बंगाल स्थापना दिवस पर ममता बनर्जी को आपत्ति, बोलीं- कम से कम 20 जून को ना होता उत्सव, ये तो त्रासदी का दिन
पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस को लेकर सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि उनका पूरा जीवन इसी राज्य में बीता। लेकिन उन्होंने राज्य के स्थापना दिवस के बारे में कभी नहीं सुना।
Mamta Banerjee objects Bengal Foundation Day: पश्चिम बंगाल दिवस की तारीख को लेकर सीएम ममता बनर्जी ने आपत्ति जताई है। उन्होंने गवर्नर डॉ. सीवी आनंद बोस को इस संबंध में एक पत्र भी लिखा है। जिसमें बंगाल की सीएम राज्य का स्थापना दिवस आयोजित करने के फैसले को एकतरफा बताया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल का स्थापना दिवस कम से कम इस दिन तो नहीं मनाया जाना चाहिए। क्योंकि देश के विभाजन के वक्त इस दिन बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और कई परिवार अपनी जड़ों से अगल होकर विस्थापित हुए थे।

कार्यक्रम में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस से ठीक एक दिन पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य की जनता बधाई दी थी। जबकि सीएम ममता बनर्जी ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने राज्यपाल को एक पत्र लिखकर कहा कि राज्य का स्थापना दिवस आयोजित करने का उनका फैसला एकतरफा है। अपने पत्र में सीएम कहा कि राज्य की स्थापना किसी विशेष दिन नहीं हुई थी। कम से कम 20 जून को तो नहीं। सीएम ने कहा कि ये पश्चिम बंगाल के लिए एक त्रासदी का दिन था, जब देश के विभाजन के समय लाखों लोग अपनी जड़ों से अलग हुए थे। बड़ी संख्या में लोगों की मौत भी हुई।
20 जून, 1947 के बंगाल में क्या हुआ?
ये उस वक्त की बात है, जब देश आजाद हुआ था और बंगाल के विभाजन की चिंगारी सुलग रही थी। 20 जून, 1947 को हुई विधायकों के अगल- अलग गुटों के बैठकों के बाद आग और भड़क गई। एक गुट पश्चिम बंगाल को भारत का हिस्सा बनाना चाहता था, जबकि दूसरा गुट उन विधायकों का था जो ये चाहते थे के बंगाल पाकिस्तान के हिस्से में जाए। बाद में गतिरोध बढ़ और पूर्वी पाकिस्तान बना। उस वक्त असम के सिलहट जिले के लिए जनमत-संग्रह हुआ। दोनों ओर से करीब 25 लाख लोग विस्थापित हुए। इस विभाजन के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। दंगों में करोड़ों रुपये की संपत्ति को जलाया गया।












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