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UFO खोज की आड़ में चीन कहीं भारत के खिलाफ साजिश तो नहीं रच रहा ?

नई दिल्ली, 07 जुलाई। अमेरिकी जासूसी संस्था सीआइए ने भारत में यूएफओ देखे जाने की एक रिपोर्ट तैयार की थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि मार्च 1968 से अप्रैल 1968 के बीच भारत और उसके आसपास छह बार यूएफओ को आकाश में उड़ते देखा गया था।

world mystery china plotting against India under the guise of UFO discovery?

4 मार्च 1968 को रात करीब एक बजे लद्दाख के चांग ला, फुकचे और कोयुल में आसमान के ऊपर एक लाल रंग की तेज रोशनी दिखी जिसके पीछे उजले रंग के धुएं का गुबार था। इसके पहले आसमान में एक उजली रोशनी फैली और लगातार दो तेज आवाज हुई। इसके अगले दिन भी रात में ऐसा ही नजारा देखने को मिला। इसके आलावा नेपाल के पूर्वोत्तर, सिक्किम के उत्तर और भूटान के पश्चिम में चमकती हुई रहस्यमयी चीज देखी गयीं। सीआइए का मानना था कि ये रहस्यमयी रोशनी और आवाज यूएफओ की थी।

सामरिक महत्व के इलाकों में UFO

सामरिक महत्व के इलाकों में UFO

सीआइए ने भारत के जिन इलाकों में यूएफओ देखे जाने का जिक्र किया है वे सामरिक रूप से बहुत संवेदनशील हैं। चंग ला एक पहाड़ी दर्रा है जो लेह से पैगोंग झील जाने के रास्ते पर अवस्थित है। भारत-चीन सीमा विवाद में पैगोंग झील की अवस्थिति बहुत महत्वपूर्ण है। पिछले साल चीन ने पैंगोंग झील के फिंगर फोर क्षेत्र में अपने तंबू गाड़ लिये थे। जब भारत ने भी जवाबी कार्रवाई की धमकी दी तो इस साल फरवरी में चीन ने वहां से अपना डेरा-डंडा उखाड़ा। फुकचे लद्दाख के डोमचक सेक्टर में एक एडवांस लैंडिंग ग्राउंड है। 1962 की लड़ाई में भारत ने यहां एक अस्थायी हवाईअड्डा बनाया था। फुकचे, भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा से केवल ढाई किलोमीटर ही दूर है।

धातु की तश्तरीनुमा विशाल आकृति

धातु की तश्तरीनुमा विशाल आकृति

तीसरा संदिग्ध इलाका कोयुल है। कोयुल लेह जिले की नयोमा तहसील का एक गांव है जो कोयुल लुंगपा नदी के किनारे अवस्थित है। चीन के खिलाफ सैन्य दबाव बनाने में फोकचु का विशिष्ट सामरिक महत्व है। सीआइए की रिपोर्ट में कहा गया था कि नेपाल के पोखरा जिले के बाटुलचौर इलाके में 25 मार्च 1968 को एक विस्यमयकारी घटना देखी गयी थी। बाटुलचौर में रात को 8 बज कर 15 मिनट पर आसमान में एक बहुत बड़ी धातु की तश्तरीनुमा आकृति देखी गयी थी जिसकी ऊंचाई करीब चार फीट और चौड़ाई करीब छह फीट थी। लगातार दो धमाकों जैसी आवाज हुई। फिर लाल और सफेद रंग का धुआं जैसा निकलने लगा। नेपाल का पोखरा जिला चीन की सीमा से नजदीक है।

भारत-अमेरिका रिश्ते में तल्खी

भारत-अमेरिका रिश्ते में तल्खी

सीआइए ने भारतीय खूफिया एजेंसियों से ये रिपोर्ट साझा की था या नहीं, यह जानकारी नहीं है। लेकिन उस समय भारत और अमेरिका के रिश्तों में काफी कड़वाहट थी। मार्च -अप्रैल 1968 के दौरान लिंडन बी जॉनसन अमेरिका के राष्ट्रपति थे और उनका कार्यकाल खत्म होने ही वाला था। उस समय इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री थीं और उन्हें कांग्रेस के अंदर से ही चुनौती मिल रही थी। मोरार जी देसाई और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इंदिरा गांधी पर अंकुश रखना चाहते थे। भारत की विदेशनीति उस समय सोवियत संघ (रूस) की तरफ झुकी हुई थी। 1968 के चुनाव में जब रिचर्ड निक्सन अमेरिका के राष्ट्रपति बने तो भारत के साथ रिश्ते और खराब हो गये। दूसरी तरफ इंदिरा गांधी पूरी तरह से सोवियत संघ के समर्थन में आ गयी ।1969 में जब मोरारजी देसाई के नेतृत्व में कांग्रेस का विभाजन हुआ तो इंदिरा सरकार अल्पमत में गयी। तब इंदिरा गांधी ने साम्यवादी दलों और निर्दलियों के समर्थन से सरकार बचायी थी। कहा जाता है कि सोवियत संघ के कहने पर ही साम्यवादी दलों ने इंदिरा गांधी को समर्थन दिया था। भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव की वजह से सीआइए की यूएफओ से संबंधित खोज परवान नहीं चढ़ सकी।

भारत के खिलाफ कोई चीनी साजिश तो नहीं ?

भारत के खिलाफ कोई चीनी साजिश तो नहीं ?

क्या चीनी सीमा के पास यूएफओ का देखा जाना भारत के लिए खतरा है ? 1968 की बात और थी। तब और अब की स्थिति में जमीन आसमान का अंतर आ चुका है। भारत की बढ़ती हुई ताकत से चीन परेशान है। इसलिए उसने पिछले एक साल से भारतीय सीमा पर तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है। चीन यूएफओ को इंटरसेप्ट करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा ले रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ( कृत्रिम बुद्धिमत्ता) कम्प्यूटर विज्ञान की वह शाखा है जिसका काम है मनुष्य की तरह सोचने और फैसला लेने वाला बुद्दिमान मशीन बनाना। चीन इस दिशा में बहुत आगे बढ़ चुका है। चीन की सेना (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) ने अपने रडार में कैद यूएफओ से जुड़ी कई जानकारियां इकट्ठा की हैं। इससे संबंधित सभी डाटा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को फीड कर दिया गया है। इसके अलावा चीन यूएफओ टेकनोलॉजी को समझने के लिए शिनजियांग प्रांत के लोपनूर में एक खुफिया एयरबेस विकसित कर रहा है। यह क्षेत्र भारतीय सीमा से नजदीक है। लोपनूर चीन का परमाणु परीक्षण स्थल रहा है। चीन पर आरोप लगा था कि उसने 2019 में यहां जमीन के नीचे कम क्षता वाले परमाणु बम का परीक्षण किया था। यूएफओ खोज की आड़ में चीन कहीं भारत के खिलाफ कोई साजिश तो नहीं कर रहा ?

(जारी है एलियंस का कहानी)

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