श्री अन्न की शुरुआत करना भी एक अच्छा कदम है। यह किसानों को समृद्ध करने के साथ देश का स्वास्थ्य भी ठीक करेगा। बीमारी का खर्चा कम होगा और लोगों की बचत भी बढ़ेगी। वैसे भी मोटे अनाज कमोबेश सस्ते होते हैं। प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने हेतु बजट में भारत को इस श्री अन्न का ग्लोबल हब बनाने के लिए भारतीय मिलेट्स अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जायेगा।
सरकार ने कृषि क्षेत्र में तरलता लाने के लिए कृषि ऋण लक्ष्य जिसमें पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन भी शामिल हैं, को बढ़ाकर 20 लाख करोड़ रुपए कर दिया है। कृषि में सहकारिता को बढ़ाने के लिए एक नेशनल सहकारिता डाटा बेस की भी घोषणा हुई है। स्वास्थ्य पर भी सरकार ने काफी अच्छी घोषणाएं की हैं। स्वास्थ्य इंफ़्रा और क्षमता निर्माण के साथ ही वर्ष 2047 तक देश को एनीमिया मुक्त करने का संकल्प एक अच्छा कदम है। पीएम आवास योजना के तहत बजट में 66 फीसदी की बढ़ोत्तरी कर 79000 करोड़ का प्रावधान बताता है कि 2024 के चुनाव से पहले सरकार सबको छत मुहैया कराना चाहती है।
अगर बजट में खर्चे का आकार देखें तो रक्षा खर्चों के 5.94 लाख करोड़ के बाद 2.70 लाख करोड़ सड़क इंफ़्रा, 2.41 लाख करोड़ रेल और साथ में 50 एयरपोर्ट के विकास की घोषणा बताता है कि सरकार का कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान है। वह देश के लैंड लॉक को तोड़कर एक बड़े वैल्यू को अनलॉक करना चाहती है। इंफ़्रा पर 13.7 लाख करोड़ की घोषणा जो कि जीडीपी का 5 फीसदी है, के साथ पूंजीगत खर्चों पर 10 लाख करोड़ का प्रावधान बताता है कि सरकार इंफ़्रा के विकास के अपने संकल्प को बरक़रार रखे हुए है।
स्थानीय स्तर पर शहरी विकास की कई योजनाओं की घोषणा के साथ इस बजट में उन्हें म्युनिसिपल बांड के लिए तैयार करना यह बताता है कि सरकार उन्हें वित्तीय आत्मनिर्भर बनाने की तरफ कदम बढ़ा रही है। सरकार का पूरा लक्ष्य भविष्य के लिए आत्मनिर्भर शहर बनाने की ओर है। इज ऑफ़ डूइंग बिजनेस में भी छोटे छोटे व्यापारियों और आम आदमी के बैंक अकाउंट खुलवाने से लेकर अन्य जगह आ रही समस्याओं को देखते हुए पैन कार्ड को जनरल आईडी कार्ड बनाना यह सबसे आराम देने वाली घोषणा है।
इस घोषणा से ही बैंक अकाउंट खुलवाना और आसान होगा तथा देश की समानांतर इकॉनमी की मैपिंग में सहायता मिलेगी। सरकार ने ग्रीन इकॉनमी के प्रति अपने संकल्पों को दुहराते हुए कई घोषणाएं की है। यह सब 2070 तक भारत में शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में बढ़ता हुआ कदम है। यह घोषणा देश के कई उद्योगों के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में कार्य करेगा।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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