कोलकाता कांड पर सहयोगियों से क्यों नाराज हैं ममता बनर्जी? मुश्किल वक्त में भी राजनीति के लिए तैयार!
Kolkata Doctor Murder Rape Case: कोलकाता में ट्रेनी महिला डॉक्टर की आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए बलात्कार और हत्या के मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्ष के साथ-साथ सहयोगी दलों के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने बीजेपी-सीपीएम पर बंगाल में बांग्लादेश वाला हालात पैदा करने का भी आरोप लगाया है।
कोलकाता के पास बेहाला में टीएमसी की एक रैली में ममता ने इंडिया ब्लॉक में अपनी सहयोगी कांग्रेस पर भी निशाना साधा है, लेकिन उन्होंने मूल रूप से भाजपा और सीपीएम पर उनकी सरकार को अस्थिर करके सत्ता हथियाने की कोशिश का का भी दावा किया है। ममता ने इस तरह का दावा कोलकाता में बुधवार रात को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए बवाल से पहले किया था।

पीड़िता को न्याय दिलाने की जगह आरोपी को बचाने की कोशिश- राहुल
इससे पहले कोलकाता में ट्रेनी महिला डॉक्टर के साथ हुई बर्बर वारदात के बाद लगभग हफ्ते भर तक की संदिग्ध चुप्पी के बाद बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस घटना पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था, 'जूनियर डॉक्टर के खिलाफ क्रूर और अमानवीय कृत्य की परतें जिस तरह से खुल रही हैं', अगर कॉलेज जैसी जगह पर डॉक्टर सुरक्षित नहीं रहेंगे तो माता-पिता अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए कैसे भेजेंगे।
ममता ने कांग्रेस पर किया पलटवार
उन्होंने कहा, 'पीड़िता को न्याय दिलाने की जगह आरोपी को बचाने की कोशिश अस्पताल और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हैं।' राहुल ने अपने बयान में ममता सरकार का नाम तक नहीं लिया था। लेकिन, राहुल का यह बयान भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को नागवार गुजरा। उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा, 'मैं कांग्रेस से पूछती हूं....आपके (कांग्रेस शासित) राज्यों में कितनी घटनाएं हुई हैं और आपने क्या कार्रवाई की है?'
लेकिन, ममता के निशाने पर विशेष रूप से सीपीएम और बीजेपी ही रही। बीजेपी तो वहां मुख्य विपक्षी दल है, लेकिन सीपीएम तो इंडिया ब्लॉक में टीएमसी की सहयोगी भी है और गठबंधन की बैठकों में दोनों दलों के नेता शामिल भी होते रहे हैं।
बीजेपी, सीपीएम...यहां बांग्लादेश बनाना चाहते हैं- ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने कहा, 'केंद्र के सहयोग से बीजेपी और सीपीएम ने बंगाल को बदनाम करने और स्थिति का फायदा उठाने के लिए एक समन्वित नजरिया अपनाया है.....वे यहां बांग्लादेश बनाना चाहते हैं। मुझे कुर्सी की कोई लालसा नहीं है। मैं यहां लोगों की सेवा करने आई हूं।'
उन्होंने यूपी से लेकर मणिपुर तक भाजपा शासित राज्यों का भी हवाला दिया और पश्चिम बंगाल की पूर्ववर्ती सीपीएम सरकार में हुई घटनाओं को भी याद दिलाकर उनपर सवाल उठाने की कोशिश की। ममता बोलीं कि 'सिर्फ सोशल मीडिया पर कुछ लाइक्स और मीडिया फुटेज के लिए घटना पर राजनीति की कोशिश न करें।'
'बाम-राम की साजिश' के खिलाफ टीएमसी 17 को करेगी प्रदर्शन
उन्होंने कहा कि टीएमसी 'बाम (लेफ्ट)-राम(बीजेपी) की (पश्चिम बंगाल को) बदनाम करने की साजिश' के खिलाफ 17 अगस्त को विरोध रैली आयोजित करेगी।
मुश्किल वक्त में भी राजनीति करती दिख रही हैं ममता!
ममता सरकार के लिए सियासी तौर पर यह एक बहुत ही कठिन वक्त है। लेकिन, कठिनाइयों के बावजूद वह मसले को राजनीतिक रंग देने की कोशिशों में पीछे नहीं हैं।
ममता सरकारी की मनाही के बावजूद कलकत्ता हाई कोर्ट घटना की जांच सीबीआई को सौंप चुका है। अब ममता का कहना है कि 'हम रविवार तक अपराधियों को फांसी दिए जाने की मांग करते हैं।'
टीएमसी सुप्रीमो को पता है कि किसी अपराधी को फांसी या कोई भी सजा देने की एक कानूनी प्रक्रिया है और वह भी अदालत तय करती है। फिर रविवार तक फांसी की मांग करके वह किसे गुमराह करना चाहती हैं?
यही नहीं, उनका कहना है कि 'सोशल मीडिया पर लोग बदनाम करने का एक अभियान चला रहे हैं। मुझे जितनी गाली देना है दें, लेकिन बांग्ला मांग को गाली मत दें।'












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