'3 साल के बेटे को क्या बताऊंगा', US से आए बंगाल के IT पेशेवर बितन अधिकारी को पहलगाम में मारी गोली, टूटा परिवार

Pahalgam Terrorist Attack: कोलकाता के आईटी प्रोफेशनल और फ्लोरिडा निवासी बितन अधिकारी अपने परिवार के साथ पहलगाम की वादियों में सुकून के कुछ पल बिताने आए थे। पत्नी सोहिनी और तीन साल के बेटे के साथ उनका यह सफर यादगार बनने वाला था, लेकिन 16-24 अप्रैल की इस यात्रा ने एक ऐसा खौफनाक मोड़ लिया, जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता था।

22 अप्रैल की दोपहर जब सूरज वादियों को रोशन कर रहा था, आतंक के अंधेरे ने इस परिवार पर कहर बरपा दिया। आतंकवादियों ने पहलगाम में बितन अधिकारी की बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी।

Terrorist Attack

'मैं उसके बेटे को क्या जवाब दूंगा?'

बितन के चचेरे भाई दीपक चक्रवर्ती की आंखें आज भी उस मासूम बच्चे की ओर उठती हैं, जिसकी दुनिया उसके पिता की आवाज, हंसी और सुरक्षा में सिमटी थी। कांपती आवाज में उन्होंने कहा, "मैं उसके बेटे को क्या जवाब दूंगा? कैसे बताऊं कि उसके बाबा अब कभी वापस नहीं आएंगे?"

घर की दीवारों पर लगी तस्वीरें अब उनकी मुस्कान नहीं, एक खामोश चीख बन गई हैं। बितन के चाचा बिमल रॉय ने एक न्यूज चैनल से बात करते हुए कहा, "सोहिनी पूछ रही थी - चाचा, मैंने क्या किया था? उन्होंने हमारे साथ ऐसा क्यों किया? सब खत्म हो गया है।" उनकी बातें दिल को चीर जाती हैं।

पत्नी और बेटा अभी भी कश्मीर में

बितन की पत्नी और उनका तीन साल का बेटा अभी भी कश्मीर में हैं। प्रशासन के मुताबिक, पश्चिम बंगाल सरकार उनके पार्थिव शरीर को शीघ्र कोलकाता लाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना को 'विनाशकारी' बताते हुए पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना जताई और पीड़ित पत्नी को भरोसा दिया कि राज्य सरकार इस संकट की घड़ी में उनके साथ खड़ी है।

बंगाल सरकार में मंत्री अरूप बिस्वास ने भी परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। परिवार के सदस्यों ने बताया कि बितन ने हाल ही में मंगलवार दोपहर को उन्हें फोन किया था, और कहा था कि वे सुरक्षित हैं और योजना के अनुसार घर लौटने की उम्मीद कर रहे हैं।

इस हमले के समय पास ही मौजूद कृष्णानगर के सुदीप्तो दास और उनकी पत्नी ने भी उस भयावह क्षण को महसूस किया। वे 'मिनी स्विट्ज़रलैंड' कहे जाने वाले इलाके में एक शिव मंदिर के पास थे, जब गोलियों की आवाज आई। सेना की मदद से वे श्रीनगर पहुंचाए गए, लेकिन अब भी उस सदमे से उबर नहीं पाए हैं।

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