'ऑफिस के बाहर बॉक्स में गिरा दिया, पता नहीं किसने पैसे दिए', चुनावी बांड पर तृणमूल कांग्रेस नेता का खुलासा
Electoral Bonds Update News: 'चुनावी बांड योजना' इन दिनों लोकसभा चुनाव से पहले चर्चा का विषय बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश के बाद एसबीआई के खुलासे के बाद कि सबसे ज्यादा बॉन्ड बीजेपी को मिला है। वहीं, दूसरे स्थान पर तृणमूल कांग्रेस है। इसको लेकर तृणमूल कांग्रेस नेता कुणाल घोष ने बड़ा बयान दिया है।
घोष ने कहा कि पार्टी को यह नहीं पता कि चुनावी बांड योजना के तहत पार्टी को किसने पैसा दिया , या यह जानकारी नहीं है कि राशि कितनी थी। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि पार्टी कार्यालय के बाहर एक 'ड्रॉप बॉक्स' रखा रहता है, जिसमें कोई इसे दे गया। उन्होंने यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए की। आइए जानते हैं आगे क्या कहा?

घोष ने मीडिया से कहा कि मैं एक बहुत स्पष्ट बयान देना चाहता हूं। चुनावी बांड बीजेपी द्वारा शुरू किए गए थे, उन्होंने इसे लाने के लिए कानून बनाया था। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 90 के दशक से इस बात पर जोर दे रही हैं कि चुनाव राज्य के वित्तपोषण पर होना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री भी 'काले धन, भारी मात्रा में धन के प्रवाह को समाप्त करने' पर जोर दे रहे हैं। यह कई सालों से उनकी मांग और सिद्धांत रही है। लेकिन, बीजेपी ने इसे नहीं सुना। बीजेपी चुनावी बांड के रूप में नया नियम लेकर आई और हम सभी ने इसका पालन किया। तृणमूल कांग्रेस को पता नहीं था कि कितना पैसा है और पार्टी को किसने दिया गया...तृणमूल कांग्रेस भवन के सामने एक ड्रॉप बॉक्स रखा रहता था। उसी में कोई दे गया।
'बीजेपी ने काला धन जमा करने के लिए चुनावी बॉन्ड का यूज किया'
तृणमूल कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए कानून के अनुसार, चुनावी बांड में 'केवल अल्फ़ान्यूमेरिक कोड होगा' और कोई नाम नहीं होगा। यह नहीं बताया गया कि यह कौन सी कंपनी थी या दानकर्ता कौन था। बीजेपी ने देश में यह प्रणाली शुरू की। वे जानते थे कि उन्हें पैसा किसने दिया, क्योंकि उनके पास केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय थे। वे (बीजेपी) धन एकत्र करने के लिए (बांड के माध्यम से) इन एजेंसियों का उपयोग किया।
लेकिन, तृणमूल कांग्रेस के पास इनमें से कोई भी एजेंसी नहीं है, हमें नहीं पता कि हमें कितना पैसा दिया गया था। हमने ड्रॉप बॉक्स से पैसा इकट्ठा किया, जिसे किसी व्यक्तिगत बैंक खाते में नहीं बल्कि पंजीकृत खातों में जमा किया गया था, और फिर हमने पैसा नियमों के अनुसार भुनाया।












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