गुजरात चुनाव के लिए केजरीवाल का अंतरराष्ट्रीय अभियान

राजनीति में दिखावे के लिए भले ही राष्ट्र सेवा और जन सेवा का काम सबसे अहम हो, लेकिन असल में राजनीति शुद्ध रूप से सिर्फ और सिर्फ चतुराई और शातिरपन का एक ऐसा अलबेला खेल है, जहां जो जितना चतुर और शातिर हो उतना ही तेजी से सफल होता है। इसीलिए, अब कम से कम यह समझने में कोई शक नहीं है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जितने सीधे और सरल दिखते हैं, असल में वे वैसे आदमी नहीं है।

arvind Kejriwals outreach to NRIs for Gujarat elections

केजरीवाल को भाजपाइयों की तरह राष्ट्रवादी और कांग्रेसियों की तरह गांधीवादी जैसे किसी भी निश्चित विचारधारा वाले व्यक्ति के तौर पर मानना भी एक भूल होगी। क्योंकि केजरीवाल की कोशिशों व उन कोशिशों में मिली उनकी कामयाबी का आंकलन करें, तो वे स्वयं को शुद्ध रूप से एक दुनियादार इंसान के रूप में साबित करते हैं। एक ऐसा व्यक्ति जो बेहद सामान्य तौर तरीकों से आम आदमी के दिलों में उतरने का हर तरीका जानता है और लोगों से लगाव बढ़ाकर अपनी सफलता के रास्ते गढ़ लेता है।

इन्हीं तरीकों को इस्तेमाल करके केजरीवाल अब तक सफल रहे हैं और सफलता का वही तरीका अपनाकर अब उनकी दुनिया भर में बसे भारतीयों के दिलों में उतरने की अभिलाषा है, जिसे वे घोषित भी कर चुके हैं और आगे भी बढ़ चुके हैं। जहां मुकाबले में सीधे नरेंद्र मोदी है, बाकी कोई नहीं, राहुल गांधी तो कतई नहीं।

पहले दिल्ली और फिर पंजाब को लुभाने में सफल होने के बाद अब केजरीवाल गुजरात में गजब ढाने की फिराक में हैं। लेकिन इस बीच उन्होंने भारत को दुनिया का नंबर-1 देश बनाने के मिशन के तहत एक मिस्ड कॉल नंबर जारी करके दुनिया भर के हिंदुस्तानियों से जुड़ने की जुगत लगाई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने लगभग अहंकारी अंदाज में कहा है कि ब्रह्मांड की शक्तियां हमारे साथ हैं, और सभी 130 करोड़ भारतीयों को मिलकर भारत को नंबर वन बनाना है।

वे न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी दिल्ली के स्कूलों के सबसे बेहतरीन होने की खबर को इस सपने के साकार होने की शुरुआत बताते हुए लगभग झूमते हुए कहते है कि समय लगेगा, मेहनत लगेगी, लेकिन हम भारत को दुनिया का नंबर वन देश बनाएंगे। इन पार्टियों और नेताओं के भरोसे हम देश को बिल्कुल नहीं छोड़ सकते। और, केजरीवाल जब यह कह रहे थे, तो साफ तौर पर वे देश की बाकी पार्टियों व अन्य नेताओं से स्वयं को अलग साबित कर रहे थे। वे यहीं नहीं रुके, आगे बोले कि अमेरिका ही नहीं हर बड़े देश की खबरों में भारत की कामयाबियां होंगी। मुश्किलें आएंगी, अड़चनें भी आएंगी लेकिन अब भारत रुकेगा नहीं, इन पार्टियों के सामने झुकेगा नहीं।

भारत के भले और भोले लोग तो यही जान रहे हैं कि देखो, बेचारा एक छोटे से प्रदेश का मुख्यमंत्री समस्त संसार में भारत को महान बनाने के मिशन पर निकल पड़ा है। जो काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अकेले ही किए जा रहे हैं, उसी काम में केजरीवाल भी देश के लिए निकल पड़े हैं, तो गलत क्या है। लेकिन असल में केजरीवाल के दिमाग को समझने के लिए सबसे पहले हम गुजरात चलते हैं, जहां विधानसभा चुनाव होने ही वाले हैं और उनकी आम आदमी पार्टी वहां पर अपनी जगह बनाने की जबरदस्त कोशिश में हैं।

दरअसल, केजरीवाल जानते हैं कि घर परिवार के सभी लोगों से सीधे जुड़ने की मुश्किलें, कुटुंब के किसी कमाऊ पूत से दोस्ती के जरिए ज्यादा आसान हो जाती हैं। क्योंकि कमाने वाले की बात घर में सभी सुनते हैं और परिवार में चलती भी उसी की है। इसीलिए, केजरीवाल ने अपने भुवन मोहिनी अंदाज में सारे संसार में छा जाने की ललक के तहत भारत को दुनिया का नंबर-1 देश बनाने का यह मिशन शुरू किया है, जिसकी तह में तो असल मंशा, गुजरात में जगह बनाने की है।

