खत्म हुई आरजी कर मेडिकल कॉलेक के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल, 41 दिन बाद वापस काम पर लौटेंगे सभी
rg kar medical college: पिछले 41 दिनों के विरोध प्रदर्शन के बाद आरजी कर मेडिकल और अस्पातल के जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल खत्म करने का फैसला किया है। डॉक्टर्स आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में ट्रेनी लेडी डॉक्टर के साथ हुई घटना के बाद से हड़ताल पर थे।
न्यूज़ एजेंसी एएनआई की खबर के मुताबिक, पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर कल यानी शुक्रवार 20 सितंबर को अपनी हड़ताल वापस लेंगे और शनिवार से सभी काम पर लौटेंगे। आपातकालीन सेवाएं फिर से शुरू होंगी लेकिन ओपीडी सेवाएं निलंबित रहेंगी। बता दें कि ममता सरकार लगातार डॉक्टरों से काम पर वापस लौटने की मांग कर रही थी।

सुप्रीम कोर्ट ने भी डॉक्टरों को वापस काम पर लौटने को कहा था। हड़ताल खत्म करने को लेकर डॉ अकीब का बयान भी सामने आया है। डॉ अकीब ने कहा कि विरोध के 41वें दिन पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट की तरफ से बताया जा रहा है कि हमने अपने आंदोलन के दौरान बहुत कुछ हासिल किया, लेकिन कई चीजें हम अभी हासिल नहीं कर पाए हैं।
हमने अपने प्रदर्शन के बलबूते पर कोलकाता के पुलिस आयुक्त को इस्तीफा दिलवाया और डीएमई, डीएचएस को भी इस्तीफा दिलवाया। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आंदोलन ख़त्म हो गया है। हम अपने आंदोलन को नए रूप से आगे लेकर जाएंगे। कल मुख्य सचिव के साथ हमारी बैठक के बाद हमें नबन्ना से एक निर्देश मिला है।
निर्देश में हमें आश्वासन दिया गया है कि सुरक्षा कार्यान्वयन किया जाएगा, लेकिन यह कब होगा ये नहीं बताया गया। हम अभी भी मांग करते हैं कि प्रमुख सचिव को हटाया जाए। कल हम स्वास्थ्य भवन से सीजीओ कॉम्प्लेक्स तक एक रैली आयोजित करने वाले हैं और अपना विरोध यही समाप्त करने की घोषणा करते हैं।
अपनी ड्यूटी पर लौटने के बाद हम प्रशासन पर कड़ी नजर रखेंगे... अगर हमें कुछ भी गलत मिलता है, तो हम और मजबूत होकर वापस आएंगे। हम शनिवार को काम पर लौट रहे हैं और आवश्यक सेवाएं फिर से शुरू कर रहे हैं। ओपीडी और ओटी सेवाएं निलंबित रहेंगी क्योंकि हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि महिला सहकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपाय किए जाएं।
हमारा आंदोलन जारी रहेगा। अभया के लिए न्याय हमेशा हमारी प्राथमिकता रहेगी और हमारी नजरें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर हैं। बता दें कि जूनियर डॉक्टरों ने घटना के जवाब में पांच प्रमुख मांगें रखी थीं, जिसके कारण उनका विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार ने इनमें से तीन मांगों पर सहमति जताई, जिसमें दुर्व्यवहार के आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में वरिष्ठ पदों पर बदलाव करना शामिल है। विशेष रूप से, चिकित्सा शिक्षा निदेशक और स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक को उनके पदों से हटा दिया गया।
इसके अलावा, मंगलवार को पुलिस आयुक्त विनीत गोयल को एक नए आईपीएस अधिकारी के साथ बदल दिया गया और कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (उत्तर) को भी बर्खास्त कर दिया गया, जिन पर पीड़ित परिवार ने रिश्वतखोरी का आरोप लगाया था। जूनियर डॉक्टरों द्वारा रखी गई मांगें स्पष्ट थीं और उनका उद्देश्य जवाबदेही सुनिश्चित करना था।












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