शतरंज में ट्रांसजेंडर खिलाड़ी महिलाओं के खेल से बैन

शतरंज में ट्रांसजेंडर खिलाड़ी

फीडे के नाम से जाने जाने वाले शतरंज संघ ने नए नियमों की इसी महीने अनुमति दी और ये 21 अगस्त से लागू हो जाएंगे. संघ ने कहा है कि बैन के साथ साथ वह सभी पहलुओं का "गहन विश्लेषण" भी करेगा. इस प्रक्रिया में दो साल तक लग सकते हैं.

नए नियमों के मुताबिक ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को इस बात का "पर्याप्त सबूत देना होगा कि उन्होंने उनके देश के कानून और नियमों के अनुसार लिंग परिवर्तन" कराया है.

दूसरे खेलों की तर्ज पर

संघ ने आगे कहा है कि सबूत देने के बाद भी "अगर किसी खिलाड़ी ने मेल जेंडर से फीमेल मेंपरिवर्तन करवाया है, तो उसे महिलाओं के लिए आयोजित फीडे के आधिकारिक इवेंट्स में हिस्सा लेने का कोई अधिकार नहीं है, जब तक फीडे इस पर आगे कोई फैसला नहीं ले लेता."

अभी तक इस तरह के कदम जिन खेलों में उठाये गए हैं उनमें भारी शारीरिक गतिविधि शामिल होती है, लेकिन शतरंज में ऐसा नहीं हैं.

संघ के मुताबिक वह यह "मानता है कि यह शतरंज के लिए एक विकसित होता हुआ मुद्दा है और ट्रांसजेंडर नीतियों को लेकर तकनीकी नियमों के अलावा भविष्य में शोध से मिले प्रमाण के आधार पर और नीतियों की भी जरूरत पड़ सकती है."

संघ के एक प्रवक्ता ने रॉयटर्स से ईमेल के जरिए अपना बयान साझा किया जिसमें उन्होंने लिखा कि यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि खिलाड़ियों के लिंग परिवर्तन से जुड़ी प्रक्रियाओं को बेहतर परिभाषित किया जा सके.

बयान के मुताबिक, "कई देशों में ट्रांसजेंडर कानून तेजी से विकसित हो रहे हैंऔर कई खेल संस्थाएं अपनी नीतियां अपना रही हैं. फीडे इन सभी बदलावों को देखता रहेगा और यह फैसला लेगा कि इन्हें शतरंज की दुनिया में कैसे लागू किया जा सकता है."

बयान में यह भी कहा गया कि ट्रांसजेंडर खिलाड़ी अभी भी "ओपन" श्रेणी की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकते हैं. शतरंज में अधिकांश प्रतियोगिताएं सभी खिलाड़ियों के लिए खुली होती हैं, सिवाय महिलाओं की विश्व चैंपियनशिप जैसी कुछ प्रतियोगिताओं के.

'ट्रांस पैनिक' का मामला?

कई खेलों की प्रबंधक संस्थाओं ने महिलाओं की एलीट प्रतियोगिताओं में ट्रांसजेंडर महिलाओं के हिस्सा लेनेसे जुड़े नियमों को कड़ा कर दिया है. इनमें साइकलिंग, ऐथलेटिक्स और तैराकी भी शामिल हैं.

अभी तक इस तरह के कदम जिन जिन खेलों में उठाये गए हैं उनमें भारी शारीरिक गतिविधि शामिल होती है, लेकिन शतरंज में ऐसा नहीं हैं. फीडे के इस फैसले का एडवोकेसी समूहों और ट्रांसजेंडर अधिकार समर्थकों ने आलोचना की है.

अमेरिका में नेशनल एलजीबीटीक्यू टास्क फोर्स की कम्युनिकेशन्स डायरेक्टर कैथी रेना ने कहा कि ऐसा लगता है कि यह "'ट्रांस पैनिक' का मामला लगता है, जिसकी कोई सफाई नहीं है, हकीकत में कोई आधार नहीं है और एक बार फिर ट्रांस लोगों को मार्जिनलाइज करने" की कोशिशहै.

रेना ने एक ईमेल में लिखा कि ये नए दिशानिर्देश "गुस्सा दिलाने वाले, कंफ्यूज करने वाले, विरोधाभासी हैं और इस बात का संकेत हैं कि ट्रांस-विरोधी मूवमेंट - विशेष रूप से वो लोग जो खेलों में एक्सक्लूजन को बढ़ावा देते हैं - कॉम्पिटिटिव खेलों के दूसरे इलाकों में भी फैल रहा है और यह एक बेहद परेशान करने वाली घटना है."

सीके/वीके (रॉयटर्स, एपी)

Source: DW

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