पश्चिम बंगाल चुनाव: भाजपा की फाइनल लिस्ट में मिथुन चक्रवर्ती का नाम ना होने का क्या मतलब है?

कोलकाता: पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को 13 सीटों के लिए उम्मीदवारों की आखिरी लिस्ट जारी कर दी। लेकिन, इसमें बंगाली फिल्मों के 'दादा' और बॉलीवुड के 'डिस्को डांसर' मिथुन चक्रवर्ती का नाम नहीं होना, उनके फैंस के साथ-साथ भाजपा समर्थकों और कार्यकर्ताओं को भी चौंका गया है। मिथुन को उम्मीदवार नहीं बनाना बहुत ही हैरान करने वाला फैसला लग रहा है। क्योंकि, उनकी बीजेपी में एंट्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड की हाई-प्रोफाइल रैली में हुई थी। जिस मंच पर पीएम मोदी के सामने भाजपा के बड़े-बड़े नेताओं को जगह नहीं मिली थी, वहां 'दादा' ने उनका स्वागत किया था। उसी मंच से उन्होंने खुद को 'प्योर कोबरा' बताया था। लेकिन, सवाल उठ रहा है कि टिकट ना देकर पार्टी ने कहीं चुनाव से पहले ही उनके 'सियासी दांत' तोड़ तो नहीं दिए हैं ?

मिथुन को टिकट नहीं देना चौंकाने वाला फैसला

मिथुन को टिकट नहीं देना चौंकाने वाला फैसला

मिथुन की भारतीय जनता पार्टी में एंट्री के साथ उनका चुनाव मैदान में उतरना कई लोग तय मान रहे थे। दक्षिण कोलकाता की हाई-प्रोफाइल राश बिहारी सीट को जिसे उनके लिए मुफीद बताया जा रहा था, वहां से पार्टी ने अब लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रत साहा को उतार दिया है। भाजपा के लोग पहले कह रहे थे कि इस प्रतिष्ठित सीट को मिथुन दा के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है। भाजपा सूत्रों के इन दावों में इसलिए दम लग रहा था क्योंकि हाल ही में उन्होंने मुंबई से अपना वोटर आईडी कार्ड कोलकाता शिफ्ट करवाकर यहां कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराया था। ऐसे में उनका नाम बीजेपी की आखिरी लिस्ट से भी गायब रहना निश्चित तौर पर हैरान करने वाला फैसला लग रहा है।

30 मार्च को नंदीग्राम में शाह के साथ कर सकते हैं रोड शो

30 मार्च को नंदीग्राम में शाह के साथ कर सकते हैं रोड शो

वैसे मिथुन का नाम बीजेपी की लिस्ट में ना देखकर उनके चाहने वाले अगर निराश हुए होंगे तो उनके लिए एक राहत की खबर भी है। दादा अभी भी पार्टी के स्टार प्रचारक हैं और 30 मार्च को नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी के खिलाफ और सुवेंदु अधिकारी के समर्थन में जोरदार प्रचार करने के लिए पहुंच रहे हैं। माना जा रहा है कि उस दिन के रोड शो में खुद गृहमंत्री अमित शाह भी वहां मौजूद रहेंगे। इस बीच बीजेपी ने पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अशोक लाहिड़ी की सीट बदलकर उन्हें बालूरघाट से टिकट दे दिया है। पहले पार्टी ने उन्हें नॉर्थ बंगाल के अलीपुरद्वार से मैदान में उतारा था। वैसे, बंगाल में पार्टी की ओर से उम्मीदवारों की सीटें बदलने का यह अकेला मामला नहीं है।

7 अप्रैल है नामांकन की आखिरी तारीख, तब तक विकल्प बचे हैं ?

7 अप्रैल है नामांकन की आखिरी तारीख, तब तक विकल्प बचे हैं ?

बात प्रत्याशी बदलने की हो रही है तो पार्टी ने नॉर्थ 24 परगना की गायघाट सीट पर सुब्रत ठाकुर को नया उम्मीदवार बनाया है। वह मतुआ समुदाय से आने वाले भाजपा सांसद शांतनु ठाकुर के भाई हैं। माना जा रहा है कि इस समुदाय का 30-40 सीटों पर प्रभाव है और उसे टिकट नहीं दिए जाने पर पार्टी एमपी नाराज थे। कहा जा रहा है कि सोमवार को उनकी शाह से मुलाकात हुई उसके बाद उनके भाई के टिकट का रास्ता साफ कर दिया गया। इसी तरह से पार्टी को चौरंगी और काशीपुर-बेलगछिया से भी उम्मीदवार बदलने पड़े हैं। इसलिए, अगर मिथुन चक्रवर्ती का नाम पार्टी की अंतिम लिस्ट में नहीं भी है तो इसका मतलब ये कतई नहीं है कि उनके लिए पार्टी के सारे विकल्प बंद हो चुके हैं।

मोदी-शाह ने कुछ और बड़ा सोच रखा है ?

मोदी-शाह ने कुछ और बड़ा सोच रखा है ?

राज्य में 8 चरणों का चुनाव होना है। राश बिहारी सीट जहां से मिथुन के चुनाव लड़ने की चर्चा थी, वहां 26 अप्रैल को वोटिंग होनी है और 7 अप्रैल तक नाम दर्ज किया जा सकता है। इसी तरह 8वें चरण के लिए भी 29 अप्रैल को चुनाव होना है और 7 अप्रैल तक वहां भी पर्चे भरे जा सकते हैं। यानी अगर पार्टी ने आखिरी वक्त के लिए उनके लिए कोई मास्टरस्ट्रोक टाइप सीट सोच रखी हो हो तो इसकी संभावना से अभी इनकार भी नहीं किया जा सकता। लेकिन, इतना तो तय है कि अगर पार्टी किसी रणनीति के तहत ये सब कर रही है तो इसके बारे में खुद मिथुन को भी जरूर इल्म होगा। ये भी हो सकता है कि मोदी और शाह ने उनके लिए कुछ और बड़ा सोच रखा होगा!

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