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कम क्यों होती जा रही भारत में आम लोगों की औसत लंबाई?

नई दिल्ली, 01 अक्टूबर। वैज्ञानिक इस बात को लेकर हैरान हैं कि जब दुनियाभर में लोगों का कद बढ़ रहा है तो भारत में इसका उलट क्यों हो रहा है. शोधकर्ताओं का कहना है कि वैश्विक प्रवृत्ति के विपरीत भारत में आम नागरिकों की औसत लंबाई में गिरावट चिंता का विषय है.

दिल्ली के प्रमुख शैक्षणिक संस्थान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में सेंटर फॉर सोशल मेडिसिन एंड कम्युनिटी हेल्थ ने सरकार के वार्षिक राष्ट्रीय परिवार और स्वास्थ्य सर्वेक्षण पर आधारित एक शोध किया है. इस शोध रिपोर्ट के परिणामों के मुताबिक भारत में वयस्कों की औसत लंबाई चिंताजनक रूप से गिर रही है.

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कद घट रहा है

अध्ययन में 15 से 25 वर्ष की आयु के बीच और 26 से 50 वर्ष की आयु के बीच के पुरुषों और महिलाओं की औसत लंबाई और उनकी सामाजिक व आर्थिक पृष्ठभूमि का विश्लेषण किया गया. ओपन एक्सेस साइंस जर्नल पीएलओएस वन में यह शोध छपा है.

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 1998-99 की तुलना में 2005-06 और 2015-16 के बीच वयस्क पुरुषों और महिलाओं की लंबाई में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. कद में सबसे ज्यादा गिरावट गरीब और आदिवासी महिलाओं में देखी गई.

अमीर और गरीब में कद का फर्क

इस रिपोर्ट के मुताबिक पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की औसत लंबाई तेजी से घट रही है. इससे सबसे ज्यादा प्रभावित वो महिलाएं हैं जो एससी या एसटी समुदाय से आती हैं. अनुसूचित जनजाति समुदाय से आने वाली एक पांच साल की लड़की की लंबाई में सामान्य वर्ग की लड़की के मुकाबले 2 सेंटीमीटर की कमी आई है. जबकि अमीर घरों से आने वाली महिलाओं की औसत लंबाई में बढ़ोतरी हुई है.

पुरुषों के मामले में किसी भी वर्ग के लिए स्थिति अच्छी नहीं है, इसका मतलब पुरुष चाहे अमीर हो या गरीब या पिछड़ी जाति के, उनकी औसत लंबाई में एक सेंटीमीटर की कमी आई है.

भारतीय लोगों की औसत लंबाई में गिरावट वैश्विक प्रवृत्ति के खिलाफ है. शोध में शामिल शोधकर्ताओं ने लिखा, "भारत में वयस्कों की औसत लंबाई में गिरावट दुनिया भर में औसत लंबाई में वृद्धि के कारण चिंता का विषय है और इसके कारणों की तुरंत पहचान करने की जरूरत है. साथ ही भारतीय आबादी के विभिन्न आनुवंशिक समूहों के लिए लंबाई के विभिन्न मानकों के तर्कों पर और विचार करने की आवश्यकता है."

देश के लोगों में औसत लंबाई में यह कमी साल 2005 के बाद से आई है जबकि साल 1989 के बाद से देश के लोगों का कद बढ़ रहा था.

भारत में महिलाओं की औसत लंबाई पांच फीट एक इंच और पुरुषों की औसत लंबाई पांच फीट चार इंच है. हालांकि कुछ शोधकर्ता इसे दावे से असहमत नजर आते हैं.

खान पान का भी असर

शोधकर्ताओं का कहना है कि विभिन्न कारक वयस्क पुरुषों और महिलाओं के शरीर की लंबाई को प्रभावित करते हैं. अनुवंशिक कारक किसी व्यक्ति की लंबाई के 60-80 प्रतिशत में एक भूमिका निभाते हैं, पर्यावरणीय और सामाजिक कारण भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

रिपोर्ट के लेखकों का कहना है कि यह चिंता का विषय है कि भारत में लोगों की औसत लंबाई में गिरावट गैर-आनुवंशिक कारकों के कारण भी है. इनमें जीवनशैली, पोषण, सामाजिक और आर्थिक कारक शामिल हैं.

कद की कद्र क्यों

भारतीय समाज में लंबे लड़कों और लड़कियों को छोटे कद वालों के मुकाबले बेहतर माना जाता है. लंबे कद वालों को समाज में ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है और भारतीय समाज में मां-बाप भी चाहते हैं कि उनका बच्चा दूसरे बच्चों के मुकाबले लंबाई में ज्यादा हो.

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी समाज में रहने वाले लोगों की लंबाई बढ़ने या घटने में कई कारक शामिल होते हैं और किसी एक अध्ययन के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा. विशेषज्ञों मानते हैं कि इस मुद्दे पर आगे और शोध की जरूरत है. साथ ही उनका कहना है कि समाज के हर वर्ग को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के अलावा, जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने वाली बुनियादी सामाजिक और पर्यावरणीय सेवाएं देने पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है.

Source: DW

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