केजरीवाल जानते हैं कि हर साल लगभग सवा लाख भारतीय विदेशों में जाकर बस रहे हैं और भारत से बाहर रहने वाले भारतीयों की संख्या, अब 2 करोड़ 25 लाख के आसपास हैं, उनके राज्य दिल्ली से करीब 35 लाख ज्यादा। संयुक्त राष्ट्र में शामिल 190 देशों में से 129 देशों में गुजराती सबसे ज्यादा बसे हुए हैं, जिनमें से साढ़े 5 लाख तो अकेले पटेल ही हैं। दूसरे देशों में रह रहे भारतीयों में से लगभग 26 फीसदी लोग गुजरात के हैं। वैसे विश्व गुजराती समाज की एक रिपोर्ट में तो यह आंकड़ा 33 प्रतिशत होने का दावा है।

सन 2000 की जनगणना में अमेरिका में भारतीयों की संख्या दस लाख से ज्यादा थी। उन में से लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा लोग पटेल हैं। इंग्लैंड में 16 लाख, अमेरिका में 11 लाख, कनाडा में ढाई लाख, ऑस्ट्रेलिया में साढ़े 3 लाख, सहित अकेले खाड़ी देशों में लगभग 55 लाख भारतीय हैं। इनके अलावा अफ्रीका, केन्या, बेल्जियम, हॉगकॉग सहित अनेक देशों में भी बड़ी संख्या में भारतीय हैं, जिनमें गुजराती ही सबसे ज्यादा है।

बीते 5 साल में कुल 4 लाख गुजराती विदेश जा चुके हैं। नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री काल में 2001 से 2021 तक 60 लाख गुजराती विदेश जा चुके हैं। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से पिछले 7 वर्षों में, गुजरात से विदेश जाने वालों नागरिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। केजरीवाल जानते हैं कि ये गुजराती भले ही विदेशों में बसे हैं, लेकिन उनकी आत्मा गुजरात में बसती है और उस आत्मा में गुजरात बसता है।

गुजरातियों के इसी भावनात्मक लगाव को साधते हुए केजरीवाल गुजरात में चुनाव के बहाने सबसे पहले दुनिया भर में बसे गुजरातियों के दिलों में उतरने की फिराक में है। बाकी भारतीयों में भी उनके मिशन का सीधा असर तो होगा ही।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केजरीवाल की हर मामले में होड़ सदा से रही है। यह होड़ 'तू डाल डाल, मैं पात पात' वाले रिश्ते जैसी है, जिसमें हर हाल में हार न मानने वाले केजरीवाल कभी सफल, तो कभी सफलता के करीब और कभी कभार सफलता के पथ पर अग्रसर होते दिखते हैं। फिर नरेंद्र मोदी की सरकार भी केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी व उसके नेताओं को निशाने पर रखे रहती है, इसके कारण अन्य नेताओं और दूसरी पार्टियों के बदले केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी ही चर्चा के केंद्र में रहती है। फिर भले ही वह मनीष सिसोदिया के घर पर छापे हो या कोई और मामला, खबरों में तो केजरीवाल और उनकी पार्टी ही रहती है।

कांग्रेस देश की पुरानी पार्टी है, बड़ी भी, और बड़े बड़े नेताओं वाली भी। लेकिन केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की तस्वीर कांग्रेस के मुकाबले लगातार बड़ी होती जा रही है। या इसे यूं भी समझा जाना चाहिए है कि मोदी सरकार की एजेंसियों की असरकारक कार्रवाई को केजरीवाल और उनकी पार्टी अपने समर्थन में उपयोग कर रहे हैं। केजरीवाल की इस दुनियादारी को देखते हुए किसी भी सामान्य व्यक्ति को भी यह तो समझ में आ ही रहा है कि आने वाले वक्त में आम आदमी पार्टी गुजरात में कांग्रेस के लिए बहुत बड़ा झटका साबित होगी और कोई आश्चर्य नहीं कि गुजरात में कांग्रेस की ज्यादातर सीटों की हार का कारण भी वही बने।

लेकिन कांग्रेस केजरीवाल की इन कलाबाजियों को को समझे तब न। वैसे भी, गुजरात में अब वक्त कांग्रेस के हाथ से निकल गया लगता है और राहुल गांधी भी कोई बहुत दमदार नेता के तौर पर देश में नयी ताकत नहीं दिखा पा रहे हैं। ऐसे में गुजरात के बहाने केजरीवाल ने सारे संसार में अपना परचम लहराने की जो मुहिम शुरू की है, आप चाहें तो उसे राजनीति में केजरीवाल के कलयुगी अश्वमेघ यज्ञ की संज्ञा दे सकते हैं। वो मोदी के विकल्प के तौर पर देश में ही नहीं दुनिया में भी अपने आप को प्रस्तुत करने निकल पड़े हैं।

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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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