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हर साल झांकी को लेकर क्यों होती है राजनीति

गणतंत्र दिवस समारोह

हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली के कर्तव्यपथ पर देश की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता का एक अनूठा मिश्रण पेश किया जाता है. लेकिन हर साल राज्यों की झांकी को लेकर भी राजनीति खूब होती है. झांकियों को शामिल करने और नहीं करने को लेकर सालों से विवाद होता आया है.

इस बार पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गणतंत्र दिवस परेड में पंजाब की झांकी शामिल नहीं करने पर बीजेपी और केंद्र सरकार की आलोचना की है. उन्होंने कहा है कि इससे ज्यादा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता है.

मान ने एक बयान में कहा कि हर साल गणतंत्र दिवस परेड समारोह में शानदार औपचारिक झांकियां शामिल होती हैं, जो विभिन्न राज्यों की झांकीके माध्यम से भारत, इसकी विविधता में एकता और इसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को श्रद्धांजलि है.

उन्होंने कहा कि पंजाब नियमित रूप से झांकी परेड में शामिल होता रहा है. मान ने कहा कि पंजाब अपने समृद्ध इतिहास, रंगीन और जीवंत संस्कृति और महान देश के इतिहास को आकार देने वाली घटनाओं को परिभाषित करने के लिए महत्वपूर्ण बिंदु के साथ इस सीमावर्ती राज्य के महत्वपूर्ण महत्व को प्रदर्शित करता है.

झांकी पर राजनीति

गणतंत्र दिवस परेड में पंजाब की झांकी को शामिल नहीं करने पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा कि केंद्र सरकार का यह पंजाब विरोधी रुख अनुचित और अवांछनीय है.

उन्होंने कहा कि यह बड़ी निराशा की बात है कि इस साल वतन के रखवाले- भारत की सैन्य शक्ति और अन्नदाता, नारी शक्ति में पंजाब की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चयन समिति के सामने विचारों की प्रस्तुति के बावजूद पंजाब राज्य की झांकी को गणतंत्र दिवस परेड के लिए नहीं चुना गया.

मान ने कहा कि हालांकि चयन समिति ने विचारों की सराहना भी की लेकिन यह निराशाजनक है कि पूरी दुनिया के साथ-साथ इस महान देश के लोग उस समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक श्रद्धांजलि से महरूम हो जाएंगे जो पंजाब ने दिखाया है.

कैसे चुनी जाती हैं झांकियां

रक्षा मंत्रालय गणतंत्र दिवस परेड के लिए जिम्मेदार है और झांकी के लिए समन्वय निकाय है. गणतंत्र दिवस परेड के लिए झांकियों का चयन रक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ कमेटी ही करती है. अलग-अलग क्षेत्रों के विशिष्ट व्यक्तियों की समिति प्रस्तावों में से सर्वश्रेष्ठ झांकी का चयन करती है. इस साल 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की 23 झांकियों को चुना गया है.

कला, संस्कृति, चित्रकला, मूर्तिकला, संगीत, वास्तुकला, नृत्यकला के प्रमुख लोगों की विशेषज्ञ समिति शॉर्टलिस्टिंग करती है.

चुनी हुई और अंतिम चयन के प्रस्तावों का मूल्यांकन करने के लिए वे छह से सात दौर की बैठकें करते हैं. जब कमेटी द्वारा अनुमोदित हो जाता है तो उसके बाद प्रतिभागियों को अपने प्रस्तावों के त्रिआयामी मॉडल पेश करने होते हैं. फिर अंतिम चयन के लिए विशेषज्ञ पैनल द्वारा त्रिआयामी मॉडल की फिर से जांच की जाती है. अंतिम चयन दृश्य अपील, जनता पर प्रभाव, इसके पीछे के विचार और संगीत पर आधारित होती है.

पिछले साल पश्चिम बंगाल की झांकी शामिल नहीं की गई थी. जिसपर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र के इस फैसले की निंदा की थी. इससे पहले वर्ष 2015, 2017 और 2018 में भी बंगाल की झांकी को अनुमति नहीं मिली थी.

Source: DW

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